मंदिरों के चढ़ावे पर 'कब्जा' क्यों? DC-SDM के चंगुल से मुक्त हों झारखंड के मंदिर, धार्मिक न्यास परिषद अध्यक्ष का विवादित बयान
झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष जयशंकर पाठक ने राज्य के मंदिरों को डीसी और एसडीएम के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की है। उन्होंने मंदिर ...और पढ़ें

झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष जयशंकर पाठक ने झारखंड के मंदिरों को डीसी-एसडीएम के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग। (फोटो: जागरण)
HighLights
पहाड़ी मंदिर, बाबाधाम, इटखोरी और रजरप्पा मंदिर पर सवाल।
आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक नहीं, ऑडिट रिपोर्ट गायब।
झारखंड में वैदिक विश्वविद्यालय स्थापित करने का न्यास का लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष जयशंकर पाठक ने राज्य के मंदिरों की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि झारखंड के मंदिरों को जिलों के डीसी और एसडीएम के नियंत्रण से मुक्त किए बिना उनकी स्थिति में सुधार संभव नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारियों के पास पहले से ही अनेक प्रशासनिक जिम्मेदारियां होती हैं।
ऐसे में उनसे मंदिरों के संरक्षण, संचालन और विकास की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। जयशंकर पाठक ने कहा कि राज्य के कई बड़े मंदिरों की प्रबंधन समितियों ने वर्षों से जिलों के उपायुक्तों को अध्यक्ष बनाकर एक ऐसी व्यवस्था कायम कर दी है, जिसमें वास्तविक जवाबदेही खत्म हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मंदिरों की व्यवस्था में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए जानबूझकर ऐसी व्यवस्था बनाए रखते हैं ताकि वित्तीय अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा सके।
राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम, चतरा के इटखोरी मंदिर और रामगढ़ के रजरप्पा मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की आय-व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता।
किसी भी मंदिर की नियमित ऑडिट रिपोर्ट सामने नहीं आती और श्रद्धालुओं को यह जानकारी नहीं मिलती कि मंदिरों में चढ़ावे से कितनी आय हुई और वह धन कहां खर्च किया गया।
समाज के काम आए मंदिरों की आय
जयशंकर पाठक ने कहा कि देश के कई मंदिर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, लेकिन झारखंड के मंदिर इस दिशा में पीछे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पटना का महावीर मंदिर आज कई बड़े अस्पताल चला रहा है और अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए भी उसने बड़ा आर्थिक सहयोग दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड के मंदिरों के पास पर्याप्त आय होने के बावजूद यहां कोई बड़ा स्कूल, कालेज, अस्पताल या विश्वविद्यालय क्यों नहीं चलाया जा रहा। उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों की आय का पारदर्शी उपयोग हो तो धार्मिक संस्थाएं समाज के कल्याण में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
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बाबाधाम की जमा राशि पर भी उठाए सवाल
धार्मिक न्यास परिषद अध्यक्ष ने देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वर्षों से बड़ी राशि फिक्स्ड डिपाजिट के रूप में जमा है। उन्होंने कहा कि यह विचार करने की जरूरत है कि इतनी बड़ी राशि केवल बैंक खातों में पड़ी रहे या उसे मंदिर क्षेत्र के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि बाबाधाम जैसे बड़े धार्मिक स्थल के संसाधनों से एक विश्वविद्यालय या आधुनिक अस्पताल की स्थापना की जा सकती है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके।
जगन्नाथ मंदिर घटना पर जताई चिंता
रांची के जगन्नाथ मंदिर में हाल में सुरक्षा गार्ड की हत्या की घटना पर दुख जताते हुए पाठक ने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन समितियों की जिम्मेदारी है कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों, सुरक्षा गार्डों और पुजारियों को समय पर वेतन मिले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निगरानी की है, जबकि दैनिक संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन समितियों की होती है।
वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना का लक्ष्य
जयशंकर पाठक ने कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में झारखंड में एक वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैदिक अध्ययन के लिए राज्य के छात्रों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। अगर राज्य में ऐसी संस्था बने तो झारखंड धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
राज्य सरकार की ओर से परिषद को मिलने वाली राशि का उपयोग पुराने और जीर्ण-शीर्ण मंदिरों के पुनरुद्धार में किया जाएगा ताकि झारखंड की धार्मिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।
मंदिरों के विकास के लिए सबसे पहले उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण की जड़ता से बाहर निकालना होगा, तभी श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिरों की व्यवस्था दोनों मजबूत हो सकेंगी।
गार्ड हत्याकांड: भाजपा ने की 50 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या के बाद राजनीति गरमा गई है। सोमवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। भाजपा ने सरकार से मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि खुद को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार में आदिवासी ही सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति का 'कांग्रेसीकरण' कर दिया गया है और इसमें स्थानीय लोगों को जगह नहीं दी गई। साहू ने मंदिर के आसपास फल-फूल रहे नशे के कारोबार और ध्वस्त कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
पार्टी की ओर से परिजनों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और अमर कुमार बाउरी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।