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    झारखंड ट्रेजरी घोटाले की हो CBI जांच, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से की मांग

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 10:05 PM (IST)

    पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में कोषागारों से हुई अवैध निकासी को संगठित अपराध बताते हुए सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने इ ...और पढ़ें

    बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से की मांग। (फाइल फोटो)

    बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से की मांग। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. बाबूलाल मरांडी ने अवैध ट्रेजरी निकासी को संगठित अपराध कहा।

    2. घोटाले की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की।

    3. भाजपा ने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।

    राज्य ब्यूरो, रांची। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कोषागारों से हुई अवैध निकासी को संगठित अपराध बताते हुए इसकी सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग सरकार से की है।

    इसे लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। अपने पत्र में बाबूलाल ने कहा है कि ट्रेजरी घोटाला अब पूरे देश में गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन चुका है। यह चारा घोटाला की पुनरावृत्ति जैसा है। साथ ही यह एक संगठित अपराध का हिस्सा है।

    उन्होंने कहा है कि बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना वास्तविकता से परे प्रतीत होता है।

    एक अकेला लेखपाल ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ कर, किसी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव कर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को अपने दम पर अंजाम नहीं दे सकता है।

    यह मामला किसी बड़े नेटवर्क और उच्चस्तरीय मिलीभगत से जुड़ा हुआ है। इस पूरे प्रकरण का एक पहलू यह है कि कौशल पांडेय जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक पटेल मयूर कन्हैयालाल तथा पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए थे।

    यह साबित करता है कि आरोपी को न केवल संरक्षण प्राप्त था, बल्कि उसे संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन भी मिला हुआ था। मरांडी ने पूरे मामले में जैप आईटी की भूमिका की भी जांच की मांग भी की है।

    बाबूलाल मरांडी ने लिखा है कि घोटाले में पुलिस की भूमिका दिख रही हो तो जांच का जिम्मा उन्हें देना सही नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट के वर्तमान जज या सीबीआई से इसकी निष्पक्ष जांच राज्य सरकार को करानी चाहिए।

    राज्य में वित्तीय संकट की स्थिति : प्रतुल

    इधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने शनिवार को प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।

    उन्होंने कहा कि 26 वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी महीने के ग्यारहवें दिन भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है।

    प्रतुल ने सरकार से प्रश्न किया कि क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर झारखंड की सरकार भी वेतन देने के लिए कर्ज लेने जा रही या किसी एडवांस का इंतजार कर रही है।

    प्रतुल ने कहा कि आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में दो-तीन दिनों में बजट को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद पांच अप्रैल तक भुगतान होता रहा है। लेकिन इस बार सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण पैसा ही नहीं है।

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