झारखंड में पीपीपी मॉडल से शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार, क्या है हेमंत सरकार का प्लान?
झारखंड का नगर विकास विभाग अब पीपीपी मॉडल के माध्यम से लंबित परियोजनाओं को पूरा करेगा। बजट में प्रावधान के साथ निजी पार्टियों की तलाश शुरू हो गई है। यह ...और पढ़ें

पीपीपी मॉडल से राज्य में बड़ी परियोजनाओं को संचालित करेगा नगर विकास विभाग

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राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में नगर विकास विभाग अब पीपीपी (पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से अपने लंबित कार्यक्रमों को पूरा करेगा। इसके लिए बजट में प्रविधान भी किया गया है एवं सदन में विभागीय मंत्री ने इसको लेकर सदस्यों को भरोसा भी दिलाया है।
इसके माध्यम से सरकार को एक ऐसा हथियार हाथ लगा है जिसके माध्यम से ना सिर्फ शहरी विकास को रफ्तार मिलेगी बल्कि वर्षों से लंबित योजनाओं को भी पूर्ण किया जा सकेगा। इसके लिए प्राइवेट पार्टियों की तलाश शुरू हो चुकी है। कुछ मामलों में यह कार्य प्रक्रियाधीन है।
झारखंड में ऐसे तो पीपीपी मॉडल पर दर्जनों योजनाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन इस मॉडल में लंबे समय के लिए बड़ी पूंजी लगानेवाले निवेशक सामने आ रहे हैं। ऐसी संस्थाएं अथवा ऐसे लोग जो योजना के निर्माण से लेकर उसके कार्यान्वयन तक में सहभागी होंगे।
इसका एक सफल उदाहरण राजधानी रांची में बिरसा मुंडा स्मृति पार्क के माध्यम से दिख रहा है। पार्क में विकास कार्यों, इसकी सुरक्षा के लिए गार्ड रखना और आनेजानेवालों से शुल्क वसूल करने के लिए एजेंसी का चयन किया जा चुका है।
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उसी एजेंसी के जिम्मे पार्क को कर दिया गया है और अब सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए तैयार रविंद्र भवन का जिम्मा भी ऐसी ही किसी एजेंसी को देने की तैयारी है। राज्य सरकार यहीं नहीं रुकेगी। आनेवाले दिनों में ट्रांसपोर्ट सिटी पार्ट-2, रांची, धनबाद और जमशेदपुर में आइएसबीटी के निर्माण का कार्य शुरू करना है।
लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत झारखंड राज्य आवास बोर्ड के पुनर्विकास से संबंधित योजनाओं का संचालन होना है। सूत्रों के अनुसार हाउसिंग बोर्ड के पुनर्विकास के लिए पीपीपी के माध्यम से फर्मों के चयन हेतु निविदा निकाली जा चुकी है और यह प्रक्रियाधीन है।
शहर के अंदर छोटी यात्राओं के लिए वाहनों पर निर्भरता की चुनौतियों का समाधान करने एवं यातायात जाम, वाहन उत्सर्जन और मोटर वाहन पार्किंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु कई सतत परिवहन पहल शुरू की है। ऐसी ही एक पहल पब्लिक बाइसाइकिल शेयरिंग (पीबीएस) है जिसे एक बार फिर नए स्वरूप में लांच करने की तैयारी है।
योजना रांची में पीपीपी मॉडल पर सफलतापूर्वक चली है। झारखंड में अब पीपीपी मॉडल के तहत दीर्घकालिक समझौतों पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बुनियादी ढांचे (जैसे सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे) या सेवाओं को बेहतर बनाना है।
इसके माध्यम से सरकार को योजनाओं की विफलता का जोखिम स्वयं नहीं उठाना पड़ेगा और साथ ही साथ प्रदर्शन-आधारित भुगतान और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित होगा। रांची और अन्य प्रमुख शहरों में फिलहाल सिटी बस सर्विस घाटे में चल रही है। इसे भी सफल बनाने के लिए निवेशकों की तलाश जारी है।