दुमका और गिरिडीह में नए चिड़ियाघर, रणथंभौर से आएंगे बाघ-चीते; वन्यजीवों का दलमा-सारंडा में होगा स्वागत
झारखंड में दुमका और गिरिडीह में दो नए चिड़ियाघर बनाए जा रहे हैं, जहां बाहर से लाए गए वन्यजीवों को पहले दलमा और सारंडा के रेस्क्यू सेंटर में अनुकूलित क ...और पढ़ें

भगवान बिरसा जैविक उद्यान ओरमांझी में धूप से बचने की जद्दोजहद। (फोटो: संजय सुमन)
HighLights
दुमका-गिरिडीह में नए चिड़ियाघर, सारंडा में सफारी।
बाहर से लाए वन्यजीव दलमा-सारंडा में अनुकूलित होंगे।
चिड़ियाघरों में बाघ, चीते और प्राकृतिक आवास होंगे।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में दो नए चिड़ियाघर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। दुमका और गिरिडीह में प्रस्तावित चिड़ियाघर में 200 के करीब वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है।
इसके लिए देश के दूसरे वन प्रभाग और नेशनल पार्क से वन्य जीव लाए जाएंगे। इन जीवों को पहले दलमा और सारंडा के रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा। बता दें कि सारंडा में नई सफारी भी बननी है। हाथियों के लिए बनाए गए इन रेस्क्यू सेंटर पर बाहर से आए जीवों को झारखंड की जलवायु में ढलने का मौका मिलेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञ शादाब हाशमी ने बताया कि बाघ, चीता जैसे वन्य जीव जल्दी दूसरे जीवों से घुलते मिलते नहीं हैं। नई जगह पर इन्हें आरामदायक माहौल नहीं मिलने पर इनकी मृत्यु तक हो जाती है।
कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए चीते की मौत के बाद केंद्रीय वन्यजीव संस्थान ने इनके ट्रांसपोर्ट और रिहेब्लिटेशन (आवास) के मानदंड कड़े कर दिए हैं।
दुमका और गिरिडीह में भी होगी चिकित्सा व्यवस्था
नए लाए वन्यजीवों को एकबार चिड़ियाघर में स्थानांतरित करने के बाद इनके चिकित्सा की व्यवस्था वहीं होगी। सरकार ने वन्य जीव संस्थान से इसके लिए पशु चिकित्सालय स्थापित करने में तकनीकी सहायता मांगी है।
दुमका और गिरिडीह में सात के करीब बाघ रखने की योजना विभाग बना रहा है। इसके अलावा रणथंभौर से चीते लाने के लिए केंद्र सरकार के अधिकारियों से बात की गयी है।
प्राकृतिक संरचना में रहेंगे वन्यजीव
विशेषज्ञों ने चिड़ियाघर में वन्यजीव के रहने के लिए प्राकृतिक आवास तैयार करने का निर्देश दिया है। मार्च में केंद्रीय वन्यजीव विशेषज्ञ ने दुमका और गिरिडीह के प्रस्तावित स्थलों का दौरा किया है। यहां साल के वृक्ष लगाने और बड़े चट्टानों को स्थाना करने की सलाह विशेषज्ञ ने दी है।