जहां कभी रेल की सीटी भी नहीं सुनी थी, वहां भी पहुंची ट्रेनें; 10 साल में झारखंड कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार
हजारीबाग, गिरिडीह, देवघर, गोड्डा, लातेहार और सिमडेगा जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉड गेज ट्रैक बिछाए गए हैं, जहां पहले कभी ट्रेन नहीं पहुंची थी। इ ...और पढ़ें

झारखंड के दूरदराज के इलाकों में पहुंची ट्रेनें, कनेक्टिविटी में सुधार।
HighLights
झारखंड के दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉड गेज ट्रैक बिछाए गए।
हजारीबाग, देवघर, गोड्डा जैसे शहर रेल नेटवर्क से जुड़े।
वंदे भारत से रांची-पटना यात्रा अब तेज और आरामदायक।
डिजिटल डेस्क, रांची। मोदी राज में झारखंड में ट्रेन वहां भी पहुंची, जहां किसी ने रेल की सीटी भी नहीं सुनी थी। पिछले 10-12 वर्षों में राज्य के उन दूरदराज इलाकों में जहां कभी ट्रेन की आवाज नहीं पहुंची थी, वहां ब्रॉड गेज ट्रैक बिछ चुके हैं और नियमित यात्री ट्रेनें दौड़ रही हैं।
हजारीबाग, गिरिडीह, देवघर, गोड्डा, दुमका के साथ ही लातेहार, लोहरदगा, नेटरहाट क्षेत्र और सिमडेगा-जमशेदपुर दिशा में भी रेल कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इन विकास कार्यों ने न केवल स्थानीय लोगों की यात्रा सुविधा बढ़ाई है, बल्कि रांची से पटना जाना भी पहले से कहीं आसान बना दिया है।
हजारीबाग-कोडरमा-रांची रूट पर नया युग
रेल बीट पर लंबे से समय से कार्य रहे जागरण के मुख्य संवाददाता शक्ति सिंह कहते हैं- कोडरमा-हजारीबाग-बरकाकाना-रांची रेल लाइन (211 किमी) के विभिन्न खंड मोदी सरकार के कार्यकाल में चरणबद्ध तरीके से पूरे हुए।
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोडरमा-हजारीबाग खंड का उद्घाटन और 2016 में हजारीबाग-बरकाकाना खंड के यात्री सेवा शुरू होने से हजारीबाग शहर अब रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ गया। अब वंदे भारत एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों से हजारीबाग टाउन से पटना पहुंचना मात्र 6 घंटे का सफर रह गया है, जबकि पहले यह अप्रत्यक्ष और लंबा रूट था।
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संताल परगना में देवघर-दुमका-गोड्डा की चमक
संताल परगना क्षेत्र में जसीडीह-दुमका-रामपुरहाट लाइन और हंसडीहा-गोड्डा नई लाइन (32 किमी) के 2021 में उद्घाटन ने देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम), दुमका और गोड्डा को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ा। अब गोड्डा से नई दिल्ली तक हमसफर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चल रही हैं। इन लाइनों ने पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।
लोहरदगा-रांची सेक्टर में मजबूत कनेक्टिविटी
रांची-लोहरदगा-टोरी जंक्शन सेक्शन पहले से सक्रिय है और यात्री ट्रेनें नियमित चल रही हैं। लातेहार जिले में लोहरदगा के रेल स्टेशन के जरिए अप्रत्यक्ष पहुंच आसान हुई है।
नेटरहाट (लातेहार का प्रसिद्ध हिल स्टेशन) के लिए निकटतम रेलहेड लोहरदगा या रांची है, जहां से सड़क मार्ग उपलब्ध है। नेटरहाट के लिए अलग रेल कनेक्टिविटी की स्टडी पूरी हो चुकी है, जो भविष्य में इस पर्यटन स्थल को और मजबूती देगी।
सिमडेगा-खूंटी-गुमला क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम
सिमडेगा, गुमला और खूंटी जिलों को रेल कनेक्टिविटी पहली बार मिलने जा रही है। 2025 में घोषित परियोजना के तहत लोहरदगा-गुमला (55 किमी), गुमला-सिमडेगा (43 किमी) और हटिया-खूंटी (20 किमी) नई रेल लाइनों की स्टडी पूरी हो चुकी है।
ये लाइनें मौजूदा रांची-लोहरदगा रूट से जुड़ेंगी। सिमडेगा से जमशेदपुर (टाटानगर) की दिशा में भी रांची मेगा लूप जैसी परियोजनाओं में कनेक्टिविटी का प्रस्ताव है, जो औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ेगा। ये विकास इन जिलों को रेल मानचित्र पर ला रहे हैं।
रांची-पटना सफर अब तेज और आरामदायक
वंदे भारत एक्सप्रेस (रांची-पटना) हजारीबाग, कोडरमा, गया होते हुए मात्र 6 घंटे में पटना पहुंचाती है। राज्य में वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो 14 जिलों को जोड़ रही हैं।
अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा
वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार कहते हैं कि झारखंड में अंग्रेजों के जमाने से ही रेल लाइन है, किंतु देश के कई बड़े शहरों से राजधानी रांची की कनेक्टिविटी नहीं के बराबर ही रही। अब इसमें सुधार हो रहा है। हजारीबाग और गोड्डा जैसे स्टेशन चमक रहे हैं।
वंदे भारत से पहले पटना जाना इतना आसान कभी नहीं था। इन नई लाइनों ने कोयला, खनिज परिवहन के साथ ही स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन (देवघर धाम, नेटरहाट हिल्स) को गति दी है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हजारीबाग रोड, देवघर, दुमका, गिरिडीह और अन्य स्टेशनों का आधुनिकीकरण हो रहा है। लातेहार-पलामू क्षेत्र में सोननगर-पतरातू थर्ड लाइन प्रोजेक्ट के कुछ खंड भी हाल में चालू हुए हैं।
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