झारखंड-बिहार में रेल क्रांति: पांच नई रेल ट्रैक से यात्रा होगी तेज, सुगम और सुविधाजनक
केंद्र सरकार की नई रेल परियोजनाओं से झारखंड और बिहार का रेल नेटवर्क मजबूत हो रहा है। मल्टी-ट्रैकिंग और नई लाइनों से ट्रेनों की आवाजाही बढ़ेगी, यात्री ...और पढ़ें

कोडरमा एरिया में रेल ट्रैक की जांच करते रेल कर्मी। (तस्वीर: जागरण)
HighLights
पांच नई रेल परियोजनाओं से नेटवर्क का विस्तार होगा।
यात्री व माल ढुलाई में तेजी और सुगमता आएगी।
धार्मिक-पर्यटन स्थलों तक पहुंच में सुधार होगा।
डिजिटल डेस्क, रांची। केंद्र सरकार की हालिया रेल परियोजनाओं से झारखंड और बिहार के रेल नेटवर्क को बड़ा बूस्ट मिल रहा है। मल्टी-ट्रैकिंग, थर्ड-फोर्थ लाइन और नई लाइनों के निर्माण से व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही बढ़ेगी, देरी कम होगी और यात्री व माल ढुलाई दोनों आसान होगी।
इन परियोजनाओं से लाखों यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा, खासकर देवघर, वैद्यनाथ धाम, चांडिल डैम, दलमा वन्यजीव अभयारण्य जैसे धार्मिक-पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
रेल मंत्रालय और हालिया कैबिनेट फैसलों के अनुसार झारखंड-बिहार में पांच प्रमुख नए व अतिरिक्त रेल ट्रैक (मल्टी-ट्रैकिंग और नई लाइनें) तेजी से बन रहे हैं या स्वीकृत हो चुके हैं।
ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति प्लान का हिस्सा हैं और 2030-31 तक पूरा होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर सैकड़ों किलोमीटर नेटवर्क बढ़ेगा, माल ढुलाई में 52 मिलियन टन अतिरिक्त क्षमता आएगी और सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी।
1. पुनारख-किऊल के बीच तीसरी और चौथी लाइन
बिहार के पटना-किऊल रूट पर दो अतिरिक्त लाइनें बिछाई जा रही हैं। यह व्यस्त रूट पहले से ही क्षमता से ज्यादा लोडेड है। नई लाइनों से यात्री ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी, देरी कम होगी और कोयला-सीमेंट जैसा माल ढुलाई सुचारू होगी।
2. गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन
झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र (चांडिल डैम, दलमा वन्यजीव अभयारण्य के पास) में दो अतिरिक्त लाइनें। इससे इस्पात, कोयला और खनिजों की ढुलाई तेज होगी। पर्यटकों को चांडिल डैम, हेसाकोचा वाटरफॉल, रायजामा घाटी पहुंचने में आसानी होगी।
3. सोन नगर-मोहम्मद गंज के बीच तीसरी रेल लाइन
औरंगाबाद (बिहार) से पलामू (झारखंड) तक 65 किमी लंबी थर्ड लाइन। लागत करीब 1338 करोड़ रुपये। कोयला-खनिज ढुलाई और पावर प्लांट्स को सप्लाई आसान होगी। यात्री ट्रेनों की स्पीड और संख्या दोनों बढ़ेगी।
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4. भागलपुर-डुमका-रामपुरहाट डबलिंग प्रोजेक्ट
177 किमी लंबे सिंगल लाइन रूट को डबल किया जा रहा है (लागत करीब 3169 करोड़ रुपये)। देवघर के वैद्यनाथ धाम और तारापीठ शक्ति पीठ जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत। पांच जिलों (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल) के 28 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा।
5. कोडरमा-बरकाकाना डबलिंग व कोडरमा-पटना रूट
कोडरमा-हजारीबाग-बरकाकाना लाइन की डबलिंग और कोडरमा से पटना तक नया रूट। रांची-जसीडीह का सफर 310 किमी से घटकर 255 किमी हो जाएगा। हजारीबाग, कोडरमा और बिहार के यात्रियों को देवघर जाने में बड़ी सुविधा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन ट्रैकों के बनने से रूटों की क्षमता 30-40% बढ़ जाएगी। यात्री ट्रेनों की पंकचुअलिटी बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और मालगाड़ियों को प्राथमिकता मिलेगी। पर्यावरणीय लाभ भी बड़ा—सड़क परिवहन कम होने से करीब 6 करोड़ लीटर तेल बचेगा और 30 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन घटेगा (एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर)।
रोजगार और स्थानीय प्रभाव
निर्माण के दौरान हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। झारखंड के खनिज क्षेत्रों और बिहार के कृषि-औद्योगिक बेल्ट को सीधा फायदा।
ये परियोजनाएं मोदी सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूत करेंगी। रेलवे बोर्ड जल्द ही इन सभी प्रोजेक्ट्स की डीपीआर और टाइमलाइन जारी करने वाला है।
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