चुनाव खत्म, उपदेश शुरू! पीएम मोदी की अपील पर झामुमो-कांग्रेस का तीखा पलटवार, कहा- आर्थिक विफलता का बोझ जनता पर क्यों?
झामुमो और कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की मितव्ययिता की अपील पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपाने के ...और पढ़ें

झामुमो महासचिव विनोद पांडेय बोले, केंद्र सरकार की सच्चाई अब सामने। (फोटो: फाइल)
HighLights
चुनाव बाद पीएम मोदी की मितव्ययिता अपील पर झामुमो-कांग्रेस का हमला।
सरकार पर आर्थिक विफलताएं छिपाने, जनता पर बोझ डालने का आरोप।
बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी के बीच जनता से त्याग की उम्मीद असंवेदनशील।
राज्य ब्यूरो, रांची। पेट्रोलियम पदार्थों और विदेशी वस्तुओं के उपयोग में कटौती करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर झारखंड के सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस ने साझा हमला बोला है।
दोनों पार्टियों का कहना है कि चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छुपाने के लिए आम जनता को त्याग का असंवेदनशील उपदेश दे रही है।
चुनाव तक चुप्पी, अब जनता को त्याग का उपदेश: झामुमो
पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग को लेकर संयम बरतने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पलटवार किया है। पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि चुनाव तक चुप्पी साधने के बाद अब पीएम त्याग का उपदेश दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री देशवासियों को पेट्रोल बचाने, सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएं रोकने, विदेशी सामान छोड़ने और घर से काम करने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय संकट आज बताया जा रहा है, उसकी शुरुआत आज नहीं हुई है।
युद्ध और वैश्विक तनाव की स्थिति पहले से बनी हुई थी। तब प्रधानमंत्री ने देश से त्याग और कटौती की अपील क्यों नहीं की? भारत की विदेश नीति हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
जिन देशों को कभी भारत का सबसे भरोसेमंद मित्र बताया जाता था, वही देश आज भारत से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। सरकार अमेरिका के दबाव के आगे झुकती नजर आ रही है और उसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा है।
बड़े सपने दिखाए, आम आदमी की कमर टूट रही महंगाई से
विनोद पांडेय ने कहा कि मोदी सरकार ने विश्वगुरु, न्यू इंडिया और फाइव ट्रिलियन डालर इकोनामी जैसे बड़े-बड़े सपने दिखाए, लेकिन हकीकत यह है कि आज आम आदमी की कमर टूट चुकी है। महंगाई लगातार बढ़ रही है। बेरोजगारी रिकार्ड स्तर पर है।
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रुपये की कीमत कमजोर हो रही है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता को निचोड़ा जा रहा है। आर्थिक नीति पहले ही आम लोगों को तोड़ चुकी थी, अब सरकार खुलकर जनता से त्याग मांग रही है। लोगों को घूमने से परहेज करने का ज्ञान दिया जा रहा है।
लेकिन प्रधानमंत्री खुद यूरोप दौरों पर निकल जाते हैं। अगर वर्क फ्राम होम और आनलाइन मीटिंग इतनी जरूरी और प्रभावी हैं तो क्या सरकार खुद उसका पालन नहीं कर सकती? झारखंड मुक्ति मार्च मानता है कि देश को भाषण नहीं, जवाब चाहिए। जनता टैक्स भी दे, महंगाई भी सहे, बेरोजगारी भी झेले और अंत में उपदेश भी सुने। यह लोकतंत्र नहीं, जनता के साथ अन्याय है।
आर्थिक बोझ बढ़ाने के बाद जरूरतों को त्यागने का उपदेश दे रहा केंद्र: कांग्रेस
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार लगातार देश की जनता पर आर्थिक बोझ डालने के बाद अब रोजमर्रा की जरूरतों पर त्याग का उपदेश दे रही है।
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता चरम पर है, तब जनता को यह कहना कि सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाने का तेल कम करो आदि बेहद असंवेदनशील और जनविरोधी सोच को दर्शाता है।
कांग्रेस ने सवाल किया कि आखिर देश की जनता कब तक हर आर्थिक विफलता की कीमत चुकाती रहेगी। क्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवार अपनी इच्छाओं, जरूरतों और जीवन स्तर को लगातार कम करते रहें, जबकि सरकार अपने प्रचार और बड़े-बड़े आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती रहे।
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