झारखंड में 'न्याय दो या फांसी दो' के नारे के साथ मंत्रालय में जबरन प्रवेश कर गए नौकरी से हटाए गए सीजीएल कर्मी
रांची में प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के बाहर जेएसएससी सीजीएल के सफल अभ्यर्थी परीक्षा रद करने के फैसले के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए परिसर में घुस गए।
HighLights
सफल अभ्यर्थी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद करने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रोजेक्ट भवन सचिवालय में घुसकर पुलिस से धक्का-मुक्की की।
"न्याय दो या फांसी दो" जैसे नारों से सचिवालय परिसर में तनाव बढ़ा।
राज्य ब्यूरो, रांची। प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी बुधवार को अचानक उग्र हो गए और उन्होंने पुलिसबल को धक्का देते हुए अंदर प्रवेश करने में सफलता पाई। दोपहर एक बजे के बाद शुरू हुआ बल प्रदर्शन दो बजे तक अभ्यर्थियों के पक्ष में मजबूत होता गया।
इस क्रम में सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर लगे बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और सुरक्षा घेरा लांघकर परिसर के भीतर प्रवेश कर गए। इसी क्रम में पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई।
पुलिस अभ्यर्थियों को रोकने में पूरी तरह से विफल हो गई। इसके पूर्व प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर सफल अभ्यर्थी पूरी रात डटे रहे और सुबह होते ही गेट पर पहुंच गए। पुलिस इनको रोकने में विफल रही।
जमकर नारेबाजी हुई, “न्याय दो या फांसी दो” के नारे गूंजे
प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार को पूरी तरह से अवरुद्ध करते हुए अभ्यर्थियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी सबसे अधिक “न्याय दो या फांसी दो” के नारे लगा रहे थे। इसके अलावा “आवाज दो, हम एक हैं”, “तानाशाही नहीं चलेगी” आदि नारे लगते रहे। इसी क्रम में अभ्यर्थियों ने सचिवालय में प्रवेश करने का प्रयास किया जिसे पुलिस ने रोक दिया।
दोनों ओर से शक्ति प्रदर्शन के क्रम में अभ्यर्थियों को जीत मिली और वे बेरिकेटिंग और पुलिस की घेराबंदी को तोड़कर प्रवेश कर गए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच प्रदर्शनकारी युवा सरकारी विरोधी नारे लगाते रहे। विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने मांग की है कि सीजीएल परीक्षा को रद करने के आदेश को वापस लिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी भावुक होकर जमीन पर लेट गए और रोते हुए न्याय की गुहार लगाने लगे, जिससे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सचिवालय कर्मियों की सहानुभूति इन कर्मियों के प्रति स्पष्ट रूप से दिखी।

(प्रोजेक्ट भवन से निकल कर शाम को हटिया हटिया चौक पहुंचा सीजीएल रद्द मामले को लेकर आक्रोश मार्च।)
सिम्फर की नौकरी छोड़ आकाश ने सीजीएल में पाई थी सफलता
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी आकाश सिरका को इस बात का गम सता रहा था कि उन्होंने केंद्रीय उपक्रम सिम्फर की नौकरी छोड़कर सीजीएल में सफलता पाई और फिर यह नौकरी भी चले जाने का गम उन्हें सता रहा है।
इसी प्रकार एक अन्य उम्मीदवार मनीषा रोते-रोते बेहोश हो गई। उनका कहना था कि उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़कर यह परीक्षा पास की थी और अब उन पर भी गड़बड़ी का कलंक लग गया है। साथी कर्मी उनको सांत्वना देते दिखे।

अभ्यर्थियों के सामने गिड़गिड़ाते दिखे पुलिस अधिकारी
मौके की नजाकत को देखते हुए पहले से ही भारी संख्या में तैनात पुलिस के अधिकारी जब सफल अभ्यर्थियों को रोकने में असफल हुए तो उन्होंने उग्र भीड़ को प्यार से समझाने की कोशिश की। इस क्रम में अभ्यर्थियों की भीड़ के सामने पुलिस के अधिकारी गिड़गिड़ाते दिखे।
पुलिस अधिकारी हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि क्षेत्र में निषेधाज्ञा के तहत धारा 144 / 163 बीएनएस लागू कर दिया गया है। “अभ्यर्थी पढ़े-लिखे युवा हैं, उन्हें यह समझना होगा कि इस तरह के प्रतिबंधित और अति-संवेदनशील सरकारी परिसर में विरोध प्रदर्शन करने से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि उनकी बातों को अनसुनी कर अभ्यर्थी आगे बढ़ते रहे।
