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    झारखंड में JPSC पर काईवाई के बाद अब घेरे में JSSC, क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा को लेकर विवाद

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 10:39 AM (IST)

    अभ्यर्थियों को परीक्षा के दिन प्रवेश पत्र मिलने और दूर केंद्र होने से जेएसएससी क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा विवादों में घिर गई है। कम उपस्थित ...और पढ़ें

    जेएसएससी क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा पर विवाद गहराया, पारदर्शिता पर उठे सवाल।

    जेएसएससी क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा पर विवाद गहराया, पारदर्शिता पर उठे सवाल।

    HighLights

    1. परीक्षा के दिन प्रवेश पत्र मिलने से अभ्यर्थी वंचित।

    2. दूर परीक्षा केंद्र और कम उपस्थिति पर उठे सवाल।

    3. संताली पेपर में सिलेबस से बाहर के प्रश्न मिले।

    राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी की परीक्षाओं में विवाद के बाद अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति परीक्षा को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाए हैं कि उन्हें परीक्षा के दिन ई-मेल से प्रवेश पत्र मिला, जिससे वे परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित हो गए।

    कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र काफी दूर होने के कारण भी परीक्षा से वंचित होने की बात कही है। 19 जुलाई को हुई इस परीक्षा में महज 26.77 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति हुई थी। अभ्यर्थियों के आरोप हैं कि परीक्षा के दिन प्रवेश पत्र तथा केंद्र की जानकारी मिलने के कारण परीक्षा में सम्मिलित होना मुश्किल था, क्योंकि केंद्र की दूरी अधिक थी।

    इसे लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। इधर, इस परीक्षा में संताली भाषा (पत्र-2) में सौ में 40 प्रश्न सिलेबस से बाहर होने की शिकायत भी अभ्यर्थियों ने की है।

    साथ ही कहा गया कि प्रश्नपत्र में चार प्रश्न त्रुटिपूर्ण भी थे। प्रश्नपत्र में संताली साहित्य, संस्कृति, लोक गाथाओं और प्रमुख साहित्यकारों से जुड़े कई प्रश्न तथ्यात्मक रूप से गलत थे।

    बताते चलें कि इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कुल 3,22,867 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए थे। हालांकि इस परीक्षा में 86,444 अभ्यर्थी ही सम्मिलित हुए। यह परीक्षा तीन पालियों में आयोजित हुई। परीक्षा के लिए राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में 813 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

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    आयोग के अनुसार, वेबसाइट पर समय पर दी गई थी जानकारी

    अभ्यर्थियों के आरोपों पर जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि परीक्षा से संबंधित सभी सूचनाएं समय से आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई थीं। उनके अनुसार, 11 से 14 जुलाई के बीच सभी अभ्यर्थियों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी गई थी।

    आयोग का कहना है कि 16 जुलाई को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का लिंक भी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया था। अभ्यर्थी वेबसाइट से आसानी से सिटी इंटिमेशन स्लिप और एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते थे।

    केस-1
    पश्चिमी सिंहभूम जिले के रामड़ा गांव निवासी राजेश लोहार ने दावा किया कि उन्हें एडमिट कार्ड की सूचना परीक्षा वाले दिन 19 जुलाई को दोपहर 2:59 बजे ई-मेल के माध्यम से मिली, जबकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश का समय दोपहर तीन बजे तक ही था। उस समय वह जमशेदपुर में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे और उनका परीक्षा केंद्र करीब 240 किलोमीटर दूर लातेहार में बनाया गया था। इतनी कम सूचना और लंबी दूरी के कारण परीक्षा केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं था।


    केस-2
    पलामू जिले के डालटनगंज निवासी मुकेश प्रजापति ने बताया कि उनका परीक्षा केंद्र लगभग 600 किलोमीटर दूर गोड्डा में आवंटित किया गया था। उन्होंने 16 जुलाई को आयोग की वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया था, लेकिन कम समय, लगातार बारिश और परिवहन की असुविधा के कारण वहां पहुंचना संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा केंद्र नजदीक होता तो वे निश्चित रूप से
    परीक्षा देते।

    संथाली भाषा में सौ में 40 प्रश्न सिलेबस से बाहर होने की शिकायत

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की क्षेत्रीय कार्यकर्ता नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा में संथाली भाषा (पत्र-2) में सौ में 40 प्रश्न सिलेबस से बाहर होने की शिकायत अभ्यर्थियों ने की है। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने बुधवार को आयोग के परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि प्रश्नपत्र में चार प्रश्न त्रुटिपूर्ण भी थे।

    परीक्षार्थियों ने परीक्षा रद कर दोबारा आयोजित करने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने बताया कि इस परीक्षा में संथाली भाषा का प्रश्नपत्र अन्य परीक्षाओं से कहीं अधिक कठिन था। वहीं, प्रश्नपत्र में संथाली साहित्य, संस्कृति, लोक गाथाओं और प्रमुख साहित्यकारों से जुड़े कई प्रश्न तथ्यात्मक रूप से गलत थे।

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