मरने से पहले माओवादी प्रशांत बोस का अंतिम पत्र, मिसिर बेसरा को सशस्त्र संघर्ष पर पुनर्विचार की सलाह
रांची जेल में बंद माओवादी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का एक पत्र वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने मरने से पहले पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को सशस्त् ...और पढ़ें

मरने से पहले माओवादी प्रशांत बोस उर्फ किशन दा ने लिखा था पत्र। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)
HighLights
किशन दा ने मरने से पहले मिसिर बेसरा को पत्र लिखा।
पत्र में सशस्त्र संघर्ष पर पुनर्विचार की सलाह दी गई।
अधिकारियों ने इसे आत्मसमर्पण का अप्रत्यक्ष सुझाव माना।
राज्य ब्यूरो, रांची। रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद रहे एक करोड़ के इनामी माओवादियों का थिंक टैंक पोलित ब्यूरो सदस्य 80 वर्षीय प्रशांत बोस उर्फ किशन दा उर्फ मनीष उर्फ निर्भय मुखर्जी उर्फ काजल का एक पत्र इंटरनेट मीडिया पर वायरल है।
जेल में बीमार होने के बाद किशन दा को तीन अप्रैल को रिम्स भेजा गया था, जहां इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई थी। वायरल पत्र 20 मार्च का है।
मरने से पहले किशन दा ने यह आखिरी पत्र लिखा था। उसने कामरेड सागर को संबोधित करते हुए पत्राचार किया था। माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को ही कामरेड सागर कहा जाता है।
जो वर्तमान में सारंडा में माओवादी विरोधी अभियान के दौरान पिछले कई महीनों से सुरक्षा बलों से घिरा हुआ है। वायरल पत्र का मजमून यही है कि किशन दा ने मिसिर बेसरा को बताया था कि वर्तमान में परिस्थितियां प्रतिकूल हैं।
ऐसी स्थिति में सशस्त्र संघर्ष पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। माओवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाना जोखिम भरा है।
अधिकारियों ने पत्र का अर्थ निकाला है कि किशन दा ने अप्रत्यक्ष रूप से मिसिर बेसरा व उनकी टीम को सुरक्षा बलों के सामने घुटने टेकने (आत्मसमर्पण) का सुझाव दिया है।
यह भी कहा है कि जल्द निर्णय लें, ऐसा न हो कि कहीं देर हो जाए। वायरल पत्र की सत्यता प्रमाणित नहीं है। जेल अधीक्षक के सत्यापन के बिना जेल से कोई पत्र बाहर नहीं आता। यह वायरल पत्र अवैध तरीके से बाहर आया है जो जांच का विषय है।

क्या है किशन दा के आखिरी पत्र में
किशन दा ने मरने से पहले अपने आखिरी पत्र में मिसिर बेसरा से कहा कि वर्तमान में घरेलू परिस्थितियां बेहद जटिल, बेहद गंभीर हैं।
ऐसी स्थिति में सशस्त्र क्रांति को लगातार आगे बढ़ाना असंभव है। माओवादियों के सेंट्रल रीजनल ब्यूरो (सीआरबी), ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो (ईआरबी) आदि स्थानों पर माओवादियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
अपने पत्र में उसने सुझाव दिया कि मिसिर बेसरा इस बात पर विचार करे कि सशस्त्र संघर्ष सही मायने में क्या आगे बढ़ाकर ले जाने लायक है या नहीं।
यह भी कहा है कि अनावश्यक देरी होने पर नुकसान की संभावना बहुत अधिक होगी। किशन दा ने आगे यह भी लिखा कि माओवादी संगठन जो भी निर्णय लेगा, उससे उसे अवगत कराए।बेहद सावधान व सतर्क रहे और गतिविधियां सोंच-समझकर चलाएं। जल्द प्रतिक्रिया दें और सभी विषय गुप्त रखें।