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    रांची RSS दफ्तर पर पेट्रोल बम हमला: NIA ने दर्ज की 2026 की पहली FIR, अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन की जांच शुरू

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 12:18 PM (IST)

    NIA ने रांची में RSS कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच अपने हाथ में ले ली है, जिसमें विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए की धाराएं लगाई गई हैं। यह मामला ...और पढ़ें

    रांची आरएसएस कार्यालय पेट्रोल बम हमला अब एनआईए के हवाले।

    रांची आरएसएस कार्यालय पेट्रोल बम हमला अब एनआईए के हवाले।

    HighLights

    1. एनआईए ने रांची आरएसएस कार्यालय हमले की जांच संभाली।

    2. मामले में विस्फोटक अधिनियम और यूएपीए धाराएं लगीं।

    3. एनआईए अंतरराष्ट्रीय आतंकी संलिप्तता की जांच करेगी।

    राज्य ब्यूरो, रांची। रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रदेश कार्यालय में 16 जून की रात हुए पेट्रोल बम से हमला मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। एनआईए ने चुटिया थाने में 17 जून को कांड संख्या 85/26 के तहत दर्ज प्राथमिकी को टेकओवर किया है।

    उक्त प्राथमिकी को टेकओवर करते हुए एनआइए के रांची थाने में आरसी-01/2026/एनआईए/आरएनसी के तहत केस री-रजिस्टर्ड किया है। यह एनआइए रांची की इस वर्ष की पहली प्राथमिकी है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अलावा विस्फोटक अधिनियम व अनलाफूल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट लगाया गया है।

    एनआईए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के आलोक में अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध यह केस दर्ज किया है। कांड के शिकायतकर्ता केंद्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार के अवर सचिव विमल कुमार शुक्ला हैं।

    अब एनआईए इस केस में सामने आ रहे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संलिप्तता, घटना के पीछे के मकसद व इसमें शामिल आरोपितों के विरुद्ध जानकारी जुटाएगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

    गौरतलब है कि इस घटना के बाद रांची पुलिस व झारखंड एटीएस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गिरफ्तार आरोपितों का चार राज्यों से कनेक्शन जुड़ा था, जिनमें झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली व मुंबई शामिलथे।

    पुलिस को आरोपितों के विदेश से आने-जाने, संदिग्धों से मुलाकात, संबंधित राज्यों के अन्य सहयोगियों से मुलाकात की भी जानकारी मिली थी। इसके बाद ही उनका ट्रेवेल हिस्ट्री खंगाला जा रहा है।

    एनआईए से पूर्व झारखंड एटीएस ने लिया था जांच का प्रभार

    एनआईए के पूर्व झारखंड पुलिस की आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने चुटिया थाने में दर्ज उक्त प्राथमिकी की जांच का प्रभार अपने अधीन लिया था। एटीएस ने अपनी जांच के क्रम में घटनास्थल का भी जायजा लिया था और वहां मौजूद लोगों, आसपास के लोगों से भी पूछताछ की थी।

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    अपराधियों के आने-जाने वाले मार्ग की भी जानकारी ली थी। एटीएस ने पेट्रोल बम से हमले से जुड़े साक्ष्य को संकलित की थी और आरएसएस कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला था।

    16 जून की रात हुआ था आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला

    रांची के चुटिया थाने में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ रांची के प्रांत कार्यालय प्रमुख नरसिंह कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि आरएसएस के झारखंड प्रांत के कार्य का संचालन निवारणपुर स्थित श्री निकेतन से होता है।

    16 जून की रात 12 बजकर 36 मिनट पर उक्त कार्यालय पर पेट्रोल बम से अज्ञात व्यक्तियों ने हमला कर दिया। सीसीटीवी में साफ दिखा था कि दो अज्ञात व्यक्तियों ने पेट्रोल बम फेंका था। उनके चेहरे ढके हुए थे।

    उस वक्त संघ कार्यालय के भीतर करीब 20 लोग रह रहे थे। उनकी जान को खतरा हो सकता था। संघ की सभी संपत्ति जलकर राख हो सकती थी। अपराधियों का मंसूबा संघ कार्यालय को उड़ाने की थी।

    जांच के क्रम में कोडरमा के गझंडी रेलवे स्टेशन से पकड़े गए थे दो आरोपित

    जांच के क्रम में रांची पुलिस ने कोडरमा के पास गझंडी रेलवे स्टेशन के पास से सैफ अंसारी व अमन अंसारी उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया था। सैफ अंसारी लोहरदगा के बगरू मोड़, ईमली मोड़ के पास बड़ा तलाब का निवासी है, जबकि अमन अंसारी उर्फ गोलू भी लोहरदगा के न्यू आजाद बस्ती का रहने वाला है।

    दोनों ने पूछताछ में अपने तीसरे साथी सायम सुजान का नाम लिया, जिसकी गिरफ्तारी रांची से हुई थी। सायम सुजान भी लोहरदगा के पत्थलकुदवा स्थित फुलबगान का निवासी है। गिरफ्तार आरोपित सैफ अंसारी 18 जून को कोतवाली थाना परिसर से भाग गया था, जिससे चान्हो थाना क्षेत्र में पुलिस से मुठभेड़ हुई थी।

    मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद सैफ फिर से पकड़ा गया था। इस मामले में उसके विरुद्ध रांची के कोतवाली में हाजत से भागने व चान्हो में पुलिस का हथियार छिनने व मुठभेड़ मामले में भी अलग-अलग दो प्राथमिकियां दर्ज हैं।