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    घरवाले बना रहे थे शादी का दबाव, प्रीति ने चुनी पढ़ाई और बन गई रांची यूनिवर्सिटी की गोल्ड मेडलिस्ट

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    आर्थिक तंगी और शादी के दबाव के बावजूद प्रीति कुमारी ने रांची विश्वविद्यालय में पीजी नागपुरी की टॉपर बनकर गोल्ड मेडल हासिल किया। ...और पढ़ें

    प्रीति कुमारी बनीं रांची विश्वविद्यालय की नागपुरी टॉपर

    प्रीति कुमारी बनीं रांची विश्वविद्यालय की नागपुरी टॉपर

    HighLights

    1. आर्थिक तंगी के बावजूद प्रीति बनीं रांची विवि नागपुरी टॉपर।

    2. रोजाना छह किमी साइकिल चलाकर पूरी की अपनी पढ़ाई।

    3. लेक्चरर बन नागपुरी भाषा के विकास का है उनका सपना।

    दिवाकर सिंह, रांची। मुश्किलों में भी अगर हौसला है तो मंजिल तक पहुंचना आसान हो जाता है। कुछ यही हौसला दिखाया है रांची विश्वविद्यालय के पीजी नागपुरी की टापर और गोल्ड मेडलिस्ट प्रीति कुमारी का।

    घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति पर शादी के लिए घरवाले दबाव बना रहे थे, लेकिन प्रीति ने कहा कि मुझे आगे की पढ़ाई करनी है अभी शादी नहीं करनी।

    इस जिद के आगे परिवार के लोग झुक गए और फिर प्रीति ने अपने सपनों को पूरा किया। विवि के पीजी टीआरएल संकाय में प्रतिदिन छह किलोमीटर साइकिल चलाकर पढ़ाई पूरी की। इतनी लगन और मेहनत से पढ़ाई की, और 73.63 प्रतिशत अंक लाकर नागपुरी विषय में पूरे विवि में सबको पीछे छोड़ दिया।

    छह किलोमीटर साइकिल चला पूरी की पढ़ाई

    प्रीति कुमारी ने पीजी नागपुरी के सत्र 2023-25 में नामांकन लिया और पढ़ाई शुरू की। अपने मामा के यहां बरियातू में रहती थी और वहां से मोरहाबादी तक जाने के लिए आटो के पैसे नहीं थे। इसके बाद प्रीति ने साइकिल से विवि के नागपुरी विभाग जाने का फैसला लिया।

    दो साल तक लगातार छह किलोमीटर तक साइकिल चलाकर प्रीति विभाग जाती थी और लगन के साथ पढ़ाई करती थी। नागपुरी के शिक्षक डॉ. बिरेंद्र महतो ने बताया कि प्रीति प्रतिदिन विभाग आती थी और केवल पढ़ाई में ही इसका ध्यान रहता था। इस छात्रा की लगन और मेहनत ने इसे ये मुकाम दिलाया।

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    प्रीति कुमारी सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड के किनकेल गांव की रहने वाली है। वो बताती है कि हमारे गांव में जाने के लिए बेहतर सड़क नहीं है और पानी की भी व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण परेशानी होती है। मेरे पिता सुदाम प्रसाद छोटा-मोटा काम करते हैं जिससे हमारे पूरे परिवार का खर्च चलता है, इसलिए मैंने 12वीं से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई रांची विमेंस कॉलेज से की और इसके लिए मामा के घर बरियातू चली आई।

    प्रीति ने बताया कि वर्तमान में अपने ही गांव के एक स्कूल में पढ़ा रही हूं। मेरा सपना है कि नेट क्वालिफाई करूं और लेक्चरर बनूं। इसके साथ ही मैं नागपुरी भाषा के विकास के लिए भी काम करना चाहती हूं। मेरा यही कहना है कि बेटियों को कभी भी पढ़ने से नहीं रोकना चाहिए।