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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Rahul Gandhi की व्यक्तिगत पेशी से छूट वाली याचिका पर 7 दिसंबर को होगी सुनवाई

    Updated: Thu, 28 Nov 2024 08:08 PM (GMT+05:30)

    रांची के एमपी/ एमएलए विशेष अदालत में राहुल गांधी से जुड़े मानहानि के मामले में सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने 7 दिसंबर को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। र ...और पढ़ें

    व्यक्तिगत पेशी से छूट वाली याचिका पर 7 दिसंबर को सुनवाई
    व्यक्तिगत पेशी से छूट वाली याचिका पर 7 दिसंबर को सुनवाई

    HighLights

    1. राहुल गांधी की व्यक्तिगत पेशी से छूट वाली याचिका पर 7 दिसंबर को सुनवाई
    2. देवघर एयरपोर्ट मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी को नोटिस

    जागरण संवाददाता, रांची। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मुकदमे में कोर्ट में पेशी से व्यक्तिगत छूट वाली याचिका पर बुधवार को रांची के एमपी/ एमएलए विशेष अदालत में आंशिक सुनवाई हुई। आगे की सुनवाई के लिए 7 दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने देवघर एयरपोर्ट मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ FIR को रद्द करने वाली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देनी वाली झारखंड सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है।

    राहुल गांधी की याचिका पर 7 दिसंबर को सुनवाई

    मानहानि मुकदमे में शिकायतकर्ता की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। वहीं राहुल गांधी मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट चाहते हैं। इसको लेकर उनके अधिवक्ता ने बीते 14 अगस्त को सीआरपीसी की धारा 205 के तहत याचिका दाखिल की है। मालूम हो कि राहुल गांधी को इस मामले में कोर्ट में पेश होना है। पेशी को लेकर समन जारी है। दरअसल, 2018 में कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसको लेकर रांची में नवीन झा की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

    सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी को नोटिस

    सुप्रीम कोर्ट ने ने देवघर एयरपोर्ट मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी को नोटिस जारी किया है। दोनों सांसदों पर आरोप है कि साल 2022 में इन्होंने देवघर एयरपोर्ट पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से कहा कि वह अपने इस तर्क के समर्थन में निर्णय प्रस्तुत करें कि पूर्व अनुमति के बिना भी जांच जारी रह सकती है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस आधार पर प्राथमिकी रद्द कर दी थी कि विमान (संशोधन) अधिनियम, 2020 के अनुसार, कोई पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि जांच के चरण में मंजूरी का सवाल नहीं उठेगा, बल्कि शिकायत दर्ज करने के चरण में ही उठेगा, जब अदालत को शिकायत का संज्ञान लेना होगा। इसलिए प्रतिबंध जांच के चरण में नहीं, बल्कि आरोप पत्र दाखिल करने और जांच पूरी होने के बाद लागू होगा।

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    इसके बाद कोर्ट ने इस तर्क का समर्थन करने के लिए निर्णय मांगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में, ऐसे निर्णय हैं जो यह मानते हैं कि संज्ञान लेने से पहले जांच की जा सकती है और उस सामग्री का उपयोग शिकायत दर्ज करने के लिए किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 18 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

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