रांची एयरपोर्ट पर मौसम बन रहा उड़ानों का ब्रेकर, रोजाना डायवर्ट हो रहे विमान; सुरक्षित लैंडिंग में कई बाधाएं
रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण लगातार उड़ानें डायवर्ट हो रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। कैट- ...और पढ़ें

रांची एयरपोर्ट पर मौसम बिगाड़ रहा उड़ानों का खेल, कैट-टू सिस्टम की कमी से बढ़ रही परेशानी।
HighLights
खराब मौसम से रांची एयरपोर्ट पर उड़ानें लगातार डायवर्ट।
कम विजिबिलिटी के कारण यात्रियों को हो रही भारी असुविधा।
कैट-टू लाइटिंग सिस्टम की कमी मुख्य समस्या बनी।
जागरण संवाददाता, रांची। मौसम खराब होते ही रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर विमान परिचालन प्रभावित होने लगा है। पिछले कुछ दिनों से कम विजिबिलिटी, बारिश और बादलों की वजह से लगातार उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ रहा है।
शनिवार को बेंगलुरु से रांची आने वाली विमान सेवा को मौसम की खराब स्थिति के कारण कोलकाता डायवर्ट करना पड़ा। कम दृश्यता की वजह से एक सप्लाह के अंदर 11 विमान की लैंडिंग रांची में समय पर नहीं हुई।
ऐसे में विमान यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं एयरलाइंस को भी परिचालन में परेशानी हो रही है। अगर रांची एयरपोर्ट पर कैट-टू लाइटिंग सिस्टम की सुविधा होती, तो खराब मौसम में भी कई विमान सुरक्षित तरीके से उतर सकते थे।
हाल के दिनों में मौसम की खराब स्थिति के कारण रांची आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। मई में खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण 14 उड़ानों को कोलकाता डायवर्ट किया गया था।
इनमें इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें शामिल थीं। बाद में मौसम सुधरने पर विमानों ने रांची में लैंडिंग की। रांची एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग मुख्य रूप से रनवे की दृश्यता और मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है।
जब विजिबिलिटी एक निश्चित स्तर से नीचे चली जाती है, तो पायलट के लिए रनवे को पहचानना और सुरक्षित लैंडिंग करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में विमान को होल्ड कराया जाता है या फिर वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भेज दिया जाता है।
अचानक बदलाता है मौसम
रांची में मानसून के दौरान अचानक मौसम बदलता है। तेज बारिश, बादल और कम दृश्यता के कारण पायलटों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे में अत्याधुनिक लैंडिंग सिस्टम होने से डायवर्जन की संख्या कम हो सकती है और यात्रियों को होने वाली परेशानी भी घट सकती है।
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कनेक्टिंग प्लाइट पकड़ने में परेशानी
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट झारखंड का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। यहां से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री देश के प्रमुख शहरों के लिए यात्रा करते हैं। लेकिन मौसम खराब होने पर एक विमान के डायवर्ट होने का असर आगे की कई उड़ानों पर पड़ता है। यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने से लेकर एयरलाइंस के शेड्यूल तक प्रभावित होते हैं।
परेशानी: रनवे छोटा, विजिबिलिटी कम
रांची एयरपोर्ट पर रोजाना करीब 48 विमानों का परिचालन होता है। किसी किसी दिन विमानों की संख्या 54 तक पहुंच जाती है। ऐसे में कम विजिबिलिटी में विमानों का परिचालन असुरक्षित बताया जा रहा है। दूसरी तरफ रांची एयरपोर्ट के आसपास अतिक्रमण और ऊंची इमारतों की वजह से 900 मीटर रनवे का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में 2700 मीटर रलवे का उपयोग होता है। रनवे की लंबाई बढ़ने से एयरपोर्ट पर बड़े विमानों की लैंडिंग आसान और सरक्षित होती। रांची में बोइंग जैसे बड़े विमान भी लैंड करते। कम विजिबिलिटी में विमानों का परिचालन सुरक्षित और सामान्य हो, इसके लिए अत्याधुनिक इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम, यानि कैट-टू लाइट सिस्टम की जरूरत है।
सुरक्षित उड़ान के लिए कैट-टू लाइट जरूरी
रांची में खराब मौसम की वजह से विजिबिलीटी 1200 मीटर से कम हो जाती है। इसकी वजह से विमानों के लैडिंग में परेशानी होती है। एयरपोर्ट के रनवे पर कैट-टू एप्रोच लाइटिंग सिस्टम लग जाता, तो कोहरे व धुंध में भी विमान 850 मीटर विजिबिलिटी पर लैंड करता और उड़ान भरता। खराब मौसम की वजह विमान डायवर्ट नहीं होते।
सिस्टम के लिए पर्याप्त जमीन नहीं
एयरपोर्ट रनवे के जिस साइड से कैट-टू लाइटिंग सिस्टम लगना है, उस तरफ जमीन पर अतिक्रमण है। जिला प्रशासन अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे रहा है, मगर अतिक्रमण हटाने को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से 18 करोड़ का कैट-टू एप्रोच लाइटिंग सिस्टम नहीं लग सका। जमीन पर अतिक्रमण की वजह से रांची एयरपोर्ट पर रनवे विस्तारिकरण और कैट-टू एप्रोच लाइटिंग सिस्टम लगाने सहित कई कार्य प्रभावित हो गए है। जिसका असर आए दिन विमानों के परिचालन पर देखने को मिल रहा है।
रांची एयरपोर्ट पर अचानक मौसम खराब हो जाती है। विजिविलिटी कम हो जाती है। जिस वजह से ज्यादातर विमान लैंड नहीं करते। अगर रांची एयरपोर्ट पर कैट-टू एप्रोच लाइटिंग सिस्टम होता, तो विमानों के परिचालन पर खराब मौसम या कम विलिविलिटी का असर कम देखने को मिलता। वर्तमान में कैट-टू लाइटिंग सिस्टम लगना विमानों के सुरक्षित परिचालन के लिए बेहद आवश्यक है।
-एवी कृष्णा, पूर्व डायरेक्टर, रांची एयरपोर्ट