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    मुआवजा दिया, जमीन नहीं: 14 साल से अधर में रांची एयरपोर्ट का विस्तार, रनवे से इंटरनेशनल स्टेटस तक हर योजना फंसी

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 02:38 PM (IST)

    रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर 14 साल से जमीन विवाद के कारण विस्तार रुका हुआ है। 2012-13 में 303 एकड़ जमीन का मुआवजा देने के बावजूद हस्तांतरण अधूरा ...और पढ़ें

    रांची एयरपोर्ट का 14 साल से अटका विस्तार जमीन विवाद बना रोड़ा

    रांची एयरपोर्ट का 14 साल से अटका विस्तार जमीन विवाद बना रोड़ा

    HighLights

    1. 14 साल से 303 एकड़ जमीन का हस्तांतरण अधूरा, विकास ठप।

    2. एयरपोर्ट का विस्तार, आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय दर्जा रुका हुआ।

    3. अतिक्रमण बढ़ा, उड़ानें देरी से, कई अहम परियोजनाएं अटकीं।

    जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट इन दिनों एक अजीब विडंबना का शिकार है, जिस जमीन पर उसे उड़ान भरनी थी, वही अब तक उसके पास नहीं है। 14 साल पहले अधिग्रहित 303 एकड़ जमीन का मुआवजा बांट दिया गया, लेकिन जमीन का हस्तांतरण आज तक अधूरा है।

    नतीजा, एयरपोर्ट का विस्तार, आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय बनने का सपना ‘होल्ड’ पर है। जमीन विवाद सुलझाने के लिए तय दो अहम बैठकें अधिकारियों की गैरमौजूदगी में टल गईं। इससे साफ है कि मामला अब तकनीकी नहीं, प्रशासनिक प्राथमिकता का बन चुका है।

    एयरपोर्ट की जमीन को लेकर पूर्व में करीब 35 बैठकों के बावजूद नागर विमानन विभाग, जिला प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन के बीच सहमति नहीं बन सकी है। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।

    रांची एयरपोर्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब टेक्नोलॉजी या फंड नहीं, बल्कि जमीन पर कब्जा और कागजी प्रक्रिया है। जब तक यह नहीं सुलझेगा, तब तक ‘उड़ान’ सिर्फ योजना में ही रहेगी।

    14 साल का ‘वेटिंग मोड’

    • 2012-13 : 303 एकड़ जमीन अधिग्रहित
    • मुआवजा : रैयतों को भुगतान पूरा
    • प्रस्ताव : 30 साल की लीज पर एयरपोर्ट को जमीन
    • 2026 : जमीन अब भी एयरपोर्ट के कब्जे से बाहर

    अतिक्रमण का ‘साइलेंट एक्सपेंशन’

    जमीन खाली नहीं हुई, लेकिन उस पर निर्माण जरूर हो गया। हर दिन बढ़ता अतिक्रमण भविष्य के किसी भी विकास को और महंगा व जटिल बना रहा है।

    खबरें और भी

    • 130 से ज्यादा मकान
    • मैरेज हॉल, धार्मिक ढांचे
    • जमीन की खरीद-बिक्री जारी

    रनवे छोटा, सपने बड़े, पर रफ्तार धीमी

    अभी लगभग 2700 मीटर रनवे उपयोग में है, जबकि 900 मीटर विस्तार जरूरी है। लेकिन जमीन के बिना यह सब ‘पेपर प्लान’ ही है। जिसका असर बड़े विमानों की लैंडिंग, लंबी दूरी की उड़ानों पर रोक, अंतरराष्ट्रीय आपरेशन आदि पर देखने को मिल रहा है।

    हर फ्लाइट ‘देरी का बोझ’ ढो रही

    पर्याप्त जमीन नहीं होने की वजह से पीटीटी का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। पैरेलल टैक्सी ट्रैक (पीटीटी) के अभाव में विमान रनवे से ही टैक्सी करते हैं। इस वजह से प्रति उड़ान में 5–10 मिनट की देरी होती है। पीक टाइम में आपरेशन प्रभावित होता है। यानी समस्या दिखती कम है, असर हर उड़ान में है।

    जमीन नहीं तो विकास नहीं

    अधूरी जमीन ने कई अहम परियोजनाओं को रोक रखा है।

    • आइसोलेशन वे
    • कैट-टू लाइट सिस्टम
    • पैरेलल टैक्सी ट्रैक
    • टर्मिनल विस्तार

    इंटरनेशनल टैग—बस एक कदम दूर

    तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों (आईएसओ) के स्तर पर एयरपोर्ट तैयार है, लेकिन जमीन विवाद सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। यानी सिस्टम तैयार, स्पेस नहीं।

    बढ़ती यात्रियों की संख्या, सुविधाएं सीमित

    रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों और विमानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन लगभग 8000 यात्रियों की आवाजाही हो रही है। कई एयरलाइंस कंपनियों ने नई सेवाएं शुरू करने के लिए पत्राचार किया है।

    एयरपोर्ट को एनवायरमेंट क्लीयरेंस सिस्टम से संबंधित आईएसओ प्रमाण पत्र भी मिल चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

    योजना के अनुसार तीन की जगह आठ सिक्योरिटी चेक काउंटर, एक के बजाय दो डिपार्चर एरिया, 16 से बढ़ाकर 38 एयरलाइंस काउंटर और इंट्री-एग्जिट के लिए दो-दो गेट संचालित किए जाने हैं। 22 नए काउंटर बनाए जाने प्रस्तावित हैं।

    जमीन उपलब्ध कराने के लिए लगातार जिला प्रशासन से आग्रह किया जा रहा है। बैठकें तय होने के बावजूद अधिकारियों की अनुपस्थिति से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जमीन नहीं मिलने से कई विकास कार्य ठप हैं।
    -विनोद कुमार, डायरेक्टर, रांची एयरपोर्ट

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