Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    रांची में बढ़े डॉग बाइट के मामले, एंटी रैबीज टीके पर रोज 65000 खर्च 

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    राजधानी रांची में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है, जहां जनवरी से जून 2026 के बीच 52,669 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए हैं। ...और पढ़ें

    रांची में बढ़े डॉग बाइट के मामले। (जागरण)

    रांची में बढ़े डॉग बाइट के मामले। (जागरण)

    HighLights

    1. रांची में 6 माह में 52,669 डॉग बाइट के मामले।

    2. सदर अस्पताल में प्रतिदिन 65 हजार रुपये वैक्सीन पर खर्च।

    3. आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण पर जोर।

    जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति ऐसी है कि स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर सुबह-शाम टहलने निकलने वाले लोग तक दहशत में हैं।

    शहर में हर दिन औसतन करीब 300 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। इसका अंदाजा सदर अस्पताल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है, जहां जनवरी से जून 2026 के बीच डाग बाइट के 52,669 मामले दर्ज किए गए हैं।

    अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, छह माह के दौरान प्रतिदिन औसतन 290 मरीज कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए पहुंचे।

    जनवरी में प्रतिदिन औसतन 313, फरवरी में 327, मार्च में 297, अप्रैल में 282, मई में 265 और जून में 264 मरीज अस्पताल पहुंचे।

    हालांकि पिछले कुछ महीनों में मामलों में हल्की कमी आई है, लेकिन प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों का अस्पताल पहुंचना शहर में बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रहा है।

    सिविल सर्जन ने बताया कि सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन 250 से 300 डाग बाइट के मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि बरसात के मौसम में इनकी संख्या और बढ़ जाती है।

    अस्पताल की एंटी रेबीज क्लीनिक में प्रतिदिन 80 से 90 नए मरीज इलाज के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में पालतू और टीकाकृत कुत्तों द्वारा मामूली खरोंच लगने पर भी लोग अस्पताल पहुंच जाते हैं।

    ऐसे हर मामले में एंटी रेबीज वैक्सीन की आवश्यकता नहीं होती। लोगों को यह जानकारी होना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में तत्काल अस्पताल जाना चाहिए और कब सामान्य सावधानी पर्याप्त होती है।

    रोजाना 65 हजार रुपये तक खर्च

    सिविल सर्जन के अनुसार, एंटी रेबीज वैक्सीन और उपचार पर अस्पताल का प्रतिदिन करीब 65 हजार रुपये खर्च होता है, जो अस्पताल के सबसे अधिक खर्च वाले मदों में शामिल है।

    उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को रेबीज हो जाए तो इसका प्रभावी इलाज संभव नहीं है और यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।

    इसलिए किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने या गंभीर खरोंच लगने पर चिकित्सकीय सलाह लेकर समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए।

    इलाज के साथ रोकथाम भी जरूरी

    विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं होगा। आवारा कुत्तों की नसबंदी, नियमित टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और जनजागरूकता पर समान रूप से काम करना होगा।

    इन उपायों के बिना डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।

    छह माह में डाग बाइट के मामले

    मासिक मामले (जनवरी - जून)
    माह संख्या
    जनवरी 9,694
    फरवरी 9,162
    मार्च 9,212
    अप्रैल 8,478
    मई 8,211
    जून 7,912
    कुल (जनवरी-जून) 52,669

    यह भी पढ़ें- रांची में चला प्रशासन का बुलडोजर, मोरहाबादी से हरमू रोड तक 60 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त