मिलावट पर एक्शन: होली से पहले रांची में ताबड़तोड़ छापामारी, जांच के लिए भेजे गए पनीर और मिठाइयों के सैंपल
रांची में होली के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी पनीर, खोआ और मिठाइयों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। बूटी मोड़ सहित विभिन्न इलाकों से सैंपल ...और पढ़ें

होली में मिलावट के खिलाफ जंग। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, रांची। रंगों के त्योहार होली के मद्देनजर राजधानी में मिलावटी पनीर, खोआ और मिठाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान तेज कर दिया है।
सोमवार को शहर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की गई, जिसमें सबसे अधिक सैंपल बूटी मोड़ क्षेत्र से एकत्रित किए गए। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के साथ मिलावट का जोखिम भी बढ़ जाता है।
बूटी मोड़ और आसपास के थोक-खुदरा बाजार से पनीर, खोआ और विभिन्न मिठाइयों के सैंपल लिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उनके अनुसार विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन खुदरा बाजार में फैला नेटवर्क बड़ी चुनौती है, जहां छोटी दुकानों और अस्थायी विक्रेताओं के माध्यम से मिलावटी उत्पाद खपाए जाते हैं।
कैसे बनता है मिलावटी पनीर व मिठाई?
विशेषज्ञों के अनुसार मांग पूरी करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए कुछ असामाजिक तत्व कृत्रिम तरीके अपनाते हैं। पनीर बनाने में दूध की जगह स्किम्ड मिल्क पाउडर, स्टार्च, सिंथेटिक दूध या डिटर्जेंट मिश्रित घोल का इस्तेमाल किया जाता है।
कई मामलों में पनीर को अधिक सफेद और आकर्षक दिखाने के लिए रसायन मिलाए जाते हैं। इसी तरह खोआ में वनस्पति घी, आलू का पेस्ट, मैदा या स्टार्च मिलाया जाता है।
मिठाइयों में कृत्रिम रंग, सस्ते फ्लेवर और निम्न गुणवत्ता के तेल-घी का उपयोग किया जाता है। बासी मिठाइयों को दोबारा तलकर या चाशनी में डुबोकर ताजा बताकर बेचने के मामले भी सामने आते हैं।
मालूम हो कि पिछले सप्ताह भी हिनू से बिरसा चौक तक जांच अभियान में नौ दुकानदारों पर मिलावटी को लेकर कार्रवाई की गई थी।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बी कुमार के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। ऐसे पनीर और मिठाइयों के सेवन से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, एलर्जी और त्वचा पर रैशेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लंबे समय तक रसायनयुक्त खाद्य पदार्थ खाने से लीवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है। डॉ. कुमार ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जोखिम अधिक होता है। कृत्रिम रंग और रसायन अस्थमा व एलर्जी के मरीजों में गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।
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डॉक्टर कुमार की सलाह
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि पनीर व मिठाई कंपनियों के सीलबंद डब्बे या पैकेट में लें, जिसमें प्रमाणिकता का जिक्र हो। साथ ही मिठाई विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदें, अत्यधिक चमकीले रंग की मिठाइयों से बचें और पनीर को पानी में डालकर उसकी गुणवत्ता की साधारण जांच करें, यदि वह जल्दी टूटने लगे या रंग छोड़ दे तो सावधान हो जाएं।
आयोडिन से भी जांच की जा सकती है। त्योहार की खुशियों के बीच स्वास्थ्य से समझौता न हो, इसके लिए प्रशासन और आम नागरिकों दोनों की सतर्कता जरूरी है। होली पर रंगों के साथ स्वाद भी सुरक्षित रहे, यही विभाग का लक्ष्य है।