यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 31, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ranchi: नगर निकाय चुनाव के लिए जरूरी है पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, विधायक सुदिव्य कुमार को मिल सकती है अध्यक्षता
सत्तारूढ़ झामुमो के गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। आयोग का गठन राज्य में नगर निकाय चुनाव संप ...और पढ़ें

HighLights
- विधायक सुदिव्य कुमार बनाए जा सकते हैं पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष
- निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण की सीमा निर्धारित करने के लिए आवश्यक है आयोग का गठन
- राज्य मंत्रिपरिषद ने दी है आयोग के गठन की मंजूरी
- गठन नहीं होने से लंबे समय के लिए टल सकता है नगर निकाय चुनाव
प्रदीप सिंह, रांची: सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। आयोग का गठन राज्य में नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने के लिए आवश्यक है।
यह प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण राज्य में नगर निकायों का चुनाव लंबे समय के लिए टल सकता है। उल्लेखनीय है कि राज्य मंत्रिपरिषद ने भी पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है।
सामान्य तौर पर पिछड़ा वर्ग आयोग के पद के लिए न्यायिक सेवा की पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को बिठाने की परंपरा रही है, लेकिन राज्य सरकार इसपर सामाजिक व राजनीतिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति की नियुक्त करना चाहती है।
आयोग के अध्यक्ष का पद सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास रहेगा। गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार नीतिगत मसलों पर राज्य सरकार के पक्ष में हरदम मजबूती के साथ खड़े नजर आते हैं। उनकी छवि बेहतर है और वे तार्किक तरीके से विधानसभा के भीतर-बाहर भी अपनी बातें रखते हैं।
इस वर्ग में दो सदस्यों की होगी नियुक्ति
स्थानीयता के निर्धारण समेत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मसलों पर उन्होंने बार-बार भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है।
यही वजह है कि उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बताया जा रहा है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग में दो सदस्यों की नियुक्ति होगी।
इसमें एक झारखंड मुक्ति मोर्चा और एक कांग्रेस से होगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा से नंद किशोर मेहता और कांग्रेस से पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश इस दौड़ में आगे चल रहे हैं। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर मुहर लग सकती है।
आयोग करेगा ओबीसी का सर्वेक्षण
नगर निकाय चुनाव के लिए ओबीसी का आरक्षण निर्धारित करना आवश्यक है। आयोग का गठन हुआ तो ओबीसी का सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसमें लगभग छह माह का समय लग सकता है।
इसके बाद राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा के आधार पर ओबीसी आरक्षण की सीमा तय करते हुए चुनाव कराने पर विचार कर सकती है। अगर पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की प्रक्रिया में देरी हुई तो यह लंबे समय के लिए टल सकता है।
खबरें और भी
ऐसे में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के बाद ही नगर निकाय के चुनाव संपन्न हो सकते हैं। हालांकि इसमें जोखिम भी है। विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर ओबीसी समुदाय की सहानुभूति पाने की कोशिश कर सकता है।
आयोग कर चुका है 50 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की सिफारिश की है, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। पूर्व में पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य में ओबीसी आरक्षण 50 प्रतिशत तक करने की अनुशंसा की थी।