रांची में पशुपालन विभाग के खाते से फिर 17 लाख की अवैध निकासी कुबेर पोर्टल पर फर्जी आईडी से घोटाला
रांची के होटवार स्थित फ्रोजेन सीमेन बैंक में वेतन मद से 17.14 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपी मुनींद्र कुमार ने 'कुबेर पोर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
मुख्य आरोपी मुनींद्र कुमार ने कुबेर पोर्टल का दुरुपयोग किया।
फर्जी आईडी बनाकर वेतन मद में की गई धोखाधड़ी।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी खजाने से अवैध निकासी और वित्तीय हेराफेरी का एक और मामला प्रकाश में आया है। इस बार जालसाजी का यह खेल होटवार स्थित फ्रोजेन सीमेन बैंक (Frozen Semen Bank) में खेला गया।
जहां वेतन मद की राशि में बड़ी हेराफेरी कर कुल 17 लाख 14 हजार रुपये की अवैध निकासी की गई है। इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
खेलगांव थाने में प्राथमिकी दर्ज
इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को लेकर फ्रोजेन सीमेन बैंक के कृत्रिम प्रजनन पदाधिकारी डॉ. विवेक कुमार सिन्हा ने रांची के खेलगांव थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। इस मामले में संस्थान के तत्कालीन लिपिक सह लेखापाल और वर्तमान में निलंबित प्रधान लिपिक मुनींद्र कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास
मुख्य आरोपी मुनींद्र कुमार वित्तीय धोखाधड़ी का पुराना खिलाड़ी रहा है और वह वर्तमान में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद है।
- कोतवाली थाना (रांची): मुनींद्र के खिलाफ पहले से ही पशुपालन विभाग के खाते से 2.94 करोड़ रुपये की अवैध वेतन निकासी का मामला दर्ज है।
- रामगढ़ थाना: इसके अतिरिक्त रामगढ़ जिले में भी उसके खिलाफ 35 लाख रुपये की अवैध निकासी का एक अन्य मामला दर्ज है।
ये दोनों ही पुराने मामले पशुपालन विभाग के खातों से अवैध रूप से वेतन निकालने से जुड़े हैं, जिनकी जांच वर्तमान में सीआईडी (CID) की विशेष टीम कर रही है।
कुबेर पोर्टल पर फर्जी ID बनाकर की जालसाजी
खेलगांव थाने में दर्ज कराई गई नई प्राथमिकी के अनुसार, मुनींद्र कुमार की कार्यप्रणाली बेहद शातिर और योजनाबद्ध थी। उसने सरकारी ट्रेजरी के आधिकारिक 'कुबेर पोर्टल' की सुरक्षा में सेंध लगाई।
आरोपी ने पोर्टल पर कई फर्जी और टेंपरेरी (अस्थायी) लॉगिन आईडी तैयार कीं और बड़ी आसानी से सरकारी धन का गबन कर लिया।
जांच में सामने आए मुख्य बिंदु:
- केस 1 (मासोमात पोकली उरांव): आरोपी ने मासोमात पोकली उरांव के नाम पर एक फर्जी आईडी बनाई। इसके बाद अक्टूबर 2007 से लेकर जुलाई 2020 तक का बकाया वेतन (Arrears) दिखाते हुए कुल 6.90 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली।
यह पूरी राशि बैंक ऑफ इंडिया के एक विशेष खाते में ट्रांसफर की गई। इसके तुरंत बाद, अक्टूबर 2020 के नियमित वेतन के नाम पर उसी खाते में दोबारा 7.12 लाख रुपये और ट्रांसफर किए गए।
- केस 2 (पूर्व चालक मो. नेसार आलम): जांच में यह भी पता चला कि कार्यालय के एक भूतपूर्व चालक मो. नेसार आलम के नाम पर भी 3.12 लाख रुपये की फर्जी निकासी की गई। इस राशि को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक संयुक्त खाते में भेजा गया।
साक्ष्य मिटाने का भी प्रयास
शिकायतकर्ता डॉ. विवेक कुमार सिन्हा के अनुसार, कार्यालय के रिकॉर्ड की जब गहनता से जांच की गई, तो इन सभी निकासियों से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज, सेवा पुस्तिका या वेतन विवरणी (Salary Sheet) कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाई गई।
इससे यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से न सिर्फ गबन किया, बल्कि पकड़े जाने के डर से कार्यालय से संबंधित फाइलों और साक्ष्यों को भी पूरी तरह मिटाने का प्रयास किया।
खुद को पोर्टल पर दिखाया उच्च अधिकारी
आरोपी मुनींद्र कुमार ने तकनीकी हेराफेरी करने के लिए अपने नाम से भी एक टेंपरेरी आईडी बनाई थी। इस आईडी के जरिए उसने सिस्टम में खुद को एक उच्च पदस्थ अधिकारी के रूप में दर्शाया और गलत Salary Structure दर्ज कर दी।
इसी तरह उसने अन्य निर्दोष कर्मचारियों के नाम का उपयोग कर डेटा फीड किया ताकि किसी को शक न हो। पशुपालन निदेशालय ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है।
CID कर सकती है टेकओवर
निदेशालय के कड़े निर्देश के बाद ही यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। खेलगांव थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सरकारी धन का गबन, धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना (फोर्जरी) और आपराधिक विश्वासघात जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
चूंकि मुनींद्र के पिछले दो मामलों की जांच सीआईडी कर रही है, इसलिए पूरी संभावना है कि इस नए केस को भी जल्द ही सीआईडी की विशेष टीम अपने हाथ में ले लेगी।