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    रांची में अस्पताल पहुंचे तो इलाज से पहले पार्किंग की जंग, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से बढ़ रहा जाम और खतरा

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 07:38 AM (IST)

    रांची के निजी अस्पतालों में पार्किंग की भारी कमी मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। इससे सड़कों पर वाहन खड़े होते हैं, जिससे ट्रैफिक ...और पढ़ें

    सड़क किनारे खड़े गाड़ियों से बढ़ रहा जाम और खतरा

    सड़क किनारे खड़े गाड़ियों से बढ़ रहा जाम और खतरा

    HighLights

    1. निजी अस्पतालों में पार्किंग की कमी, मरीजों को होती है परेशानी।

    2. सड़क किनारे वाहन खड़े होने से बढ़ता है ट्रैफिक जाम।

    3. आपातकालीन एंबुलेंस भी जाम में फंसकर समय गंवाती है।

    जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी के निजी अस्पतालों में इलाज से पहले मरीजों और उनके स्वजनों की सबसे बड़ी परेशानी पार्किंग बन गई है। शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों में मरीजों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। कहीं बेसमेंट पार्किंग है ही नहीं, तो कहीं उसे केवल चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। 

    नतीजा यह है कि मरीजों के स्वजन दोपहिया और चारपहिया वाहन अस्पताल के बाहर सड़क किनारे खड़े करने को मजबूर हैं। सुबह और शाम के समय यही वाहन ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। 

    एंबुलेंस भी सड़क पर रहती है खड़ी

    स्थिति इतनी गंभीर है कि कई अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस तक सड़क पर खड़ी रहती है। अस्पतालों के आसपास अतिक्रमण, संकरी सड़कें और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में भी बाधा आती है। 

    ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य हिस्सा है। नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर सड़क किनारे अवैध पार्किंग हटाने का अभियान चलाते हैं, लेकिन अस्पतालों में स्थायी पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से समस्या जस की तस बनी रहती है। 

    राजधानी में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तो तेजी से हुआ है, लेकिन पार्किंग जैसी बुनियादी व्यवस्था अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    केडीएस अस्पताल : बैंक्वेट हॉल के कार्यक्रम से अस्पताल के बाहर लग जाता है जाम

    चेशायर रोड स्थित केडीएस अस्पताल के सामने पार्किंग की समस्या वर्षों से बनी हुई है। अस्पताल के निकट स्थित बैंक्वेट हाल में शादी या अन्य कार्यक्रम होने पर बड़ी संख्या में वाहन सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं। इसका सीधा असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर पड़ता है। 

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    कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती है। अस्पताल के बाहर वाहन खड़े रहने से सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल और बैंक्वेट हॉल के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या लगातार बढ़ रही है।

    झारखंड कैंसर सेंटर : सड़क ही बनी पार्किंग, एंबुलेंस भी बाहर खड़ी रहती है

    बूटी रोड स्थित झारखंड कैंसर सेंटर में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल परिसर में पर्याप्त पार्किंग नहीं है। अस्पताल के बाहर सड़क किनारे अस्थायी पार्किंग बना दी गई है, जो केवल खानापूर्ति साबित हो रही है। सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। 

    कई बार मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस भी सड़क पर ही खड़ी रहती है। कैंसर जैसे गंभीर रोगों के मरीजों के लिए यह स्थिति अतिरिक्त परेशानी पैदा करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के विस्तार के साथ पार्किंग व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए थी।

    क्यूरेस्टा अस्पताल : मरीजों के स्वजन पार्किंग तलाशते रहते हैं

    बूटी रोड स्थित क्यूरेस्टा अस्पताल के बाहर भी पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के स्वजन अक्सर वाहन खड़ा करने के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। जगह नहीं मिलने पर लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे दुर्घटना और जाम दोनों की आशंका बनी रहती है। 

    कई बार ट्रैफिक पुलिस सड़क से वाहन हटाती है, लेकिन अस्पताल के पास वैकल्पिक पार्किंग नहीं होने के कारण स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि इलाज के साथ पार्किंग की चिंता अलग से बनी रहती है।

    सैंफोर्ड अस्पताल : व्यस्त मार्ग पर पार्किंग संकट से बढ़ती है परेशानी

    कोकर स्थित सैंफोर्ड अस्पताल शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर स्थित है। यहां दिनभर मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही बनी रहती है। अस्पताल में पर्याप्त पार्किंग नहीं होने के कारण अधिकांश वाहन सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं। सुबह और शाम कार्यालय समय में यहां लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। 

    इमरजेंसी मरीजों को लेकर आने वाले वाहन भी कई बार जाम में फंस जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के कारण सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ता है, लेकिन पार्किंग प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

    सेंटेविटा अस्पताल : पार्किंग है, लेकिन मरीजों के लिए नहीं

    मेन रोड स्थित सेंटेविटा अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था तो है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा चिकित्सकों और कर्मचारियों के वाहनों के लिए आरक्षित रहता है। मरीजों और उनके स्वजनों को अस्पताल के बाहर सड़क किनारे वाहन खड़ा करना पड़ता है। 

    अस्पताल के सामने जगह भरने के बाद सड़क के दूसरी ओर भी वाहन लगने लगते हैं। कई बार वाहन काफी दूर तक खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित होता है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पीक आवर्स में यहां जाम आम बात हो गई है।

    आर्किड अस्पताल : छोटी बेसमेंट पार्किंग, बाकी वाहन सड़क पर

    एचबी रोड स्थित आर्किड अस्पताल में बेसमेंट पार्किंग तो है, लेकिन उसकी क्षमता काफी सीमित है। उपलब्ध पार्किंग का अधिकांश हिस्सा अस्पताल के डाक्टरों और कर्मचारियों के वाहनों से भर जाता है। मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरन सड़क किनारे वाहन खड़ा करना पड़ता है। 

    अस्पताल के बाहर दोनों ओर वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। व्यस्त एचबी रोड पर यह स्थिति दुर्घटना की आशंका भी बढ़ाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या के अनुरूप पार्किंग क्षमता नहीं है।

    विशेषज्ञों की राय : अस्पतालों में पार्किंग भी स्वास्थ्य सुविधा का हिस्सा

    शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों के लिए पार्किंग कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यक आधारभूत संरचना है। राष्ट्रीय भवन संहिता और नगर नियोजन मानकों के अनुसार अस्पतालों में मरीजों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और एंबुलेंस के लिए अलग-अलग पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए। यदि पार्किंग पर्याप्त नहीं होगी तो उसका सीधा असर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ेगा।

    क्या हो सकते है समाधान

    • अस्पतालों में मरीजों के लिए अलग पार्किंग स्लाट अनिवार्य किए जाएं।
    • कर्मचारियों और मरीजों की पार्किंग अलग-अलग हो।
    • बहुमंजिला या मैकेनिकल पार्किंग विकसित की जाए।
    • सड़क पर पार्किंग करने वाले वाहनों की नियमित निगरानी हो।
    • नगर निगम अस्पतालों की पार्किंग व्यवस्था का समय-समय पर आडिट कराए।
    • नए अस्पतालों को भवन स्वीकृति देते समय पार्किंग मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।