JPSC आंदोलन में छलका छात्रों का दर्द, किसी ने लोन लिया तो किसी ने ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारी; अब नौकरी का सपना अधूरा
जेपीएससी परीक्षा में भ्रष्टाचार ने छात्रों के सपनों को तोड़ दिया है। कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले और इंजीनियरिंग लोन चुकाने के लिए तैयारी कर रहे अभ्यर्थी ...और पढ़ें

कर्ज लेकर किताबें खरीदकर छात्र कर रहे हैं पढ़ाई।
HighLights
जेपीएससी भ्रष्टाचार ने छात्रों के सपनों को पूरी तरह तोड़ा।
कर्ज लेकर किताबें खरीदकर छात्र कर रहे हैं पढ़ाई।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की तैयारी करने के लिए छात्रों ने कई परेशानी का सामना किया, लेकिन जब सच सामने आया तो कई के सपने बिखर गए।
कुछ अभ्यर्थियों ने पढ़ाई के लिए किताब उधार पैसे लेकर खरीदी, तो किसी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए लिए गए लोन को चुकाने के लिए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। लेकिन ऐसे अभ्यर्थियों के हाथ आज भी खाली रह गए।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी के विरोध में चल रहे आंदोलन में कुछ ऐसे ही युवाओं का दर्द सामने आया जो इन दोनों आयोग की व्यवस्था से तंग आ चुके हैं।
कर्ज लेकर खरीदते हैं किताब, तब होती है पढ़ाई
रांची के कोकर में रहकर जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे पवन शर्मा ने बताया कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए किताबें महंगी आती है।
पैसे नहीं हाेने के कारण पढ़ाई नहीं हो पाती है। इसलिए मजबूरी में उधार लेते हैं और किताब खरीदते हैं। किसी तरह खाने-पीने का इंतजाम हो जाता है जिससे गुजारा चलता है।
धनबाद के रहने वाले हैं और रांची में पढ़ाई करते हैं। पैसे नहीं है इसलिए कोचिंग नहीं कर पाते हैं। अब इस परीक्षा के भष्ट्राचार की ऐसी स्थिति सामने आएगी तो हमारा मनोबल टूट जाएगा।
इंजीनियरिंग करने के लिए लिया लोन, अब चुकाने के लिए दे रहे हैं जेपीएससी
देवघर के रहने वाले राहुल कुमार की अजब कहानी है। इन्होंने इंजीनियरिंग करने के लिए छह लाख रुपये का लोन लिया है। इसके बाद जब पास हो गए तो जेपीएससी की तैयारी में जुट गए।
इनका कहना था कि इंजीनियर की बहाली के लिए जेपीएससी ने नियमित बहाली नहीं निकाली। मैंने तैयारी की थी कि अगर जेपीएससी के माध्यम से रोजगार मिल जाता तो मैं लोन चुका देता। लेकिन अब तो लगता है कि ये सपना भी टूट जाएगा।
आर्थिक तंगी है इसलिए ट्यूशन पढ़ाकर सुंरेंद्र करते हैं तैयारी
धनबाद से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे सुरेंद्र कुमार महतो ने बताया कि मेरे पिता किसान है इसलिए इतनी आमदनी नहीं हो पाती है कि मैं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता।
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इसलिए कोचिंग में एडमिशन भी नहीं ले पाया। लेकिन किताबें खरीदने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता हूं जिससे मेरी किताबों का खर्च निकल सके। खुद से ही तैयारी करता हूं और एक बार जेपीएससी की तैयारी करता हूं।
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