रांची-लोहरदगा रूट के यात्रियों के लिए खुशखबरी: मानसून से पहले रेलवे का मास्टरप्लान, अब नहीं रुकेगी कोयल नदी पुल पर ट्रेनें
रांची-लोहरदगा रेलखंड पर कोयल नदी रेलवे पुल को स्थायी रूप से मजबूत किया जा रहा है। पिलरों की मरम्मत, स्टील गर्डर और कटाव रोकने के लिए कर्टन व ड्राप वाल ...और पढ़ें

कोयल नदी रेलवे पुल को स्थायी मजबूती, सुरक्षित होगा रेल परिचालन।
HighLights
पिलर संख्या पांच को मजबूत बनाने पर चल रहा काम।
नदी कटाव रोकने को कर्टन वाल व ड्राप वाल निर्माण।
24 मीटर स्टील गर्डर लगने से ट्रेनें सामान्य चल रहीं।
जागरण संवाददाता, रांची। रांची-लोहरदगा रेलखंड पर स्थित कोयल नदी रेलवे पुल पर ट्रेनों का परिचालन पिछले करीब डेढ़ महीने से सामान्य रूप से जारी है। पुल की मरम्मत और 24 मीटर लंबे स्टील गर्डर लगाए जाने के बाद रेलवे ने इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बहाल कर दिया था।
अब रेलवे इस पुल को स्थायी रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त संरचनात्मक कार्य में जुटा हुआ है, ताकि भविष्य में किसी तरह की तकनीकी समस्या के कारण परिचालन प्रभावित न हो।
कुछ महीने पहले लोहरदगा और ईरगांव स्टेशन के बीच स्थित कोयल नदी रेलवे पुल के पिलरों में दरार मिलने के बाद रेलवे ने सुरक्षा कारणों से इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया था। इसके बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया।
पिलर संख्या चार और छह के बीच पहले जहां 12 मीटर का गर्डर था, वहां अब 24 मीटर लंबा स्टील गर्डर लगाया गया। इसके बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया था और वर्तमान में ट्रेनें नियमित रूप से चल रही हैं।
पुल पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसे और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पिलर संख्या चार और छह के बीच के हिस्से पर अतिरिक्त तकनीकी कार्य किया जा रहा है।
पिलर संख्या पांच को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए 15 पाइलिंग की गई है। इसके साथ ही पिलर संख्या चार और छह के पाइलिंग प्लेटफार्म कैप को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है, ताकि पुल की भार वहन क्षमता और स्थायित्व दोनों बढ़ सके।
नदी के प्रभाव वाले हिस्से में कर्टन वाल बनाई जा रही है, ताकि तेज बहाव से मिट्टी का कटाव न हो और पिलरों की नींव सुरक्षित बनी रहे। वहीं दूसरी दिशा में ड्राप वाल का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पुल के आसपास की जमीन और संरचना को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके। इन दोनों सुरक्षा दीवारों के निर्माण के बाद भविष्य में नदी के दबाव या कटाव से पिलरों को नुकसान पहुंचने की आशंका काफी कम हो जाएगी।
रेलवे ने बरसात के मौसम में कोयल नदी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम भी शुरू किए हैं। मानसून के दौरान नदी का बहाव तेज होने से मिट्टी कटाव का खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुल के आसपास कर्टन वाल और ड्राप वाल का निर्माण कराया जा रहा है।
रेलवे का दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कोयल नदी रेलवे पुल पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो जाएगा। इससे आने वाले कई दशकों तक इस पुल पर सुरक्षित और निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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कोयल नदी रेलवे पुल पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह सुरक्षित तरीके से जारी है। साथ ही भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पुल को और अधिक मजबूत बनाने का कार्य कराया जा रहा है। बरसात के दौरान नदी के प्रभाव को देखते हुए भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
— करुणानिधि सिंह, डीआरएम, रांची रेल मंडल
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