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    वकीलों के आंदोलन से लेकर वन भूमि घोटाले के आरोपी की जमानत खारिज तक... पढ़े रांची में कोर्ट के 6 अहम फैसले 

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 11:36 AM (IST)

    रांची के अधिवक्ता सदर अनुमंडल दंडाधिकारी की अदालत द्वारा जारी नोटिस के विरोध में न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे। यह निर्णय जिला बार एसोसिएशन की आम सभा मे ...और पढ़ें

    एसडीओ नोटिस के विरोध में रांची के वकील न्यायिक कार्य से दूर।

    एसडीओ नोटिस के विरोध में रांची के वकील न्यायिक कार्य से दूर।

    HighLights

    1. एसडीओ नोटिस के विरोध में रांची के वकील न्यायिक कार्य से दूर।

    2. जिला बार एसोसिएशन ने आम सभा में आंदोलन का लिया निर्णय।

    राज्य ब्यूरो, रांची। रांची की विभिन्न अदालतों में सोमवार को कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। एक ओर जिला बार एसोसिएशन ने एसडीओ कोर्ट की ओर से अधिवक्ताओं को जारी कारण बताओ नोटिस के विरोध में न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला किया।

    वहीं दूसरी ओर NIA कोर्ट ने ISIS से जुड़े आरोपी फैजान अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके अलावा बोकारो वन भूमि घोटाला, साइबर ठगी, सुजीत सिन्हा गिरोह और जमीन विवाद से जुड़े मामलों में भी अहम आदेश पारित किए गए।

    SDO के नोटिस के विरोध में वकील तीन दिनों तक नहीं करेंगे न्यायिक कार्य

    सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीओ) की अदालत द्वारा पूजा कुमारी बनाम संजय कुमार चतुर्वेदी मामले में जिला बार एसोसिएशन के 15 अधिवक्ताओं को कारण पृच्छा नोटिस जारी किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से दूर रहने का निर्णय लिया है।

    सोमवार को बार भवन में आयोजित आम सभा में इस नोटिस को अधिवक्ता समुदाय की गरिमा के प्रतिकूल बताते हुए सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया। संजय विद्रोही ने कहा कि जब किसी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो पहले उसकी जांच की जाएगी या सीधे नोटिस भेज दिया जाएगा। यह विधिसम्मत नहीं है।

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    बैठक में एडहॉक कमेटी के सदस्य एसपी अग्रवाल, मुकेश कुमार केशरी और संजय कुमार विद्रोही सहित अन्य उपस्थित रहे। आम सभा में तय किया गया कि चार अगस्त को सिविल कोर्ट बंद रहने के कारण अधिवक्ता केवल कार्यपालक (एक्जीक्यूटिव) न्यायालयों के न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे।

    पांच अगस्त को बार एसोसिएशन के आह्वान पर कार्यपालक और सिविल कोर्ट सहित सभी अदालतों में पूर्ण से अधिवक्ता न्यायिक कार्य से अपने आप को दूर रखेंगे। वहीं छह अगस्त को दोपहर 10:30 बजे शोकसभा के बाद कोई न्यायिक कार्य नहीं होगा।

    इसके बाद आयोजित आम सभा में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आम सभा के निर्णय का उल्लंघन करने वाले अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    आईएसआईएस से जुड़े आरोपित को फैजान अंसारी को नहीं मिली जमानत

    एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े मामले में आरोपित लोहरदगा के मिल्लत कालोनी निवासी फैजान अंसारी उर्फ फैज की जमानत याचिका खारिज कर दी।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एनआईए की जांच में आरोपित के आईएसआईएस समर्थक ऑनलाइन नेटवर्क, प्रचार सामग्री के प्रसार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने तथा विदेशी आईएसआईएस संचालकों से संपर्क के संबंध में पर्याप्त प्रथम दृष्टया सामग्री मिली है।

    डिजिटल उपकरणों से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक और फारेंसिक साक्ष्य का भी उल्लेख किया गया। फैजान 20 जुलाई 2023 से न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उसकी जमानत याचिका पहले झारखंड हाई कोर्ट भी खारिज कर चुकी है।

    वर्तमान में अभियोजन के 39 गवाहों की गवाही हो चुकी है और केवल दो गवाहों का परीक्षण शेष है। ऐसे में अदालत ने माना कि मुकदमा के अंतिम चरण में है, और जमानत देने का आधार नहीं बनता।

    बोकारो वन भूमि घोटाले में शैलेश सिंह को नहीं मिली जमानत

    सीआईडी के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने बोकारो वन भूमि घोटाला मामले में सोमवार को आरोपित शैलेश कुमार सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोपित की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आती है।

    वह सात जुलाई से न्यायिक हिरासत में है। सीआईडी के अनुसार मौजा तेतुलिया की 95.65 एकड़ संरक्षित वन भूमि को फर्जी 1933 के नीलामी प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर निजी भूमि बताकर जमाबंदी कराई गई। बाद में पावर आफ अटार्नी के जरिए यह जमीन उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड के नाम हस्तांतरित की गई।

    जांच एजेंसी का आरोप है कि शैलेश कुमार सिंह इस पूरे षड्यंत्र का प्रमुख साजिशकर्ता है। सुप्रीम कोर्ट के भूमि घोटालों संबंधी निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विस्तृत जांच आवश्यक है।

    साइबर ठगी के पीड़ित की राशि वापस करने का आदेश

    साइबर अपराध मामलों के विशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी की अदालत ने साइबर ठगी के पीड़ित आकाश कुमार को बड़ी राहत देते हुए उसके खाते से ठगी गई 50 हजार रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया है।

    अदालत ने यह आदेश दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। साइबर थाना की जांच में पता चला कि पीड़ित के पंजाब नेशनल बैंक खाते से निकाली गई राशि करूर वैश्य बैंक के एक लाभार्थी खाते में पहुंची थी, जिसे जांच के दौरान फ्रीज कर दिया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि संबंधित लाभार्थी खाता फर्जी पाया गया है और उस पर किसी ने दावा नहीं किया है।

    अदालत ने कहा कि पीड़ित की मेहनत की कमाई को अनावश्यक रूप से फ्रीज रखना उचित नहीं है। इसलिए साइबर थाना की अनुशंसा स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपये पीड़ित को अंतरिम अभिरक्षा पर लौटाने का आदेश दिया गया। इसके लिए पीड़ित को 60 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार का बंधपत्र देना होगा।

    सुजीत सिन्हा गिरोह के सदस्य को नहीं मिली जमानत

    सीआईडी के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने पुलिस पर फायरिंग और अवैध हथियार रखने के आरोपित सुजीत सिन्हा गिरोह के सदस्य तौफीक अंसारी की नियमित जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी।

    अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया। वह 13 अक्टूबर 2025 से जेल में है। सीआईडी के अनुसार 13 अक्टूबर 2025 की रात तुपुदाना ओपी पुलिस ने गश्ती के दौरान एक संदिग्ध बाइक सवार सोनू पासवान को पकड़ा, जिसके पास से लोडेड देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए।

    पूछताछ में उसने खुद को सुजीत सिन्हा गिरोह और कुबेर कोयलांचल शांति सेना का सदस्य बताते हुए अपने साथियों के बालसिरिंग पहाड़ी पर होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की। आरोप है कि पुलिस के पहुंचते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद आफताब आलम और तौफीक अंसारी को मौके से गिरफ्तार किया गया।

    घटनास्थल से देसी पिस्तौल, छह खोखे, तीन जिंदा कारतूस, पिस्तौल की मैगजीन और अन्य सामान बरामद किया गया। इससे पहले 26 फरवरी 2026 को भी उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।

    जमीन के लिए पैसे की लेनदेन मामले में याचिका खारिज

    न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने नौ लाख रुपये के भूमि लेन-देन विवाद से जुड़े एक आपराधिक पुनरीक्षण आवेदन को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।

    अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य से प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनता और यह विवाद मूल रूप से धन की वसूली से जुड़ा दीवानी प्रकृति का मामला प्रतीत होता है। मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2022 में भूमि खरीद के नाम पर आरोपितों को लगभग नौ लाख रुपये दिए गए, लेकिन न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही राशि लौटाई गई।

    अदालत ने पाया कि शिकायत के समर्थन में लेन-देन का कोई लिखित समझौता, रसीद या अन्य ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जिस बिक्री विलेख की प्रति दाखिल की गई, उसका भी पक्षकारों से कोई संबंध नहीं था। गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सका।