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    रांची में बच्चों पर लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा! 25 दिनों में 28 संक्रमित; इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज 

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 10:40 AM (IST)

    बच्चों में लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, रांची में 25 दिनों में 28 मामले सामने आए हैं, जिससे 2 से 12 वर्ष के बच्चे अधिक प ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. रांची में 25 दिनों में 28 बच्चे लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित।

    2. दूषित पानी, गंदगी से फैलता है रैट फीवर, बच्चों को बचाएं।

    जागरण संवाददाता, रांची। बच्चों में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण (रैट फीवर) तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 25 दिनों में 28 बच्चों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। इनमें दो से 12 वर्ष तक के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। रैट फीवर से पीड़ित बच्चों को लेकर अभिभावक रिम्स और सदर अस्पताल सहित निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं।

    शिशु रोग विभाग के ओपीडी में अभी बुखार के ही सबसे अधिक मामले आ रहे हैं, जिसमें कुछ में रैट फीवर की पहचान हुई है। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में एक दर्जन से अधिक बच्चे आइसीयू में भर्ती हैं। इनमें रानी अस्पताल में फिलहाल छह बच्चों का उपचार चल रहा है।

    शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर पहचान और इलाज नहीं हुआ तो यह संक्रमण किडनी, लिवर, फेफड़े और मस्तिष्क तक को प्रभावित कर सकता है।

    रानी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी और गंदगी के कारण यह संक्रमण तेजी से फैलता है। अभिभावकों को बच्चों को जलजमाव और गंदे पानी वाली जगहों से दूर रखना चाहिए। लेप्टोस्पायरोसिस, जिसे रैट फीवर भी कहा जाता है। चूहों समेत संक्रमित जानवरों के मूत्र से फैलने वाला जीवाणुजनित संक्रमण है, जो बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है।

    ये हैं प्रमुख लक्षण

    • तेज बुखार और ठंड लगना
    • सिर और शरीर में तेज दर्द
    • पिंडलियों और मांसपेशियों में असहनीय दर्द
    • आंखें लाल होना
    • उल्टी और दस्त
    • भूख कम लगना
    • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
    • पेशाब कम होना
    • सांस लेने में तकलीफ

    झारखंड में कुछ वर्षों से मिल रहे लेप्टोस्पायरोसिस के मरीज

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस हर वर्ष दुनिया में 10 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित करता है और लगभग 60 हजार लोगों की मौत का कारण बनता है।

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    भारत में यह संक्रमण विशेष रूप से मानसून और बाढ़ प्रभावित राज्यों में अधिक देखा जाता है। झारखंड में भी पिछले कुछ वर्षों से बारिश के मौसम में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में थोड़ी सतर्कता बरती जाए।

    शुरुआती अवस्था में एंटीबायोटिक से नियंत्रण संभव

    डॉ. पीके चौधरी बताते हैं कि शुरुआती अवस्था में एंटीबायोटिक दवाओं से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन, नसों के जरिए दवा, तरल पदार्थ और आवश्यकता पड़ने पर आइसीयू में उपचार दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वयं दवा देने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

    शरीर में प्रवेश कर जाता है जीवाणु

    एचओडी रिम्स के शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ. पीके चौधरी बताते हैं कि लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरिया जनित जूनोटिक बीमारी है। यह लेप्टोस्पाइरा नामक जीवाणु से होती है, जो मुख्य रूप से चूहों, कुत्तों, सूअरों, मवेशियों और अन्य जानवरों के मूत्र के माध्यम से फैलता है। जब यह मूत्र बारिश के पानी, कीचड़ या जलभराव में मिल जाता है, तब बच्चे इसके संपर्क में आ जाते हैं और संक्रमित हो जाते हैं।

    यह जीवाणु त्वचा पर मौजूद छोटे घाव, कटे स्थान, आंख, नाक या मुंह की श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है। बच्चों में जोखिम अधिक डॉक्टरों के अनुसार, बारिश के दौरान बच्चे अक्सर पानी में खेलते हैं। नंगे पैर चलते हैं या गंदे पानी के संपर्क में आते हैं।

    इससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। कई बार शुरुआती लक्षण डेंगू, वायरल बुखार या टाइफाइड जैसे दिखाई देते हैं, जिससे पहचान में देरी हो सकती है। इसलिए जरूरत है कि डॉक्टर के परामर्श पर ही जांच के बाद बच्चों को दवा दी जाए, खुद से दवा न लें।

    समय पर इलाज जरूरी

    इलाज में देर व गंभीर संक्रमण होने पर मरीज में लीवर फेल होना, किडनी खराब होना, फेफड़ों से रक्तस्राव, मस्तिष्क संक्रमण (मेनिनजाइटिस) और मल्टी आर्गन फेल्योर हो सकता है।

    कैसे करें बचाव?

    • बच्चों को जलभराव और गंदे पानी में खेलने से रोकें।
    • बाहर जाने पर जूते या गमबूट पहनाएं।
    • शरीर पर किसी प्रकार का
घाव हो तो उसे ढंककर रखें।
    • उबला या साफ पानी पिलाएं।
    • घर और आसपास चूहों की संख्या कम करने के उपाय करें।
    • तेज बुखार या मांसपेशियों में
दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से
संपर्क करें।