NEP 2020 का असर: NCERT सिलेबस बदला पर दुकानें खाली, ₹500 के सेट की जगह ₹1700 की रेफरेंस बुक्स का बोझ
रांची में नए शैक्षणिक सत्र के बावजूद नौवीं के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें महंगी रेफरेंस बुक्स खरीदने पर मजबूर होना ...और पढ़ें

रांची में छात्रों को नहीं मिलीं एनसीईआरटी की नई किताबें, परीक्षा की चिंता बढ़ी।
HighLights
नौवीं के छात्रों को एनसीईआरटी किताबें उपलब्ध नहीं।
NEP 2020 के कारण पाठ्यक्रम में बदलाव।
₹500 की जगह ₹1700 की रेफरेंस बुक्स का बोझ।
जागरण संवाददाता, रांची। सीबीएसई स्कूलों में अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत हो गई है। नवीं के बच्चों की क्लास चल रही है, लेकिन उनके हाथ में अब तक एनसीईआरटी की किताबें नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्कूलों की ओर से जब मासिक या साप्ताहिक परीक्षा ली जाएगी, तो उसकी तैयारी बच्चे कहां से करेंगे और परीक्षा कैसे देंगे।
वजह यह है कि एनसीईआरटी की नई किताबें अभी तक दुकानों तक नहीं पहुंची हैं, जिनमें विज्ञान और गणित जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। अब दूसरा सवाल यह भी है कि स्कूल विद्यार्थियों को किन किताबों से पढ़ा रहे हैं और जब नई किताबें आएंगी तो उनका कोर्स समय पर कैसे पूरा होगा।
दुकानों पर किताबें नहीं, बच्चों के हाथ खाली
नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन कक्षा नवीं के छात्रों के हाथ अब तक खाली हैं। जहां हर साल नई किताबों को लेकर उत्साह रहता था, इस बार वही उत्सुकता चिंता में बदल गई है। रांची की किताब दुकानों में नवीं की नई किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
अपर बाजार के पुस्तक पथ स्थित कई दुकानों में पूछने पर पता चला कि एनसीईआरटी की साइंस और मैथ्स की किताबें अभी नहीं आई हैं। दुकानदारों का कहना है कि इसके लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है, शायद 15 मई के बाद किताबें उपलब्ध हों।
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जयश्री बुक डिपो और सुबोध ग्रंथमाला जैसी बड़ी दुकानों से भी अभिभावकों को यही जवाब मिल रहा है। किताबें नहीं मिलने से बच्चों में डर है कि समय पर सिलेबस कैसे पूरा हो पाएगा, जिससे परीक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहा है।
पाठ्यक्रम में बदलाव का असर
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव किए हैं, जो नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) पर आधारित हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य रटने की जगह समझ और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर देना है।
विज्ञान की किताब में आधुनिक विज्ञान को भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के साथ जोड़ा गया है। बायोलॉजी (सेल, टिश्यू) को पहले और फिजिक्स (मोशन) को बाद में रखा गया है, जो पुराने पैटर्न से अलग है। इतिहास में समयक्रम में बदलाव के साथ 1200 ईस्वी तक के प्रारंभिक मानव इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा पर अधिक जोर दिया गया है।
भूगोल में कक्षा 11 के कुछ विषय, जैसे पृथ्वी का आंतरिक भाग और महासागरीय भू-आकृति, अब कक्षा 9 में शामिल किए गए हैं। गणित की नई किताब में भी अध्याय बदले गए हैं, जिसमें बीजगणितीय सर्वसमिकाएं (Algebraic Identities) जैसे नए विषय शामिल हो सकते हैं।
एनसीईआरटी का पूरा सेट ₹500 में, रेफरेंस किताबों की कीमत ₹1700 तक
किताबों की दुकानों पर जाने पर अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि जब तक एनसीईआरटी की किताबें नहीं आतीं, तब तक वे रेफरेंस बुक से पढ़ाई जारी रखें। लेकिन एनसीईआरटी और रेफरेंस किताबों की कीमत में जमीन-आसमान का अंतर है।
जहां एनसीईआरटी का पूरा सेट 450 से 500 रुपये में आ जाता है, वहीं रेफरेंस की सिर्फ एक किताब की कीमत ही 500 से 600 रुपये के बीच है। गणित की बात करें तो आरडी शर्मा के दो किताबों के सेट की कीमत 650 रुपये है, जबकि आरएस अग्रवाल की किताब 695 रुपये की है।
साइंस के लिए एस. चांद (लखमीर सिंह) के तीन विषयों के सेट (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी) की कीमत 1700 रुपये तक जा रही है। अभिभावक पहले से ही स्कूलों की फीस के बोझ तले दबे हैं, ऐसे में महंगी रेफरेंस किताबों का अतिरिक्त खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।