रांची में मूक नाबालिग को रेस्क्यू कर थाने की जगह अपने घर ले गया जमादार, मां ने पूछा- कपड़े कैसे बदले?
रांची में एक मूक नाबालिग लड़की को बरामद करने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। एक जमादार उसे थाने या संरक्षण गृह ले जाने के बजाय अपने घ ...और पढ़ें

मूक नाबालिग को रेस्क्यू कर थाने की जगह घर ले गया जमादार।
HighLights
मूक नाबालिग को थाने के बजाय घर ले गया जमादार।
वरिष्ठ अधिकारियों के पूछने पर कचहरी चौक पर छोड़ा।
रांची में नाबालिग के कपड़े बदले मिलने से संदेह गहराया।
जागरण संवाददाता, रांची। रांची में एक मूक नाबालिग लड़की को बरामद करने के बाद पुलिस की कार्यशैली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। बीआईटी थाना में पदस्थापित एक जमादार ने नाबालिग को नियमानुसार थाना या संरक्षण गृह (प्रेमाश्रय) ले जाने के बजाय अपने घर ले गया। इतना ही नहीं, जब वरीय अधिकारियों ने नाबालिग के संबंध में जानकारी मांगी तो उसे कचहरी चौक पर छोड़ दिया गया।
बाद में महिला थाना पुलिस ने नाबालिग को कचहरी चौक से बरामद कर उसे संरक्षण के लिए प्रेमाश्रय भेजा। जानकारी के अनुसार, पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस ने एक सुनसान इलाके से मूक नाबालिग लड़की को बरामद किया था।
ऐसे मामलों में पुलिस को किशोर न्याय अधिनियम और निर्धारित प्रक्रिया के तहत बच्चे को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाकर संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी होती है। लेकिन इस मामले में जमादार ने स्थापित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नाबालिग को अपने घर ले गया।
मामले की जानकारी जब वरीय अधिकारियों को मिली और उन्होंने नाबालिग के संबंध में जानकारी लेनी चाही तो बताया जा रहा है कि उसे कचहरी चौक पर छोड़ दिया गया। इसके बाद महिला थाना की टीम मौके पर पहुंची और नाबालिग को अपने संरक्षण में लेकर प्रेमाश्रय भेजा।
हालांकि नाबालिग के बारे में बताया जा रहा है कि वह धर ची चली आ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नाबालिग पुलिस की सुरक्षा में थी तो उसे बीच रास्ते में क्यों छोड़ दिया गया।
यदि वह दोबारा किसी अनहोनी का शिकार हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। इसके अलावा, जिस समय नाबालिग को पहली बार बरामद किया गया था और जब महिला थाना पुलिस ने उसे कचहरी चौक से बरामद किया, उस दौरान उसके कुछ कपड़े बदले हुए मिले। इसे लेकर भी संदेह पैदा हो गया है।
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मां ने पूछा, बेटी के कपड़े कैसे बदले
नाबालिग की मां ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि उनकी बेटी के कपड़े कैसे बदले, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस की लापरवाही से कई सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
बीआईटी थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने बताया कि पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस ने नाबालिग को सुनसान इलाके से बरामद किया था। पूछताछ के दौरान वह बोल नहीं पा रही थी, लेकिन इशारे से पुलिस को कचहरी चौक तक लेकर गई। नाबालिग बोल नहीं सकती हे।
इसके बाद वह अपने घर या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकी। हालांकि, यह जवाब इस सवाल का उत्तर नहीं देता कि नाबालिग को थाने या संरक्षण गृह ले जाने के बजाय कथित तौर पर जमादार अपने घर क्यों ले गया और बाद में उसे कचहरी चौक पर क्यों छोड़ दिया गया।
फिलहाल पूरे मामले ने पुलिस की संवेदनशीलता, जवाबदेही और निर्धारित प्रक्रिया के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यह केवल लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि एक संवेदनशील नाबालिग की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक विषय भी माना जाएगा। अब देखना होगा कि वरीय अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।