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    रांची में निजी स्कूलों की मनमानी: फीस में 10-20% वृद्धि, अभिभावकों की जेबें हो रहीं ढीली

    By Kumar GauravEdited By: Shashank Baranwal
    Updated: Sun, 05 Apr 2026 11:39 PM (IST)

    रांची के निजी स्कूलों ने जिला प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी कर फीस में 10-15% तक की मनमानी वृद्धि की है, जिससे अभिभावक परेशान हैं। झारखंड पेरेंट्स एस ...और पढ़ें

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    कुमार गौरव, रांची। एक ओर जहां निजी स्कूलों द्वारा फीस की मनमानी बढ़ोत्तरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने गत दिनों दिशा निर्देश जारी किया है तो दूसरी ओर शहर के निजी स्कूल इन निर्देशों से कोई इत्तेफाक नहीं रखते। यही कारण है कि कई स्कूलों ने एकाध प्रतिशत नहीं बल्कि 10 से 15 प्रतिशत तक फीस में वृद्धि कर जिला प्रशासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

    ऐसा नहीं है कि यह वृद्धि जिला प्रशासन के निर्देशों से पूर्व की गई बल्कि दो से तीन दिन पूर्व ही फीस में वृद्धि की गई है। लिहाजा, अभिभावकों की जेबें जहां ढीली हो रही हैं और उनमें नाराजगी देखी जा रही है तो झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने बाकायदा पत्र जारी कर अपनी शिकायत जिला प्रशासन से कर दी है।

    सरकारी गाइडलाइन के अनुसार दो वर्षों के अंदर 10 प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है तो वहीं, शहर के कई ऐसे निजी स्कूल हैं जहां शुल्क वृद्धि को ले मनमानी की जा रही है।

    कमोबेश हरेक वर्ष एडमिशन शुल्क से लेकर अन्य गतिविधियों का हवाला देते हुए शुल्क में वृद्धि की जा रही है। विरोध के स्वर तेज होने पर भी इन स्कूलों के प्रबंधन पर कुछ खास असर नहीं पड़ता है।

    गत वर्ष एक निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ पैरेंट्स का गुस्सा फूटा था लेकिन हो हंगामे के बाद मामले को रफा दफा कर दिया गया। सरकारी नियमानुसार निजी स्कूल 10 प्रतिशत तक ही शुल्क बढ़ा सकते हैं। जबकि कई स्कूलों में यह राशि 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं।

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    यह शुल्क एनुअल चार्ज, बिल्डिंग चार्ज, मिसलिनियस चार्ज, कंप्यूटर चार्ज, गेम्स चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज, सीसीटीवी चार्ज, स्कूल चार्ज, एसएमएस चार्ज, मेडिकल चार्ज, आउटरिच चार्ज और डेवलपमेंट चार्ज के तौर पर लिया जा रहा है।

    वहीं, दूसरी ओर डाल्टनगंज जिले से एक सुखद समाचार प्राप्त हुआ है। वहां के निजी स्कूल के संघों ने अभिभावकों को राहत देते हुए अपने स्तर पर ही फीस वृद्धि नहीं करने का निर्णय लिया है, जो कि नई पहल है।

    वहीं, राजधानी रांची में जिला प्रशासन द्वारा फीस निर्धारण के लिए गठित कमेटी की अब तक एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई है, जबकि कई विद्यालयों ने मंथली फीस, एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, कंप्यूटर फीस सहित विभिन्न मदों में 15 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, डाल्टनगंज जिला में की गई पहल राज्य के सभी जिलों में होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि एसोसिएशन द्वारा वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि, पुस्तक सूची जारी न करने, निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने तथा संबंधित बोर्डों के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।

    हालांकि, जिला प्रशासन के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि 6 अप्रैल को इसी संबंध में उपायुक्त रांची की अध्यक्षता व अन्य जिला पदाधिकारियों की उपस्थिति में बैठक होगी। जिसमें तय मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।

    उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

    झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन द्वारा रांची जिले के निजी स्कूलों में बढ़ती अनियमितताओं को ले उपायुक्त को एक ज्ञापन ईमेल के माध्यम से भेजा गया है। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि कई स्कूलों द्वारा अब तक पुस्तक सूची जारी नहीं किए जाने से अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    वहीं, कुछ स्कूलों द्वारा अभिभावकों को केवल चुनिंदा दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्द्धा समाप्त हो रही है और कीमतों में अनावश्यक वृद्धि हो रही है।

    एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीएसई, आइसीएसई बोर्ड के दिशा निर्देशों के अनुसार स्कूल किसी भी अभिभावक को किसी विशेष दुकान से किताब या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, इसके बावजूद इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

    झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने उपायुक्त से की ये मांग

    • फीस निर्धारण कमेटी की तत्काल बैठक बुलाई जाए
    • मनमानी फीस वृद्धि करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो
    • अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस दिलाई जाए
    • सभी स्कूलों को पुस्तक सूची तुरंत जारी करने का निर्देश दिया जाए
    • किसी विशेष दुकान से खरीदारी के दबाव पर रोक लगाई जाए
    • शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर हेल्पलाइन, नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए
    • नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद करने तक की सख्त कार्रवाई की जाए।

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    यह मुद्दा अभिभावकों और छात्रों के हित से जुड़ा हुआ है, इसलिए जिला प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। जिला प्रशासन की सक्रिय पहल से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों का विश्वास मजबूत होगा।

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    अजय राय, अध्यक्ष, झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन।