Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    रांची के निजी स्कूलों पर नकेल: 5 साल से पहले नहीं बदलेंगी यूनिफॉर्म और किताबें, री-एडमिशन फीस पर रोक

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 08:11 PM (IST)

    रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने निजी स्कूलों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। किताबों व यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव नहीं होगा। पीटीए और शुल्क समिति क ...और पढ़ें

    रांची में फीस, किताबें, यूनिफॉर्म पर नए सख्त नियम लागू। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)

    रांची में फीस, किताबें, यूनिफॉर्म पर नए सख्त नियम लागू। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)

    HighLights

    1. स्कूल परिसर में किताब बिक्री पर पूर्ण रोक, खुले बाजार से खरीद।

    2. फीस, किताबों, यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर प्रतिबंध।

    3. पुनर्नामांकन शुल्क अवैध, पीटीए और शुल्क समिति अनिवार्य।

    जागरण संवाददाता, रांची। विद्यालयों द्वारा परिसर में पुस्तक बिक्री की प्रथा पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। अभिभावक खुले बाजार से किसी भी विक्रेता से पुस्तकें खरीद सकते हैं और विद्यालय उन्हें किसी विशेष दुकान या प्रकाशक से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।

    सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों को केवल एनसीइआरटी पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। सहायक पुस्तकों को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकेगा। साथ ही, पुस्तकों में बार-बार बदलाव पर रोक लगाते हुए कहा गया कि केवल 5 वर्ष या पाठ्यक्रम परिवर्तन की स्थिति में ही बदलाव संभव होगा।

    यह निर्देश उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दिए। जिले के निजी विद्यालयों के लिए प्रशासन ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    अब सभी निजी विद्यालयों को विगत तीन शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ चालू सत्र 2026-27 में कक्षावार व विभिन्न मदों में लिए गए सभी शुल्कों का विस्तृत विवरण 20 अप्रैल की संध्या पांच बजे तक जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा।

    तय समय सीमा का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिले के निजी विद्यालयों के प्राचार्यों और प्रतिनिधियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था में मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी संस्थानों को कानून के दायरे में रहकर कार्य करना होगा।

    खबरें और भी

    बैठक का उद्देश्य और सहभागिता

    झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है। जिले के कुल 272 निजी विद्यालयों में से 192 विद्यालयों के प्राचार्य अथवा उनके प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित हुए।

    अनुपस्थित विद्यालयों के प्रति प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। बैठक के दौरान कई विद्यालयों से मौके पर ही शिकायतों को लेकर जवाब भी तलब किया गया।

    पीटीए गठन अनिवार्य, 3 दिनों में देनी होगी सूचना

    उपायुक्त ने अभिभावकों की भागीदारी को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए सभी विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन अनिवार्य कर दिया।

    उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि अब तक केवल 13 विद्यालयों ने ही पीटीए गठन की सूचना उपलब्ध कराई है। सभी विद्यालयों को निर्देश दिया गया कि वे अगले 3 दिनों के भीतर हार्ड कॉपी और ईमेल के माध्यम से इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को उपलब्ध कराएं।

    पीटीए की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि अभिभावकों को इसकी जानकारी आसानी से मिल सके।

    विद्यालय स्तरीय शुल्क समिति भी जरूरी

    शुल्क निर्धारण को लेकर मनमानी रोकने के लिए प्रत्येक विद्यालय में शुल्क समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। यह समिति झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करेगी।

    समिति गठन की सूचना भी 3 दिनों के भीतर नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रकाशित करते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को भेजनी होगी।

    शुल्क वृद्धि पर सख्त नियम लागू

    बैठक में शुल्क वृद्धि को लेकर स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। विद्यालय स्तर की समिति अधिकतम 10 प्रतिशत तक शुल्क वृद्धि को स्वीकृति दे सकती है, जबकि इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की अनुमति अनिवार्य होगी।

    इसके अलावा, एक बार बढ़ाया गया शुल्क न्यूनतम दो वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जिससे अभिभावकों पर बार-बार आर्थिक बोझ न पड़े।

    पुनर्नामांकन शुल्क पर पूरी तरह रोक

    उपायुक्त ने साफ कहा कि किसी भी छात्र को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने के लिए पुनर्नामांकन शुल्क लेना पूरी तरह अवैध है।

    यदि कोई विद्यालय इस प्रकार का शुल्क लेता है, तो उसे अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

    परीक्षा में किसी छात्र को नहीं रोका जाएगा

    बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने से रोकना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

    ऐसा करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम, बाल अधिकार कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। प्रशासन ने इस मामले में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने की बात कही है।

    यूनिफार्म को लेकर भी सख्ती

    विद्यालयों द्वारा यूनिफॉर्म के नाम पर होने वाली अनियमितताओं पर भी सख्त निर्देश दिए गए। यूनिफार्म के डिजाइन में बार-बार बदलाव नहीं किया जा सकेगा और कम से कम 5 वर्षों के अंतराल पर ही परिवर्तन संभव होगा।

    इसके लिए पीटीए की सहमति भी अनिवार्य होगी। विद्यालय किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा और परिसर में इसकी बिक्री भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

    अन्य शुल्क भी नियमों के दायरे में

    प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी नाम से लिया जाने वाला शुल्क—चाहे वह वार्षिक, विकास या अन्य किसी मद में हो—उसे मासिक शुल्क का हिस्सा माना जाएगा। इसलिए उसकी वृद्धि भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जा सकेगी।

    परिवहन शुल्क और सुरक्षा मानक

    परिवहन शुल्क में वृद्धि को भी सामान्य शुल्क नियमों के अंतर्गत रखा गया है। सभी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों का पूर्ण अनुपालन हो। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है।

    बैठक में उपस्थित अधिकारी

    बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय, क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी एवं परियोजना पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

    यह भी पढ़ें- झारखंड में डाॅक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों को ऑनलाइन लेनी होगी अवकाश की स्वीकृति, नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक सब डिजिटल

    यह भी पढ़ें- ममता बनर्जी के साथ क्षेत्रीय दल एकजुट, अखिलेश-तेजस्वी और हेमंत का साथ; बंगाल चुनाव में भाजपा-कांग्रेस अकेले