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    छत से टपकता पानी, दीवारों से निकलते सरिया और जहरीले सांप... रांची के स्कूल में खतरे के बीच पढ़ाई

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 06:47 AM (IST)

    राजधानी रांची के हेतू गांव स्थित राजकीयकृत माध्यमिक विद्यालय का 67 साल पुराना भवन जर्जर हो चुका है, जहां छात्र छत से टपकते पानी और सांपों के खतरे के ब ...और पढ़ें

    जर्जर भवन, टपकती छत और सांपों के साए में पढ़ाई। (जागरण)

    जर्जर भवन, टपकती छत और सांपों के साए में पढ़ाई। (जागरण)

    HighLights

    1. हेतू गांव का 67 साल पुराना स्कूल भवन जर्जर।

    2. छत टपकती, दीवारें टूटीं, परिसर में सांपों का खतरा।

    3. एक शिक्षक के भरोसे चल रहा पूरा विद्यालय।

    जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर स्थित हेतू गांव का राजकीयकृत माध्यमिक विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर बयां कर रहा है।

    करीब 67 वर्ष पुराने इस विद्यालय का भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है, दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, कई जगह सरिया बाहर निकल आए हैं और परिसर में जहरीले सांपों का लगातार खतरा बना रहता है।

    इन परिस्थितियों में भी 90 से अधिक छात्र-छात्राएं रोज जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार परिसर में सांप निकलना आम बात हो गई है।

    स्थिति ऐसी है कि शिक्षकों ने अपने स्तर पर सांप पकड़ने का उपकरण बना रखा है। जब भी कक्षा या परिसर में सांप दिखाई देता है, शिक्षक ही उसे पकड़कर बाहर निकालते हैं। इससे बच्चों और अभिभावकों में हमेशा डर का माहौल बना रहता है।

    मानसून में और बिगड़ जाती है स्थिति

    वर्ष 1959 में बने इस विद्यालय भवन का आज तक समुचित जीर्णोद्धार नहीं हो सका है। बारिश के मौसम में अधिकांश कक्षाओं और प्रधानाध्यापक कक्ष की छत से पानी टपकता है। कई कमरों में बाल्टी और बर्तन रखकर पानी रोका जाता है।

    भवन के कई हिस्सों में सरिया बाहर निकल आने से कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। विद्यालय परिसर में लगा सोलर सिस्टम भी लंबे समय से खराब पड़ा है।

    95 डिसमिल जमीन खाली, फिर भी नया भवन नहीं

    विद्यालय के पास लगभग 95 डिसमिल जमीन उपलब्ध है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार पहल करे तो यहां नया भवन बनाकर विद्यालय को प्लस-टू तक विकसित किया जा सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। बावजूद इसके वर्षों से जमीन खाली पड़ी है और बच्चे जर्जर भवन में पढ़ाई करने को विवश हैं।

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    एक शिक्षक के भरोसे चल रहा पूरा स्कूल

    विद्यालय में छह शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन फिलहाल पांच शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में लगी हुई है। ऐसे में पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी एकमात्र शिक्षक पर आ गई है।

    वहीं, अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ाने के साथ विद्यालय का प्रशासनिक कार्य भी संभाल रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

    कई बार शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान

    विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। समय-समय पर मामूली मरम्मत कराई जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

    डीईओ बोले- निरीक्षण के बाद होगी कार्रवाई

    जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) बादल राज ने कहा कि विद्यालय के कुछ कमरों की पहले मरम्मत कराई गई थी। अब मामले की जानकारी मिलने के बाद वह स्वयं विद्यालय का निरीक्षण करेंगे।

    यदि भवन की स्थिति गंभीर पाई जाती है तो आवश्यक मरम्मत और अन्य कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। राजधानी के बीचों-बीच, एयरपोर्ट से सटे इस सरकारी विद्यालय की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    जब बच्चे जर्जर भवन, टपकती छत और जहरीले सांपों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हों, तो यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।

    अब नजर शिक्षा विभाग पर है कि वह केवल निरीक्षण तक सीमित रहता है या बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाता है।

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