रांची में JPL फाइनल मैच के दौरान भगदड़: बेकाबू भीड़ ने स्टेडियम का गेट तोड़ा, 12 से अधिक घायल
रांची के जेएससीए स्टेडियम में जेपीएल फाइनल मैच के दौरान वेस्ट गेट पर भगदड़ मच गई, जिसमें 8 से अधिक दर्शक घायल हो गए। अप्रत्याशित भीड़ और पुलिस-प्रशासन ...और पढ़ें
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स्टेडियम में पहुंची एंबुलेंस। एएनआई
HighLights
जेपीएल फाइनल मैच के दौरान रांची स्टेडियम में भगदड़।
वेस्ट गेट पर भीड़ नियंत्रण में पुलिस-प्रशासन विफल रहा।
घटना में आठ से अधिक दर्शक घायल, कई अस्पताल में भर्ती।
जागरण संवाददाता, रांची। जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में मंगलवार को जेपीएल-20 फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे क्रिकेट प्रेमियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा।
फाइनल मैच को लेकर उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ और जेएससीए और पुलिस-प्रशासन की कमजोर तैयारी के कारण नार्थ गेट पर अफरातफरी मच गई। पहले लोगों को नार्थ गेट से प्रवेश कराया जा रहा था। भीड़ अधिक हो जाने से लोगों को साउथ गेट से प्रवेश करने के लिए बोल दिया गया।
इसी को लेकर भगदड़ हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि गेट पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। नाराज दर्शकों ने बाद में वेस्ट गेट को तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम में प्रवेश के दौरान हजारों दर्शक एक साथ नार्थ गेट की ओर पहुंच गए।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हुई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। भगदड़ में बच्चे, महिलाएं और युवा भी चोटिल हो गए। इस बीच स्टेडियम के बाहर लगे लोहे की बैरिकेडिंग टूट गई।
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन के तमाम आला पदाधिकारी घटना स्थल पहुंचे और पूरे मामले को जानने का प्रयास में लगे रहें।दजनों लोग हुए घायल आठ गंभीर रूप से हुए जख्मीघटना में कम से कम आठ क्रिकेट प्रेमियों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इनमें से पांच घायलों को राज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दो घायलों को सदर अस्पताल और एक को पारस अस्पताल पहुंचाया गया।
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दर्जनों घायलों को निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। राज अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार किया गया है। हालांकि एक लड़की के पेट में गंभीर चोट लगी है, जिसके कारण उसे निगरानी में रखा गया है।
सिर्फ एक गेट खोला गया
घटना के बाद पुलिस और स्टेडियम प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फाइनल मुकाबले को लेकर बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना पहले से थी, बावजूद इसके भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखी।
कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि गेट पर न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था थी। स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट है, लेकिन एक ही गेट खोला गया, जिससे भगदड़ मच गई। इसमें भी जब भीड़ अधिक होने लगी तो गेट बंद कर दिया गया और लोग बेकाबू हो गए। जबकि अंदर स्टेडियम में काफी जगह थी।
चारों ओर बिखरे पड़े हैं चप्पल-जूता
स्टेडियम के बाहर और अंदर लोगों के अफरा-तफरी के दौरान चप्पल-जूता बिखरा पड़ा है। हालांकि घंटों प्रयास के बाद स्थिति पर काबू पाया गया लेकिन इस बीच महिला, बच्चे व युवकों को काफी चोट लगी। दर्जनों लोग हल्के चोट लगने के बाद किसी तरह वापस अपने घर को चले गए लेकिन अधिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया।
दर्जनों एंबुलेंस भेजी गईं
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही स्टेडियम परिसर में देर रात तक लगातार 108 एंबुलेंस भेजी जाती रही।
रात 11.30 बजे तक सदर अस्पताल में दो, पारस अस्पताल में एक और राज अस्पताल में पांच घायलों को इलाज के लिए लाया गया। उन्होंने बताया कि सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है और प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बना हुआ है।
आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को सदर अस्पताल में भी शिफ्ट किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि देर रात तक कुछ और घायल इलाज के लिए पहुंच सकते हैं।
बड़े आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन पर फिर सवाल
जेपीएल फाइनल जैसे बड़े आयोजन में हुई इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खेल प्रेमियों का कहना है कि मैच का रोमांच देखने पहुंचे लोगों को स्टेडियम प्रबंधन की ओर से अव्यवस्था और लापरवाही की कीमत चोट खाकर चुकानी पड़ी।
अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और घटना की जांच पर टिकी है। लोगों ने स्टेडियम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के अंदर काफी गुस्सा भरा हुआ था।
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