'जंतर-मंतर' नहीं, अब 'रांची मॉडल' बना आंदोलन की पहचान, कोड ऑफ कंडक्ट के साथ 14 दिनों से अनशन पर छात्र
रांची में छात्र 14 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में नौकरी बेचे जाने की सीबीआई जांच की मांग को लेकर गरिमामय और देशभक्तिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। ...और पढ़ें

रांची में आंदोलनरत छात्र। (जागरण)
HighLights
14 दिनों से रांची में छात्रों का गरिमामय आंदोलन जारी।
नौकरी बेचे जाने की सीबीआई जांच की मांग।
स्थानीय लोग कर रहे छात्रों के भोजन का इंतजाम।
दिव्यांशु, रांची। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 14 दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। मंच पर दस बारह छात्र अनशन कर रहे हैं जबकि नीचे युवाओं का बड़ा समूह अपनी मांगों पर नारेबाजी करता है।
नारों में शालीनता और अपनी मांग मानने के लिए सरकार से आग्रह की भाषा रांची के इस आंदोलन को देशभर में चर्चित बना रही है।
हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए नीट मामले से जुड़े आंदोलन में जो गाली-गलौज और हिंंदू प्रतीकों के विरोध में बातें कही गईं उसकी यहां सख्त मनाही है।
मंच पर ही छात्रों ने कोड ऑफ कंडक्ट का बैनर लगा रखा है। जेपीएससी अभ्यर्थी और मंच पर आंदोलन में शामिल रुदेश कुमार पाल ने कहा कि झारखंड एक संस्कारित प्रदेश है।
हमारी मांग है कि नौकरियों के बेचे जाने की जांच सरकार सीबीआई से कराए। हमारे मंच पर कोई नेता राजनीतिक बात नहीं कर सकता।
आंदोलन का उद्देश्य जितना पवित्र है इसके तरीके को भी छात्रों ने उतना ही गरिमामय बना रखा है। झारखंड के छात्र अपने देश से प्रेम करते हैं। मंच पर महात्मा गांधी से लेकर दिशोम गुरु शिबू सोरेन तक की तस्वीरें लगी हैं।
रांची के सामाजिक लोग ही करा रहे भोजन
बुंडू से आई छात्रा बांकी टेटे ने बताया कि यहां छात्रों को भोजन कराने वाले लोग रांची शहर के ही हैं। खाना खिलाते हुए उनका आग्रह रहता है कि हमारा आंदोलन कमजोर नहीं हो।
रांची के युवा कार्यकर्ता भैरव सिंह, शंकर दूबे सुबह के नाश्ते से रात के खाने तक का इंतजाम करने में लगे रहते हैं। बांकी ने बताया कि इन लोगों को न तो किसी मीडिया से बात करनी है न ही अपने किए का प्रचार करना है।
जंतर मंतर नहीं अब रांची मॉडल बना आंदोलन की पहचान
रुदेश पाल ने बताया कि नीट अभ्यर्थियों के समर्थन में वो दिल्ली भी गए थे। लेकिन वहां जिस तरह की भाषा बोली गई वह युवाओं की मर्यादा के विपरीत है।
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रांची और झारखंड की संस्कृति में गाली का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने बताया की सीआइडी जांच पर छात्रों को भरोसा नहीं है। इससे पहले भी सीजीएल परीक्षा की सरकार ने जांच कराई थी।
सरकारी जांच बस मामले को गोल-गोल घुमाने के लिए होती है। ऐसे में सीबीआई पूरे मामले की जांच करे तो छात्रों को न्याय मिलेगा।
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