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    '35 साल पहले रांची में सब ठीक था', एक्सपर्ट ने बताया चाय की खेती के लिए क्या-क्या चाहिए?

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:55 PM (IST)

    डॉ. संयत मिश्रा के अनुसार, चाय की खेती के लिए 20-30°C तापमान और 150-250 सेमी वर्षा वाला गर्म-आर्द्र मौसम आदर्श है, जिसके लिए जून-सितंबर का समय सबसे उप ...और पढ़ें

    डॉ. संयत मिश्रा और मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद की फाइल फोटो।

    डॉ. संयत मिश्रा और मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद की फाइल फोटो।

    HighLights

    1. चाय की खेती को गर्म, आर्द्र मौसम और पर्याप्त वर्षा चाहिए।

    2. रांची में 30-35 वर्ष पूर्व चाय के लिए सुहाना मौसम था।

    जागरण संवाददाता, रांची। बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रांची के डिपार्टमेंट ऑफ हार्टिकल्चर के हेड डॉ. संयत मिश्रा कहते हैं कि चाय की खेती के लिए गर्म और आर्द्र मौसम सबसे उपयुक्त होता है। इसके लिए मुख्य रूप से 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान, 150 से 250 सेमी वार्षिक वर्षा और मानसून का समय (जून से सितंबर) सबसे अच्छा माना जाता है।

    पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच सबसे अच्छा रहता है। वर्ष भर 150 से 250 सेंटीमीटर तक की भारी वर्षा आदर्श है। पानी का जमाव नुकसानदेह होता है, इसलिए ढलान वाली भूमि आवश्यक है। हवा में उच्च नमी (आर्द्रता) और सुबह का कोहरा या बादल चाय की पत्तियों के विकास में मदद करते हैं।

    जून से सितंबर माह के बीच मिट्टी में पर्याप्त नमी होती है, जिससे चाय के नए पौधों या कटिंग को लगाने के लिए यह सबसे सही समय माना जाता है। नियमित अंतराल में वर्षापात हो ताकि मिट्टी और वातावरण में पर्याप्त नमी बनी रहे।

    ये सारी विशेषताएं पूर्व में रांची और आसपास के जिलों में थी, जिस कारण चाय की खेती यहां अच्छी होती थी। जैसे-जैसे मौसम और वातावरण में बदलाव हुआ किसान चाय की खेती से मुंह मोड़ने लगे।

    30 से 35 वर्ष पूर्व रांची का तापमान 30 डिग्री से कम रहता था:

    मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद कहते हैं कि आज से 30 से 35 वर्ष पूर्व तक रांची का मौसम सुहाना रहता था। यहां का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कभी बढ़ा नहीं, यही कारण है कि यहां के वातावरण में पर्याप्त नमी, हरियाली के कारण बादल का संघनन होता था और प्रतिदिन थोड़ी बहुत वर्षा होती थी। उस समय तक शहरीकरण का दौर रफ्तार नहीं पकड़ा था तो मिट्टी में भी पर्याप्त नमी रहती थी।

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    जैसे-जैसे कांक्रीट शहर बनने लगा वैसे वैसे तपिश भी बढ़ी और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार होने लगा। यद्यपि, आज भी स्थिति उतनी विषम नहीं है, आप देख सकते हैं कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षापात कम हुआ है लेकिन रांची और आसपास के जिलों में नियमित अंतराल में वर्षा हो रही है।

    यहां का इकोसिस्टम ही कुछ ऐसा है कि थोड़ी बहुत वर्षापात हाेने के बाद तापमान गिर जाता है और वातावरण में नमी घुल जाती है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और सिमटती हरियाली के कारण पिछले 15 से 20 वर्षों में रांची के मौसम में बदलाव अवश्य आया है।