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    रांची की रेशम बनीं ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कॉलरशिप पाने वाली देश की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 04:27 PM (IST)

    चेहरे पर तेजाब, गर्दन पर चाकू...12 साल पहले लखनऊ में हुआ था रूह कंपा देने वाला एसिड अटैक। तेजाब हमले ने छीना चेहरा पर नहीं टूटा हौसला। अब लंदन स्कूल ऑ ...और पढ़ें

    ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कालरशिप पाने वाली भारत की पहली तेजाब पीड़िता बनीं रेशम।

    ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कालरशिप पाने वाली भारत की पहली तेजाब पीड़िता बनीं रेशम।

    HighLights

    1. भारत की पहली तेजाब पीड़िता, प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कालरशिप विजेता।

    2. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में करेंगी जेंडर, डेवलपमेंट में एमएससी।

    3. शिक्षा को बनाया सशक्तिकरण और बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम।

    विनोद श्रीवास्तव, रांची। रांची की 29 वर्षीय रेशम फातमा की कहानी दर्द, संघर्ष और जीत की ऐसी मिसाल है, जो हजारों लड़कियों को नई उम्मीद देती है। वह ब्रिटेन की प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कालरशिप पाने वाली भारत की पहली तेजाब पीड़िता बनीं हैं।

    वर्ष 1997 में जमशेदपुर में जन्मीं रेशम वर्ष 2014 में लखनऊ में अपने नाना-नानी के साथ रहकर 11वीं की पढ़ाई कर रही थीं। इसी दौरान उनकी मां के रिश्ते के भाई (रेशम की उम्र से 20 वर्ष बड़े) रियाज ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे फातमा ने ठुकरा दिया।

    इससे नाराज रियाज ने फरवरी 2014 में कोचिंग क्लास छोड़ने के बहाने उसे कार में बैठाया और लखनऊ-रायबरेली हाईवे पर ले जाकर सिर पर तेजाब की पूरी बोतल उड़ेल दी। बकौल रेशम,  इसके बाद आरोपित ने उनकी गर्दन पर चाकू रख दिया। उन्होंने साहस दिखाते हुए उसे धक्का दिया और भाग निकलीं।

    एक आटो चालक ने उन्हें सहारा दिया और एक बुजुर्ग ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। चेहरा झुलस गया, जिंदगी अस्पताल और आपरेशन थिएटर तक सिमट गई, लेकिन हौसला नहीं टूटा। 12 वर्ष बाद अब वह ब्रिटेन सरकार की प्रतिष्ठित चिवनिंग स्कालरशिप हासिल कर लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स (एलएसई) पहुंचने जा रही है। 

    खबरें और भी

    2015 में मिला सर्वोच्च राष्ट्रीय वीरता सम्मान  

    विज्ञान संकाय से 12वीं की परीक्षा 87 प्रतिशत अंकों के साथ पास करने वाली रेशम को वर्ष 2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त रूप से बच्चों के सर्वोच्च राष्ट्रीय बाल वीरता सम्मान "भारत अवार्ड" से सम्मानित किया था।

    वर्ष 2018 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से बीएससी (फिजिक्स आनर्स) पूरी की। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी का इरादा बदला और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से पालिटिक्स एंड इंटरनेशनल रिलेशंस में स्नातकोत्तर किया।

    पिता सेकेंड हैंड कार के रहे हैं कारोबारी

    रेशम के अनुसार वह मध्यम वर्गीय परिवार से आती है। 12वीं उत्तीर्ण पिता शमशुल हसन सेकेंड हैंड कारों की खरीद-बिक्री किया करते थे। बढ़ती उम्र के साथ इन दिनों थोड़े बीमार चल रहे हैं। मां गृहिणी हैं।

    तीन बहन-भाइयों में वह सबसे बड़ी है। छोटी बहन इंशा फातमा टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस से रूरल डेवलपमेंट में स्नातकोत्तर कर रही है, जबकि छोटा भाई 10वीं का छात्र है। उनका परिवार जमशेदपुर के मानगो में, जबकि वह अपने पति असगर के साथ रांची के बरियातू में रहती हैं।

    एसिड अटैक के बाद खुद को संभाला, जारी रखी पढ़ाई

    दैनिक जागरण से बातचीत में फातमा ने बताया कि एसिड अटैक के बाद "मेरे सामने दो रास्ते थे। पहला कि स्वयं को घर के किसी कोने में कैद कर लूं, जहां मुझे कोई देख न सके। दूसरा, ऐसा काम करूं कि हर लड़की के लिए मिसाल बन जाऊं।"

    उस विपरीत परिस्थिति में स्वजन और कुछ मित्रों की प्रेरणा तथा प्यार हमारा संबंल बन गया और मैंने दूसरे विकल्प पर फोकस किया। मैंने ठान लिया था, हार नहीं मानूंगी, जहां तक नजर जाएगी, जाऊंगी। मेरी ज़िंदगी के हर कठिन दौर में मेरा परिवार मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है। जब मैं टूट रही थी, तब उन्होंने मेरा साथ दिया, मेरा आत्मविश्वास लौटाया।

    उन्होंने हमेशा मुझे बड़े सपने देखने और हर चुनौती के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। मेरी हर उपलब्धि उनके अटूट प्यार, विश्वास और सहयोग का परिणाम है।

    दो वर्ष पहले मेरी शादी हुई और मेरे पति असगर भी मेरी इस यात्रा का एक मजबूत सहारा बने। उन्होंने मुझे स्कालरशिप के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया और मुझ पर तब भी विश्वास किया।

    चिवनिंग स्कालरशिप के लिए किस तरह से तैयारी की

    चिवनिंग स्कालरशिप सिर्फ अच्छे अकादमिक रिकार्ड के आधार पर नहीं मिलती। इसके लिए नेतृत्व क्षमता, सामाजिक प्रभाव, स्पष्ट सोच और एक मजबूत आवेदन की आवश्यकता होती है। मैंने अपने आवेदन में अपने सामाजिक कार्य, महिलाओं की शिक्षा के लिए किए गए प्रयास, अपनी व्यक्तिगत यात्रा और भविष्य के लक्ष्यों को पूरी ईमानदारी से रखा।

    इंटरव्यू की भी मैंने गंभीरता से तैयारी की और अपने उद्देश्य तथा विज़न को स्पष्ट रूप से रखा। स्कालरशिप की आधिकारिक पुष्टि जून में मिली। सितंबर के दूसरे सप्ताह में लंदन जाने की तैयारी है। वहां लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स एंड पालिटिकल साइंस (एलएसई) में जेंडर, डेवलपमेंट एंड ग्लोबलाइजेशन विषय में एमएससी करूंगी।

    एसिड अटैक ने सिर्फ मेरा चेहरा नहीं, पूरी ज़िंदगी बदल दी

    एसिड अटैक ने सिर्फ मेरा चेहरा नहीं बदला, बल्कि मेरी पूरी ज़िंदगी बदल दी। शुरुआती समय बहुत कठिन था। कई सर्जरी हुईं, मानसिक आघात से गुजरना पड़ा और समाज के तानों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन मैंने तय किया कि मेरी पहचान मेरे निशान नहीं, बल्कि मेरे सपने और मेरा काम होंगे।

    धीरे-धीरे मैंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाया और शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। इलाज और दर्द के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। कई बार अस्पताल और किताबें साथ-साथ चलती थीं।

    लेकिन मैंने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। मुझे पूरा विश्वास था कि शिक्षा मुझे आत्मनिर्भर बनाएगी और समाज में बदलाव लाने की ताकत देगी। घटना के लगभग 12 वर्ष बाद भी अस्पताल से नाता नहीं टूटा है। और बेहतरी की उम्मीद में ट्रीटमेंट आज भी जारी है।  

    समाज में वास्तविक बदलाव का माध्यम बने मेरी शिक्षा

    मेरा उद्देश्य सिर्फ एक डिग्री हासिल करना नहीं है। मैं भारत लौटकर 2023 में जेएनयू में पढ़ाई के दौरान स्थापित अपने संगठन इब्राह फाउंडेशन के माध्यम से मुस्लिम ही नहीं अन्य समुदायों की महिलाओं और वंचित समुदायों के लिए शिक्षा, करियर मार्गदर्शन, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और नीति-निर्माण के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं।

    मैं चाहती हूं कि मेरी शिक्षा समाज में वास्तविक बदलाव लाने का एक माध्यम बने। मेरा सपना है कि अधिक से अधिक लड़कियां उच्च शिक्षा, सिविल सर्विसेज, रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचें।

    बेटों से कहां कम हैं बेटियां

    रेशम के पिता शमशुल कहते हैं, खुदा न करे रेशम के साथ जो हुआ, किसी और बेटी के साथ हो। उसकी स्थिति देख आंखें भर आती थीं, परंतु अपनी हिम्मत और लगन के बल पर उसने जो मुकाम हासिल किया है, उसके पिता होने पर खुद को गर्व होता है।

    उसकी उपलब्धियों को लेकर प्राय: हर दिन स्वजन और शुभचिंतकों के साथ-साथ दर्जनों जाने-अनजाने काल आते हैं। बेटियां आज बेटों से कहां कम हैं।

    आरोपित का भी दर्दनाक अंत

    फातमा कहती है, घटना के एक सप्ताह के अंदर आरोपित रियाज को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसपर पोक्सो सहित अन्य धाराएं लगीं। घटना के ही वर्ष दिसंबर में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।