झारखंड में सरहुल की धूम: पाहन की भविष्यवाणी— 'इस वर्ष झमाझम होगी बारिश, अन्न से भरे रहेंगे भंडार'
रांची में महापर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया। हातमा सरना स्थल पर मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने पूजा-अर्चना कर भविष्य की सुखद तस्वीर पेश की। उन्होंने घड़े के ...और पढ़ें

रांची में सरहुल का उल्लास: चंपई सोरेन भी हुए शामिल। (फोटो: मनोरंजन)
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रांची में महापर्व सरहुल धूमधाम से मनाया गया।
पाहन ने घड़े के पानी से अच्छी वर्षा का अनुमान लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने राज्य की खुशहाली मांगी।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड के महापर्व सरहुल के अवसर पर पूरी राजधानी प्राकृतिक रंगों और आस्था के सैलाब में डूबी नजर आई। प्रकृति और पुरुष के अटूट बंधन के इस पर्व पर पाहन (पुजारी) ने भविष्य की सुखद तस्वीर पेश की है।
सरहुल शोभा यात्रा के उद्गम स्थल हातमा (सरना टोली) स्थित सरना स्थल पर पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की गई।
मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने सरई (सखुआ) के पेड़ों की छांव में प्रकृति और देवी-देवताओं का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने निम्न बलि और अर्पण के माध्यम से लोक कल्याण की कामना की।
- इष्ट देवता: सफेद मुर्गा अर्पित किया गया।
- ग्राम देवता: रंगवा मुर्गा की बलि दी गई।
- जल देवता: लाल मुर्गा अर्पित किया गया।
- पुरखों (पूर्वजों) की स्मृति: रंगीली मुर्गा चढ़ााया गया।
- बुरी आत्माओं से रक्षा: काली मुर्गी अर्पित की गई।
इसके साथ ही पारंपरिक चावल की हड़िया (तपान) का अर्पण कर यह प्रार्थना की गई कि प्रकृति मनुष्य के रहने के अनुकूल और सौंदर्यपूर्ण बनी रहे।

पाहन की भविष्यवाणी: 'जल स्तर है लबालब'
सरहुल के केंद्र में रहने वाली 'घड़े के पानी' की परंपरा को देखते हुए जगलाल पाहन ने इस वर्ष के लिए मानसून का पूर्वानुमान साझा किया। उन्होंने बताया कि पूजा के लिए रखे गए घड़े में पानी का स्तर पूरी तरह भरा हुआ है। यह शुभ संकेत है कि इस वर्ष अच्छी वर्षा होगी। खेतों में धान की फसल लहलहाएगी और किसानों के भंडार कभी खाली नहीं होंगे। वर्षा भी 'भंडार कोने' (शुभ दिशा) से आएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन हुए शामिल
इस पावन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी पूजा में शामिल हुए। उन्होंने सरना मां से राज्य की खुशहाली की दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की संस्कृति ही इसकी पहचान है और यह राज्य सदैव सुखी, समृद्ध और संपन्न बना रहे।
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सांस्कृतिक उल्लास और खिचड़ी महाप्रसाद
पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित सभी भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। इसके उपरांत, सरना टोली के ग्रामवासी अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों— मांदर, नगाड़ा और ढाक की थाप पर थिरकते हुए शोभा यात्रा में शामिल हुए। पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते हुए पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।
