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    पारा शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को निर्देश: 50% पदों पर करें सीधी नियुक्ति, नियमितीकरण की मांग खारिज

    Updated: Thu, 07 May 2026 09:00 PM (GMT+05:30)

    सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को पारा शिक्षकों को नियमित करने से इनकार कर दिया, लेकिन सहायक शिक्षक/आचार्य के 50% आरक्षित पदों पर विशेष रूप से उनसे आवे ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को निर्देश: 50% सहायक शिक्षक पदों पर पारा शिक्षकों की नियुक्ति करें।

    सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को निर्देश: 50% सहायक शिक्षक पदों पर पारा शिक्षकों की नियुक्ति करें।

    HighLights

    1. पारा शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।

    2. 50% सहायक शिक्षक पदों पर पारा शिक्षकों की नियुक्ति का निर्देश।

    3. झारखंड सरकार को वार्षिक भर्ती कैलेंडर लागू करने का आदेश।

    राज्य ब्यूरो, रांची। पारा शिक्षकों के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए विशेष रूप से पारा शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित करने की अधिसूचना जारी करे।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने झारखंड के सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत कार्यरत सुनील कुमार यादव सहित पारा शिक्षकों की याचिकाओं निपटारा करते हुए उक्त निर्देश दिया।

    अदालत ने पारा शिक्षकों को नियमितीकरण देने से इंकार कर दिया, लेकिन राज्य को झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती नियमावली, 2012 और झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक आचार्य संवर्ग नियमावली, 2022 के तहत पहले से बनाए गए वैधानिक भर्ती तंत्र को लागू करने और समय-समय पर इसका पालन करने का निर्देश दिया।

    शिक्षकों की भारी कमी उजागर

    अदालत ने अपने निर्णय में दर्ज किया गया कि झारखंड के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। पारा शिक्षकों ने अदालत को बताया था कि झारखंड के 24 जिलों के सरकारी स्कूलों में लगभग 1.5 लाख सहायक शिक्षकों की कमी है।

    आदेश में एसएसए के तहत स्वीकृत पारा-शिक्षक पदों का भी जिक्र किया गया, जिसमें प्राथमिक स्कूलों के लिए 83,595 पद और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए 37,133 पद शामिल हैं।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मौजूदा नियमों के तहत आयोजित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 7,300 से अधिक पारा शिक्षकों की पहले ही नियुक्ति हो चुकी है। इसमें आरक्षित पारा-शिक्षक श्रेणी के तहत 3,304 नियुक्तियां और खुली श्रेणी में 3,997 नियुक्तियां शामिल थीं।

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    वार्षिक भर्ती कैलेंडर अनिवार्य

    सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित उपलब्ध रिक्तियों का 50 प्रतिशत भरने का कार्य करे। अदालत ने रिक्तियों के निर्धारण, विज्ञापन जारी करने, मेरिट सूची तैयार करने और नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए समय-सीमा तय की।

    चालू शैक्षणिक वर्ष के लिए, राज्य को चार सप्ताह के भीतर रिक्तियों का निर्धारण करने और विज्ञापन की तिथि से 10 सप्ताह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

    अदालत ने कहा कि हर साल 31 मार्च तक रिक्तियां निर्धारित की जाए और 50 प्रतिशत पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित की जाए। 31 मई तक चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

    शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार पर अदालत की टिप्पणी

    पीठ ने कहा कि राज्य को शिक्षा में अस्थायी प्रबंधन से दूर हटना चाहिए और शिक्षण सेवाओं में स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि रोजगार की सुरक्षा की भावना किसी भी सेवा में दक्षता बढ़ाने के लिए अनिवार्य शर्त है, और शिक्षा भी इससे अलग नहीं है।

    निर्णय में अदालत ने आगे कहा गया कि अब समय आ गया है कि कार्यपालिका समय-समय पर प्रदर्शन लेखा परीक्षण करे और सार्वजनिक रोजगार में अस्थायीवाद को समाप्त करे। अदालत ने यह भी कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षा को मजबूत करने के लिए अस्थायी प्रबंधन के बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की आवश्यकता होती है।

    अदालत ने कहा कि पारा शिक्षकों को मौजूदा नियमों के तहत भागीदारी और विचार का अधिकार है, लेकिन नियमितीकरण का कोई स्वत: अधिकार नहीं है। प्रार्थी सुनील कुमार यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि 15 साल से अधिक समय से वह सेवा दे रहे हैं और टेट भी पास है।

    ऐसे में उनकी सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति की जाए। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।