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    झारखंड में खत्म हुआ आतंक का एक चैप्टर, कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत; रंगदारी नेटवर्क को बड़ा झटका

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:30 AM (IST)

    कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत से झारखंड के रंगदारी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। वह विभिन्न आपराधिक गिरोहों से गठजोड़ कर रंगदारी वसूलता था और अव ...और पढ़ें

    सुजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)

    सुजीत सिन्हा। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सुजीत सिन्हा की मौत से रंगदारी नेटवर्क को बड़ा झटका।

    2. विभिन्न गिरोहों से गठजोड़ कर रंगदारी वसूलता था सिन्हा।

    3. अवैध हथियारों की आपूर्ति में भी सक्रिय था गैंगस्टर।

    प्रिंस श्रीवास्तव, रांची। कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत के साथ ही झारखंड के रंगदारी नेटवर्क के एक ऐसे चेहरे का अंत हो गया, जिसने पिछले कई वर्षों में अपराध की दुनिया में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए लगातार अलग-अलग आपराधिक गिरोहों से गठजोड़ किया।

    पुलिस रिकॉर्ड और जांच में सामने आ चुका है कि सुजीत सिन्हा हमेशा उसी गिरोह के साथ खड़ा होता था, जिसका उस समय अपराध जगत में दबदबा अधिक होता था।

    जानकारी के अनुसार, झारखंड में रंगदारी के संगठित नेटवर्क के विस्तार के दौरान सुजीत सिन्हा ने सबसे पहले कुख्यात अपराधी अमन साहू से हाथ मिलाया।

    दोनों के गठजोड़ के बाद कई कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि अमन साहू के नेटवर्क के जरिए कई इलाकों में रंगदारी का समानांतर तंत्र तैयार किया गया था।

    अमन साहू के एनकाउंटर के बाद सुजीत सिन्हा ने अपना ठिकाना और रणनीति दोनों बदल दिए। पुलिस के अनुसार, उसने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संपर्क बढ़ाया और उनके नेटवर्क का इस्तेमाल अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए किया।

    तैयार किया नया गिरोह

    एक नया गिरोह तैयार किया। बाद के दिनों में जब धनबाद क्षेत्र में प्रिंस खान का दबदबा बढ़ा तो सुजीत सिन्हा ने उससे भी गठजोड़ कर लिया। पुलिस के अनुसार, प्रिंस खान कारोबारियों से रंगदारी की मांग करता था। यदि कोई कारोबारी रंगदारी देने से इनकार करता था तो सुजीत सिन्हा अपने गिरोह के शूटर उपलब्ध कराता था।

    इन्हीं शूटरों के माध्यम से फायरिंग, जानलेवा हमला और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता था। यही वजह रही कि झारखंड के कई जिलों में दोनों गिरोहों का नाम कारोबारियों के बीच दहशत का पर्याय बन गया था।

    रांची भी सुजीत सिन्हा के नेटवर्क से अछूता नहीं रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शहर के कई कारोबारियों से उसके गिरोह द्वारा रंगदारी की मांग की जा चुकी थी। कारोबारियों को धमकी भरे फोन, इंटरनेट कॉल और शूटरों के जरिए दबाव बनाने की कई घटनाएं जांच में सामने आई थीं।

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    सुजीत सिन्हा गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा अभिषेक राय बाद में उससे अलग होकर अमन साहू के साथ जुड़ गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि झारखंड के अपराध जगत में गिरोहों के बीच बदलते गठजोड़ और वर्चस्व की लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम था।

    पाकिस्तान कनेक्शन

    पुलिस जांच में यह खुलासा भी हो चुका है कि सुजीत सिन्हा अवैध हथियारों की आपूर्ति के बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पाकिस्तान से हथियार मंगवाने वाले नेटवर्क के संपर्क में था और इन हथियारों को अपने गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था।

    इस संबंध में पुलिस को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले थे। कभी रांची और आसपास के जिलों में अमन साहू और सुजीत सिन्हा का नाम सुनते ही कारोबारी और ठेकेदार दहशत में आ जाते थे। लेकिन लगातार पुलिस कार्रवाई, गैंगवार, गिरफ्तारियों और एनकाउंटर की घटनाओं के बाद दोनों के नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा।

    अब सुजीत सिन्हा की मौत के बाद माना जा रहा है कि झारखंड में उसके गिरोह का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है और रंगदारी के उस पुराने नेटवर्क को भी बड़ा झटका लगा है, जिसने वर्षों तक राज्य के कई जिलों में भय का माहौल बना रखा था।

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