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    रांची के अपर बाजार में 608 दुकानें खाली कराने का नोटिस, उजड़ने की कगार पर 10 हजार लोगों का रोजगार

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:45 PM (IST)

    रांची नगर निगम ने अपर बाजार की 608 दुकानों को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिससे व्यापारियों में दहशत है। यह कदम 10,000 से अधिक लोगों की आजीविका क ...और पढ़ें

    रांची के अपर बाजार में 608 दुकानें खाली कराने का नोटिस ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    रांची के अपर बाजार में 608 दुकानें खाली कराने का नोटिस ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    HighLights

    1. रांची नगर निगम ने 608 दुकानों को खाली करने का नोटिस दिया।

    2. अपर बाजार में 10 हजार से अधिक लोगों का रोजगार खतरे में।

    3. व्यापारी सरकार से हस्तक्षेप और व्यावहारिक समाधान की मांग कर रहे।

    संजय कृष्ण, रांची। राज्य के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्र पर रांची नगर निगम की नोटिस के बाद व्यापारी दहशत में हैं। निगम ने 608 दुकानों को खाली करने का फरमान जा कर दिया है। निगम यहां मल्टीस्टोरीज बिल्डिंग बनाए। 

    हालांकि आज तक निगम ने इस क्षेत्र में सुविधा तो कुछ नहीं दिया, वसूली जरूर करता रहा। बारिश में अपर बाजार जलमग्न हो जाता है। 

    1940 में दी थी जमीन

    रांची नगर निगम किरायेदार संघ के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि अपर बाजार सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है। यहां 1940 से दुकानें चल रही हैं। पहले जमीन दी गई थी और व्यापारियों ने अपने हिसाब से अपनी दुकानें बना ली। अब तीसरी पीढ़ी कारोबार कर रही है। 

    कुछ व्यापारियों का कहना है कि इस जमीन को रातू महाराज ने ही निगम को दिया था व्यापारियों को बसाने के लिए। हालांकि अब इसका कागज खोजना भी मुश्किल है। अब निगम इन दुकानों को ध्वस्त कर बहुमंजिली दुकानें बनाएगा, लेकिन व्यापारियों कहते हैं कि जरूरी नहीं कि जिनकी दुकानें इस जद में आएंगी, उन्हें पुन: आवंटित ही करेगा। 

    वैसे भी, यह पांच-सात साल का मामला है। पांच-सात साल तक व्यापारी क्या करेंगे? कहां जाएंगे और उनकी आजीविका का क्या होगा? निगम के अधिकारी कह रहे हैं, आप वैकल्पिक व्यवस्था की कीजिए।

    10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार

    अपर बाजार में 600 से अधिक दुकानें है। इससे 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। हर दुकान में दो से लेकर चालीस लोग काम करते हैं। इसी तरह अप्रत्यक्ष रूप से ठेले वाले और अन्य लोगों का रोजी-रोजगार भी इसी पर निर्भर है। नगर निगम के इस रवैये से व्यवसायियों में भय का माहौल है। 

    चेंबर सह सचिव नवजोत अलंग कहते हैं कि अपर बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। नगर निगम को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। मुख्यमंत्री अपने अथक प्रयास से व्यापार उद्योग के प्रति सकारात्मक माहौल बनाकर देश-विदेश से निवेशकों को आमंत्रित कर रहे हैं।

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    वहीं एक तरफ नगर निगम राज्य में व्यापार कर रहे व्यवसाय को ठप करने में लगा हुआ है। नवजोत अलंग कहते हैं, सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर व्यापारियों के हितों की रक्षा करनी चाहिए। एक सवाल यह भी है कि छह सौ से अधिक दुकानों के दुकानदार करोड़ों का लोन लेकर कारोबार कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है, लोन कैसे चुकता होगा।

    भवन खाली करने का नोटिस एक तुगलकी फरमान

    नगर निगम की ओर व्यवसायियों को भवन खाली करने का नोटिस एक तुगलकी फरमान है। यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। झारखंड चेंबर इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करता है। मुख्यमंत्री और नगर विकास विभाग के मंत्री से आग्रह करता है कि नोटिस को निरस्त करें और इस संबंध में झारखंड चेंबर से वार्ता कर समस्या का निदान करे।

    रांची नगर निगम के अधिकारियों से भी आग्रह कि वह व्यापारियों के साथ बैठकर बातचीत करें। साथ ही बकरी बाजार में मल्टी स्टोरेज पार्किंग का निर्माण हो, ताकि अपर बाजार की पार्किंग की समस्या का समाधान हो सके। झारखंड चेंबर पिछले कई सालों से बकरी बाजार में पार्किंग बनाने का आग्रह करती रही है, लेकिन अभी तक उस दिशा को कोई भी पहल नहीं की गई है।आदित्य मल्होत्रा, चेंबर अध्यक्ष

    झारखंड के विकास में अपर बाजार का बड़ा योगदान है। राजस्व भी बड़े स्तर पर दे रहा है। यहां के व्यवसायियों को उजाड़ने नहीं दिया जाएगा। रांची नगर निगम को कई वर्षों से बकरी बाजार में टू लेयर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव दिया गया। इस दिशा में अभी तक नहीं हुआ है। नगर निगम पहले बकरी बाजार में टू लेयर पार्किंग का निर्माण करे। - पवन शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, चेंबर

    अपर बाजार रांची की व्यापारिक पहचान है और यहां वर्षों से हजारों व्यापारी अपना व्यवसाय कर रहे हैं। नगर निगम को व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी कार्रवाई से पहले उनसे संवाद करना चाहिए। बिना समुचित वैकल्पिक व्यवस्था के इस तरह के नोटिस से व्यापारियों में असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। सरकार को इस पूरे मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र समाधान निकालना चाहिए, ताकि व्यापार और रोजगार दोनों प्रभावित न हों।

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