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    साहिबगंज में बरहड़वा स्टेशन पर मानव तस्करी का भंडाफोड़, RPF ने 4 नाबालिगों को कराया मुक्त; दो तस्कर गिरफ्तार

    Updated: Tue, 05 May 2026 02:11 AM (IST)

    आरपीएफ ने बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर छापेमारी कर मानव तस्करी का भंडाफोड़ किया और चार नाबालिग बच्चों को बचाया। ...और पढ़ें

    साहिबगंज में बरहड़वा स्टेशन पर मानव तस्करी का भंडाफोड़

    साहिबगंज में बरहड़वा स्टेशन पर मानव तस्करी का भंडाफोड़

    HighLights

    1. आरपीएफ ने बरहड़वा स्टेशन पर मानव तस्करी रोकी।

    2. चार नाबालिग बच्चों को तस्करों से मुक्त कराया गया।

    3. दो आरोपी गिरफ्तार, मजदूरी के लिए ले जा रहे थे।

    संवाद सहयोगी, बरहड़वा (साहिबगंज)। बरहड़वा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की टीम ने रविवार की रात छापेमारी कर दो मानव तस्करों को चार नाबालिग बच्चों के साथ पकड़ा। गिरफ्तार आरोपितों में बरहेट के बाेरबांध निवासी मनोज साह व सनमनी निवासी मो अताउल अंसारी शामिल हैं। 

    रविवार की रात आरपीएफ इंस्पेक्टर संजीव कुमार को गुप्त सूचना मिली कि दो व्यक्ति चार नाबालिग लड़कों को मजदूरी के लिए अन्य राज्यों (अंबाला कैंट, हरियाणा एवं सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) ले जा रहे हैं। सभी ट्रेन संख्या 15743 अप (फरक्का एक्सप्रेस) से जाने के लिए स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर हैं। 

    दो वयस्क व्यक्तियों के साथ चार नाबालिग बरामद

    इसके बाद गठित टीम ने सर्च अभियान के दौरान दो वयस्क व्यक्तियों के साथ चार नाबालिगों को पाया। सभी नाबालिग 14-15 साल के बरहेट के रहने वाले हैं। नाबालिग बच्चों में से तीन ने पूछताछ में बताया कि उन्हें बरहेट के बारोबांध निवासी मनोज साह ने लगभग एक सप्ताह पूर्व उनके घर जाकर उन्हें अंबाला कैंट स्थित मेडिकल दुकान में काम दिलवाने का प्रलोभन दिया। 

    कहा कि उसे 11-12 हजार रुपये प्रति माह मजदूरी मिलेगी। गरीबी के कारण वे उसके साथ जाने को तैयार हो गए। वहीं, एक नाबालिग ने बताया कि बरहेट के सनमनी निवासी मो अताउल अंसारी ने उसे सहारनपुर (उ.प्र.) में होटल में कार्य दिलाने के नाम पर नौ हजार रुपये प्रति माह का प्रलोभन दिया एवं यात्रा की व्यवस्था की। 

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    मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में ले जा रहे थे 

    इसके बाद पूछताछ के दौरान दोनों व्यक्तियों मनोज साह एवं मो अताउल अंसारी ने स्वीकार किया कि वे इन नाबालिग बच्चों को मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में ले जा रहे थे तथा इसके बदले उन्हें प्रत्येक बच्चे पर लगभग आठ प्रतिशत कमीशन प्राप्त होता। 

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बच्चों को राज्य के बाहर ले जाने हेतु पंचायत अथवा श्रम विभाग से कोई वैधानिक पंजीकरण/अनुमति नहीं ली गई है तथा अपनी गलती स्वीकार की। 

    जीआरपी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत

    आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि यह काम प्रथम दृष्टया मानव तस्करी, बाल श्रम एवं अन्य संबंधित विधिक प्रावधानों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इस संबंध में आरपीएफ पोस्ट बड़हरवा ने जीआरपी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत की है। 

    मौके पर एएसआई विश्वनाथ टुडू , एएसआइ सुरेश पासवान, कांस्टेबल अमरेश कुमार, एलसीटी अर्पण कुमारी, एलसीटी काजल कुमारी एवं बाल संरक्षण संस्था (बाल मंथन) की प्रतिनिधि आराधना मंडल मौजूद थी।