पीएम पोषण योजना में साहिबगंज सबसे निचले पायदान पर, इसी जिले से विधायक हैं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
PM Poshan (मध्याह्न भोजन) के क्रियान्वयन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जिला साहिबगंज सबसे निचले पायदान पर है। ...और पढ़ें

स्कूल में मध्याह्न योजन करते बच्चे। (प्रतीकात्मक फोटो)
संवाद सहयोगी, जागरण, बरहड़वा (साहिबगंज)। स्कूलों में मध्याह्न के समय पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण मध्याह्न योजना) में झारखंड में साहिबगंज जिला सबसे निचले पायदान पर है। साहिबगंज का यह हाल तब है, जब राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यहां के बरहेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं।
साहिबगंज के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले शत-प्रतिशत बच्चों को मिड-डे मील का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका खुलासा विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की वित्तीय वर्ष 2025-26 की राज्यस्तरीय रिपोर्ट में हुआ है। जारी रिपोर्ट में साहिबगंज जिला पूरे राज्य में सबसे निचले पायदान पर है।
साहिबगंज जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 2,15,955 नामांकित बच्चों में से केवल 1,38,965 बच्चों को ही मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा सका। पूरे जिले में महज 64 प्रतिशत बच्चों को ही मिड-डे मील मिल पाया। रिपोर्ट के अनुसार पूरे राज्य में भी स्थिति चिंताजनक रही, लेकिन साहिबगंज जिला भोजन सुरक्षा और पोषण के लक्ष्यों से काफी पीछे है। इस कमी के कारण अनेक बच्चे पौष्टिक भोजन से वंचित रहे, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।
अप्रैल-2026 में 68,510 बच्चों को नहीं मिला मिड-डे मील
जिले के सरकारी स्कूलों में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में कक्षा एक से आठ तक करीब 2,05,802 बच्चों का नामांकन हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, बीते माह अप्रैल-2026 में इनमें से 1,37,292 बच्चों को ही मिड-डे मील योजना का लाभ मिल सका, जबकि 68,510 बच्चे मिड-डे मील से वंचित रहे।
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अनियमित उपस्थिति व निगरानी की कमी
स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा संचालित मिड-डे मील योजना का लाभ शत-प्रतिशत बच्चों तक नहीं पहुंच पाने का एक बड़ा कारण बच्चों की नियमित उपस्थिति नहीं होना भी है। इसके साथ ही बच्चों के आधार से जुड़े सत्यापन में देरी, खाद्यान्न आपूर्ति में अक्सर विलंब होना भी बड़ी समस्या है।
स्थानीय स्तर पर स्कूलों की समुचित निगरानी नहीं हो पाने से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है। स्कूलों में रसोइयों की कमी तथा कई आधारभूत सुविधाओं का अभाव भी समस्या का कारण है।
स्कूलों की पड़ताल में मिलीं खामियां
स्कूलों में मिड-डे मील की गड़बड़ियों की बातें अक्सर सामने आती रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के नवंबर और दिसंबर माह के दौरान जागरण की पड़ताल में कई मामले सामने आए। 11 दिसंबर को बरहड़वा प्रखंड के उमवि बसना में 139 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन दोपहर डेढ़ बजे के करीब वहां महज 16 बच्चे ही मौजूद मिले।
मवि जमालपुर में 355 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, लेकिन दोपहर दो बजे वहां लगभग 200 बच्चे ही थे। आठ दिसंबर की दोपहर दो बजे उमवि लालमाटी की पड़ताल में स्कूल में केवल 150 बच्चे मिले, जबकि 529 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी। स्कूल में कुल 688 बच्चों का नामांकन था। उस दिन स्कूल में मिड-डे मील नहीं बना था और बच्चों को केला दिया गया।
प्रावि बरारी में दोपहर डेढ़ बजे स्कूल में 30 बच्चे दिखे। 54 बच्चों के नामांकन में 50 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी। बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर एक-एक कच्चा अंडा दे दिया गया। इसके अलावा अन्य स्कूलों की पड़ताल में भी मिड-डे मील में गड़बड़ी की आशंका सामने आई। कई स्कूलों में केवल मिड-डे मील की रिपोर्टिंग होती दिखी।
प्रखंडवार स्कूलों में नामांकन व एमडीएम आच्छादन के आंकड़े :
| प्रखंड | कक्षा 1 से 5 नामांकन | एमडीएम | कक्षा 6 से 8 नामांकन | एमडीएम |
|---|---|---|---|---|
| बरहेट | 14,463 | 10,194 | 6,346 | 4,173 |
| बरहड़वा | 25,795 | 16,972 | 14,420 | 8,639 |
| बोरियो | 10,974 | 7,878 | 4,836 | 2,958 |
| मंडरो | 8,585 | 6,217 | 3,637 | 2,329 |
| पतना | 9,128 | 5,998 | 3,880 | 2,379 |
| राजमहल | 19,300 | 12,998 | 11,221 | 6,421 |
| साहिबगंज | 12,094 | 8,617 | 6,367 | 4,181 |
| तालझारी | 7,939 | 5,655 | 4,035 | 2,570 |
| उधवा | 28,287 | 20,189 | 14,495 | 8,894 |
| कुल | 1,36,565 | 94,718 | 69,237 | 42,574 |
क्या कहते हैं पदाधिकारी
स्कूलों में नामांकन के आधार पर बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है। इसका असर मिड-डे मील पर पड़ रहा है। इसे लेकर संबंधित बीईईओ को गांव-मुहल्लों में जाकर अभिभावकों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। उपस्थिति में सुधार होते ही सभी बच्चों को मिड-डे मील का लाभ मिल सकेगा।- डॉ. दुर्गानंद झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, साहिबगंज