Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    साहिबगंज में ग्रामीणों ने रोका कब्रिस्तान घेराबंदी का काम, थाना प्रभारी ने कागजात समेत दोनों पक्षों को बुलाया थाने

    Updated: Sat, 27 Dec 2025 07:02 AM (IST)

    साहिबगंज के राजमहल प्रखंड के सरकंडा में कब्रिस्तान की घेराबंदी का काम ग्रामीणों ने रोक दिया। ग्रामीणों का दावा है कि यह जमीन अनाबादी है और उनके आवागमन ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    HighLights

    1. सरकंडा में कब्रिस्तान घेराबंदी का काम रोका गया।

    2. ग्रामीणों ने जमीन को अनाबादी बताया, आवागमन का मार्ग।

    3. पुलिस ने दोनों पक्षों को कागजात सहित थाने बुलाया।

    संवाद सहयोगी, तालझारी (साहिबगंज)। राजमहल प्रखंड के सरकंडा में कब्रिस्तान की घेराबंदी निर्माण कार्य को स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को बंद करा दिया है। इसकी जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी हसनैन अंसारी पहुंचे और दोनों पक्ष के लोगों को कागजात लेकर थाना बुलाया। हालांकि, कोई भी पक्ष थाना नहीं पहुंचा। इस कारण कोई निर्णय नहीं हो सका।

    समेकित जनजातीय विकास अभिकरण विभाग की ओर से राजमहल प्रखंड के सरकंडा में करीब 25 लाख रुपये की लागत से दाग नंबर 265 में स्थित कब्रिस्तान की आठ बीघा दो कट्ठा तीन धूर जमीन की घेराबंदी का कार्य होना है। शुक्रवार को नींव के लिए बैक हो लोडर मशीन से गड्ढा खोदने का काम चालू कराया गया। यह देख स्थानीय ग्रामीण पहुंच गए और कार्य का विरोध कर दिया। कागजात दिखाने की मांग करने लगे।

    ग्रामीणों ने कहा कि झारखंड सरकार के नक्शा में उक्त जमीन अनाबादी के रूप में दर्ज है। ऐसे में इसकी घेराबंदी कैसे की जा सकती है। दशकों से इस जमीन से पचकठिया गांव के सैकड़ों परिवार आवागमन करते हैं। वहीं, दूसरे पक्ष के असलम अंसारी ने कहा कि उक्त जमीन उनके परदादा नखराज मियां के नाम से दर्ज है। इसलिए कब्रिस्तान की घेराबंदी में ग्रामीणों की ओर से किया जा रहा विरोध निराधार है।

    मोकिमपुर मौजा में जमाबंदी नंबर 493 के अंदर दाग संख्या 265 में आठ बीघा दो कट्ठा तीन धूर जमीन है जो झारखंड सरकार के नक्शा में अनाबादी के रूप में दर्ज है। अनाबादी जमीन को कब्रिस्तान बताकर घेराबंदी किया जाना उचित नहीं है। इसका विरोध ग्रामीण कर रहे हैं। यदि जमीन की संवैधानिक अधिकार उनके पास है तो इसका आधिकारिक कागजात दूसरे पक्ष की ओर से ग्रामीणों को दिखाया जाना चाहिए। -प्रकाश यादव, ग्रामीण


    खबरें और भी

    यह कब्रिस्तान है इसका कोई कागजात नहीं है। इसके बावजूद इसे कब्रिस्तान बताकर घेराबंदी की जा रही है। हम सब ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। यदि कागजात है तो वे ग्रामीणों को दिखाएं। अनाबादी जमीन को कब्रितान बताकर घेरा जाना कहीं से भी उचित नहीं है। -दिगंबर चौरसिया, ग्रामीण


    दशकों से यह जमीन सरकारी है। इसका उपयोग स्थानीय लोग आने जाने के लिए रास्ता के रूप में करते आ रहे हैं। अब इसकी घेराबंदी किया जाना ग्रामीणों को आवागमन के लिए रास्ता बंद करना है। वे इसका विरोध कर रहे हैं। कार्य से संबंधित कोई सरकारी बोर्ड भी नहीं लगा है। ग्रामीण यह कैसे समझेंगे कि यह काम सरकार की योजना से हो रहा है अथवा कोई इस जमीन को दखल करना चाहते हैं। -भीम महलदार, ग्रामीण


    मोकिमपुर मौजा में जमाबंदी नंबर 493 के अंदर दाग संख्या 265 में आठ बीघा दो कट्ठा तीन धूर जमीन है जो उनके परदादा नखराज मियां के नाम से खतियानी पर्चा में दर्ज है। उनके परदादा ने मुस्लिमों के शव को दफनाने के लिए उक्त जमीन को कब्रिस्तान के रूप में दान कर दिया था। अब इसे आइटीडीए से घेराबंदी का काम किया जाना है। उनके पास आधिकारिक कागजात है। -असलम अंसारी, पक्षकार