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    पश्चिम बंगाल में हो रहा सत्ता परिवर्तन, झारखंड के अवैध कारोबार और राजनीति पर दिखेगा असर

    Updated: Mon, 04 May 2026 03:31 PM (IST)

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन से झारखंड के अवैध कारोबार और गतिविधियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। ...और पढ़ें

    हेमंत सोरेन। (सोशल मीडिया)

    हेमंत सोरेन। (सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. पश्चिम बंगाल सत्ता परिवर्तन से अवैध कारोबार पर असर।

    2. झारखंड के सीमावर्ती जिलों में तस्करी पर लगेगी रोक।

    3. भाजपा सरकार से सीमा सुरक्षा बल को मिलेगा बल।

    नव कुमार मिश्रा, (साहिबगंज)। 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजे से 15 वर्षों बाद पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है लेकिन अवैध कारोबार और गतिविधियों पर सत्ता परिवर्तन का सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    ऐसे गतिविधियों में शामिल लोगों का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है और अभी से उसके अंदर डर देखा जा सकता है। वजह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता मिली है और भाजपा के एजेंडे में यह कारोबार देश हित में नहीं है और इसी बात को लेकर सत्ता परिवर्तन को जनता की स्वीकृति मिली है।

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर झारखंड में भी पड़ सकता है। महागठबंधन की सरकार अब चारों तरफ से घिर गया है।

    पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से जुड़े ज्यादातर अवैध कारोबार का झारखंड सुरक्षित गलियारा रहा है और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार द्वारा संरक्षित था।

    झारखंड के दस जिले ऐसे हैं जो अपनी सीमाओं को पश्चिम बंगाल से साझा करती है। साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम ये जिले पूर्व में पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित हैं और दोनों राज्यों के बीच परिवहन और सीमा-पार गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    पशु तस्करी पर लगेगा लगाम

    झारखंड के साहिबगंज,पाकुड़, दुमका तथा अन्य सीमावर्ती जिलों के रास्ते पशु तस्करों को सुरक्षित पश्चिम बंगाल और वहां से बांग्लादेश का सफर करना आसान नहीं होगा।

    अब सीमावर्ती जिलों के साथ साथ भारत बांग्लादेश सीमा पर भी कड़ी चौकसी होगी। बीएसएफ को भी भाजपा सरकार के आने से कार्रवाई में बल मिलेगा।

    पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा का बड़ा हिस्सा नदियों और दुर्गम क्षेत्रों वाला है, जिसका फायदा तस्कर उठाते हैं।

    सीमा सुरक्षा बल अक्सर सीमा पर तस्करी की कोशिशों को नाकाम करता है। अप्रैल 2025 में मालदा जिले में बीएसएफ ने 8 मवेशियों को छुड़ाया था जो झारखंड के रास्ते वहां पहुंचा था।

    सीमा पार तस्करी

    भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में है इससे सीमा पार तस्करी में कमी की उम्मीद है, क्योंकि वे सुरक्षा को कड़ी करने पर जोर देते रहे हैं।

    अवैध बालू खनन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की अवैध तस्करी को भी, सत्ता में आने वाली नई सरकार के द्वारा कड़ाई से रोका जा सकता है।

    झारखंड में सत्तारूढ़ दल के कई दिग्गज नेता इस अवैध कारोबार में सिंडिकेट चला रहे हैं। बालू और पत्थर उत्खनन में झारखंड और तृणमूल का गठजोड़ खत्म हो सकता है।

    लिहाजा ऐसे में झारखंड की राजनीति में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर पड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि हवा का रुख देखकर आगे का सफर तय करने पर विचार हो सकता है।