सरायकेला: सुस्त रफ्तार पुल निर्माण का डायवर्जन बना 'डेथ ट्रैप', अब तक 40 हादसों में 8 लोगों ने गंवाई जान
सरायकेला के चिलगु-शहरबेड़ा फोरलेन पर पुल निर्माण की धीमी गति से बना डायवर्जन अब जानलेवा बन गया है। अब तक 40 से अधिक हादसों में 8 लोगों की मौत हो चुकी ...और पढ़ें

पुल निर्माण का डायवर्जन बना डेथ ट्रैप
HighLights
सरायकेला में पुल निर्माण का डायवर्जन बना जानलेवा।
अब तक 40 से अधिक हादसों में 8 लोगों की मौत।
सुरक्षा उपायों की अनदेखी, निर्माण कार्य में देरी।
परमेश्वर साव, कपाली। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत चिलगु और शहरबेड़ा के बीच फोरलेन सड़क के साइड टू लेन सड़क पर पुल निर्माण की सुस्त रफ्तार अब लोगों की जान ले रही है। जिस पुल का निर्माण सुरक्षित और सुगम आवागमन के लिए शुरू किया गया था, उसी परियोजना का डायवर्जन आज हादसों का पर्याय बन गया है।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद न निर्माण कार्य में तेजी दिख रही है और न ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। अक्टूबर 2025 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की देखरेख में रामकृपाल कंस्ट्रक्शन ने करीब 3.75 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण शुरू किया था।
लक्ष्य दिसंबर 2026 तक निर्माण पूरा करने का था, लेकिन काम की रफ्तार देखकर यह लक्ष्य दूर होता दिख रहा है। वर्ष 2024 में तकनीकी जांच के बाद पुराने पुल को असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। इसके बाद से हजारों वाहन समानांतर दो-लेन पुल से गुजर रहे हैं।
ट्रक की चपेट में आने से युवक की मौत
हाल ही में इसी डायवर्जन पर एक अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से चिलगु निवासी जितेन दास (39) की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई पहली घटना नहीं है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार पुल बंद होने के बाद से अब तक 40 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें आठ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
निर्माण एजेंसी मनमाने ढंग से काम कर रही
इसके बावजूद निर्माण स्थल पर न पर्याप्त रोशनी है, न चेतावनी संकेतक और न ही प्रभावी यातायात प्रबंधन। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी मनमाने ढंग से काम कर रही है।
जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों की प्रभावी निगरानी के अभाव में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब हादसे लगातार हो रहे हैं तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
परियोजना प्रबंधक जितेंद्र सिंह का कहना है कि पुल की नींव में चट्टान मिलने तथा तीन बार मिट्टी परीक्षण कराए जाने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने मार्च 2027 तक पुल पूरा होने का दावा किया और अधिकांश दुर्घटनाओं के लिए वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की अनदेखी को जिम्मेदार ठहराया।

सड़क मित्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता शेखर गांगुली ने डायवर्जन पर तत्काल हाईमास्ट लाइट, रिफ्लेक्टर, दिशा-सूचक बोर्ड, स्पीड कंट्रोल और अन्य सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पुल तैयार नहीं हो जाता, तब तक लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एजेंसी और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सांसद प्रतिनिधि मनोज कुमार महतो ने कहा कि निर्माण में हो रही देरी और लगातार हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा जल्द उपायुक्त के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि एजेंसी को जवाबदेह बनाते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि निर्माण के लिए बनाए गए डायवर्जन के समीप व कार्यस्थल पर प्रर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जानी चाहिए।