कुम्हार समाज का एलान: प्रजापति नहीं 'कुम्हार' शब्द हो जाति सूची में बहाल, वर्ना जल्द होगा आंदोलन
खरसावां में आदिम कुम्हार महासंघ की बैठक हुई, जिसमें समाज के पिछड़ेपन पर चिंता व्यक्त की गई। महासंघ ने झारखंड सरकार से जाति सूची में 'प्रजापति' की जगह ...और पढ़ें

आदिम कुम्हार महासंघ की बैठक में भाग लेते लोग।
HighLights
कुम्हार समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग।
मांगें न मानने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी।
जागरण संवाददाता, खरसावां। झारखंड के खरसावां में आदिम कुम्हार महासंघ की प्रदेश और जिला समिति की बैठक हुई। इसमें समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन पर चिंता व्यक्त करते हुए विकास की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष सुधीर कुंभकार ने जातिगत पहचान और आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा।
आरक्षण और जाति सूची पर कड़ा रुख
माटीकला और आर्थिक उत्थान की मांगें
बैठक में केंद्रीय कोषाध्यक्ष सत्येंद्र कुम्हार ने राज्य में पिछले कई वर्षों से माटीकला बोर्ड के गठन न होने पर आपत्ति जताई। समाज ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- पुश्तैनी मिट्टी शिल्प को बढ़ावा देने के लिए कुम्हारों को 5000 रुपये प्रति माह पेंशन।
- मिट्टी के सामान पकाने के लिए जमीन, जलावन और आधुनिक पाकशाला का निर्माण।
- ईंट, टाइल्स और एस्बेस्टस बनाने के लिए लाइसेंस प्रदान करना।
- प्रत्येक कुम्हार परिवार को 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (40% अनुदान के साथ)।
- बाजारों में मिट्टी के उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष शेड की व्यवस्था।
सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
बैठक में समाज की परंपरा का जिक्र करते हुए बताया गया कि कुम्हार समाज में दहेज प्रथा नहीं है। पदाधिकारियों ने इस गौरवशाली परंपरा को भविष्य में भी अक्षुण्ण बनाए रखने और शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया।
इस बैठक में डॉ. सरोज कुमार चौधरी, रविंद्र कुंभकार, बुधन लाल कुंभकार सहित भारी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।