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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 25, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jagannath Rath Yatra: नये रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर जायेंगे प्रभु जगन्नाथ, 11 जून को महास्नान

Published: Sun, 25 May 2025 05:26 PM (IST)

सरायकेला-खरसावां जिले में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारी जोरों पर है। इस बार 27 जून को भगवान जगन्नाथ ...और पढ़ें

नये रथ पर सवार हो कर गुंडिया मंदिर जायेंगे प्रभु जगन्नाथ। (जागरण)
नये रथ पर सवार हो कर गुंडिया मंदिर जायेंगे प्रभु जगन्नाथ। (जागरण)

HighLights

  1. रथ यात्रा की तैयारी ज़ोरो पर
  2. नया रथ, विशेष कलाकृतियाँ
  3. 11 जून को महास्नान

संवाद सूत्र, खरसावां। सरायकेला-खरसावां जिला में महाप्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा की तैयारी जोरों पर चल रही है। 27 जून को प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ नये रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर (मौसीबाड़ी) के लिये रवाना होंगे।

इस बार हरिभंजा की रथ यात्रा कई मायनों में खास होगी। हरिभंजा में प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व देवी सुभद्रा के साथ इस बार नये रथ की सवार हो कर गुंडिचा मंदिर (मौसी बाड़ी) पहुंचेंगे।

यहां रथ यात्रा की तैयारी जोरों पर चल रही है। छह पहिये वाले इस रथ में अलग अलग कलाकृतियां भी रेखांकित की जा रही है। महाप्रभु के रथ में इस बार सभी नई लकड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

लकड़ियों को चाईबासा के डिपो से मंगाया गया है। रथ के निर्माण के पश्चात इसकी रंगाई-पुताई की जायेगी। रथ में विभिन्न विग्रहों की प्रतिमूर्तियां उकेरी जायेगी। अगले सप्ताह के भीतर रथ का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा

ओड़िशा के कारीगर कर रहे हैं रथ का निर्माण

हरिभंजा में महाप्रभु जगन्नाथ के रथ का निर्माण ओड़िशा के कारीगरों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। हरिभंजा में अक्षय तृतीय पर विधिवत पूजा अर्चना कर कारीगरों द्वारा प्रभु जगन्नाथ के रथ का निर्माण कार्य शुरु किया गया है। रथ को आकर्षक रुप दिया जा रहा है। इसके लिए अलग से पुरी से कपड़ा मंगाया जाएगा।

ढाई सौ साल से भी अधिक पुरानी है प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा

जमीनदार विद्या विनोद सिंहदेव ने बताया कि हरिभंजा में प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा ढाई सौ साल से भी अधिक पुरानी है। पूरे उत्सव के साथ वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन होता है।

इस दौरान सभी रश्मों को निभाया जाता है। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों ने 17 वीं सदी में प्रभु जगन्नाथ के मंदिर की स्थापना कर पूजा अर्चना शुरू की थी। साल भर यहां चतुर्था मूर्ति प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा व सुदर्शन की पूजा होती है।

11 जून को महाप्रभु का महास्नान, 27 को रथ यात्रा

इस वर्ष प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा 11 जून को आयोजित की जायेगी। इसी दिन 108 कलश पानी प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन के प्रतिमाओं का महास्नान कराया जायेगा।

इसके ठीक 15 दिनों के बाद प्रभु जगन्नाथ का नेत्रोत्सव सह नव यौवन दर्शन होगा। 27 जून को प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ नये रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर (मौसीबाड़ी) के लिये रवाना होंगे।

रथ यात्रा के दिन रथ की प्रतिष्ठा की जायेगी। इसके पश्चात प्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र व देवी सुभद्रा के साथ रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर के लिये प्रस्थान करेंगे।

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