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    सिमडेगा में फुटबॉल मैच के बाद छात्राओं के 17 KM पैदल चलकर लौटने पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, उपायुक्त से मांगा जवाब

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 08:13 AM (GMT+05:30)

    सिमडेगा में सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता से लौटने के दौरान 8 नाबालिग छात्राओं के 17 किमी पैदल चलने के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने संज ...और पढ़ें

    छात्राओं को 17 KM पैदल चलकर लौटने पर कोर्ट ने लिया संज्ञान

    छात्राओं को 17 KM पैदल चलकर लौटने पर कोर्ट ने लिया संज्ञान

    HighLights

    1. सुब्रतो कप के बाद 8 छात्राएं 17 किमी पैदल लौटीं।

    2. प्रधान न्यायाधीश ने घटना पर गंभीर संज्ञान लिया।

    3. उपायुक्त से 6 जुलाई तक जांच रिपोर्ट मांगी गई।

    संवाद सहयोगी, सिमडेगा। ठेठईटांगर प्रखंड में आयोजित सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता से लौटने के दौरान आठ नाबालिग छात्राओं के करीब 17 किलोमीटर पैदल चलकर अपने स्कूल पहुंचने के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। 

    इस मामले पर राजीव कुमार सिन्हा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष तथा मानवाधिकार न्यायाधीश सिमडेगा ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सिमडेगा उपायुक्त कंचन सिंह से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। यह कार्रवाई दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के आधार पर की गई है।

    प्रतियोगिता के बाद 17 किमी पैदल चलकर स्कूल लौटी आठ छात्राएं

    विदित हो कि बीते 28 जून को 'प्रतियोगिता के बाद 17 किमी पैदल चलकर स्कूल लौटी आठ छात्राएं' शीर्षक की खबर दैनिक जागरण में प्रमुखता के साथ पहले पेज में प्रकाशित की गयी थी।

    इसपर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिमडेगा ने बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए 1 जुलाई को उपायुक्त सिमडेगा को पत्र भेजकर कहा है कि 27 जून को प्रकाशित समाचार के अनुसार, ठेठईटांगर प्रखंड मुख्यालय में आयोजित सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद दूरदराज के क्षेत्रों की आठ छात्राओं को बिना किसी परिवहन, जिम्मेदार व्यक्ति और सुरक्षा व्यवस्था के लगभग 17 किलोमीटर पैदल चलकर अपने विद्यालय लौटना पड़ा। 

    छात्राओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही 

    पीडीजे ने पत्र के माध्यम से इसे छात्राओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही बताया गया है। उन्होंने कहा है कि प्रतियोगिता के आयोजकों की जिम्मेदारी थी कि प्रतिभागी छात्राओं के लिए सुरक्षित परिवहन एवं आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। 

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    बावजूद ऐसा नहीं होना ना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला है, बल्कि नाबालिग बालिका के मानवाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आता है। 

    6 जुलाई तक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा 

    इसके अलावा पीडीजे ने पत्र के माध्यम से उपायुक्त कंचन सिंह को निर्देश दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह बताया जाए कि संबंधित अधिकारी, आयोजन कर्ता अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है। 

    इस संबंध में 6 जुलाई तक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं इस घटनाक्रम के बाद जिले में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 

    हालांकि जिले में यह पहला मामला है जब न्यायालय ने किसी मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़े शब्दों में निर्देशित किया है। खेलप्रेमियों सहित जिलेवासियों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है।

    स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक के विरुद्ध स्पष्टीकरण का पत्र जारी 

    इधर खबर प्रकाशित होने के 3 दिनों तक बाल संरक्षण पदाधिकारी, बाल कल्याण समिति सिमडेगा अथवा जिले के किसी वरीय अधिकारी ने इसे लेकर कोई स्पष्टीकरण अथवा शोकॉज पत्र देना तक जरूरी नहीं समझा। सभी मामले की लीपापोती में जुट गये। सूत्रों की मानें तो जैसे इस बात की सूचना मिली कि न्यायालय द्वारा मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पत्र जारी किया गया है। आनन फानन में जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय से संबंधित स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक के विरुद्ध स्पष्टीकरण का पत्र जारी किया जाता है।

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