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सिमडेगा में नौकरी के नाम पर करीब 6 करोड़ की ठगी का खुलासा, फर्जी एनजीओ के जरिए बिछाया था जाल; छह गिरफ्तार

By MukeshEdited By: Mansi Kumari
Published: Thu, 10 Sep 2026 11:18 AM (IST)

सिमडेगा पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें ...और पढ़ें

HighLights

  1. सिमडेगा पुलिस ने नौकरी ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया।

  2. फर्जी एनजीओ वीकेएस फाउंडेशन ने 6 करोड़ की ठगी की।

जागरण संवाददाता, सिमडेगा। नौकरी दिलाने के नाम पर सिक्योरिटी मनी के रूप में लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का सिमडेगा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के पास से ठगी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने करीब 5-6 करोड़ रुपये की ठगी की है। यह मामला बानो और कुरडेग थाना क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न प्रखंडों से जुड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर वीकेएस फाउंडेशन नामक एनजीओ के विरुद्ध नौकरी दिलाने के नाम पर सिक्योरिटी मनी लेकर ठगी करने का आरोप लगाया गया था।

बानो थाना में कांड संख्या 27/26 तथा कुरडेग थाना में कांड संख्या 36/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी श्रीकांत एस खोटरे के द्वारा वरीय पुलिस उपाधीक्षक रणवीर सिंह एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी धर्मदेव पासवान के संयुक्त नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया।

एसआईटी ने तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों कांडों में संलिप्त छह आरोपितों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वीकेएस फाउंडेशन के नाम पर नौकरी का झांसा देकर लोगों से सिक्योरिटी मनी ली जाती थी। इस संस्था के माध्यम से नारी पैड सेवा एवं बाल जननी शिक्षा अभियान जैसे कार्यों के नाम पर लोगों को जोड़ा जाता था।

संस्था में अलग-अलग पद निर्धारित कर स्टेट हेड के लिए 3 लाख, डिस्ट्रिक्ट हेड के लिए 1.50 लाख, ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर के लिए 60 हजार और सेंटर इंचार्ज के लिए 40 हजार रुपये की सिक्योरिटी मनी ली जाती थी। नियुक्ति के बाद भी विभिन्न मदों में राशि काटे जाने की बात जांच में सामने आई है।

वहीं एसआईटी की जांच में यह भी पता चला कि संस्था का संचालन करने वाला मुख्य आरोपित खुद को नेशनल हेड के रूप में प्रस्तुत करता था। संस्था से जुड़े लोगों को अधिक से अधिक व्यक्तियों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके अलावा कमीशन और प्रोत्साहन के नाम पर लोगों को व्हाट्सऐप के माध्यम से विभिन्न पैकेज तथा प्रलोभन दिए जाते थे।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि संस्था के नाम पर प्राप्त रकम का उपयोग निजी धन अर्जन और संपत्ति खरीदने में किया जा रहा था। अब पुलिस आरोपितों की संपत्ति को चिह्नित कर उसे कुर्क करने की कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है। वीकेएस फाउंडेशन के माध्यम से हुए वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी गहन जांच जारी है।

साथ ही गिरफ्तार आरोपितों में अशोक साय, ओम प्रकाश, कुशल केरकेट्टा, सरोज केरकेट्टा, गौरती केरकेट्टा और कुन्दन शर्मा शामिल हैं। सभी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

एसपी ने आम लोगों से अपील की है कि नौकरी या किसी संस्था में नियुक्ति के नाम पर बिना सत्यापन किसी व्यक्ति अथवा संस्था को रुपये ना दें। संदेहास्पद गतिविधि या ठगी की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा पुलिस को दें। 

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