चाईबासा पहुंचे CRPF डीजी, सारंडा के जंगलों से माओवादियों के खात्मे के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' तैयार
सीआरपीएफ के महानिदेशक ऑपरेशन ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चाईबासा पहुंचे। उन्होंने सारंडा के जंगलों में माओवादियों के खिलाफ 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' की समीक्ष ...और पढ़ें

सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ऑपरेशन, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह सोमवार को चाईबासा पहुंचे।
HighLights
'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' की रणनीति पर हुई समीक्षा बैठक।
मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य।
जागरण संसू, चाईबासा। देश से माओवाद के पूर्ण सफाए के संकल्प को पूरा करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी कड़ी में सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ऑपरेशन, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह सोमवार को चाईबासा पहुंचे।
उन्होंने सारंडा के जंगलों में चलाए जाने वाले 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' को लेकर वरीय पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।
सुरक्षा बलों को पुख्ता जानकारी मिली है कि माओवादियों का शीर्ष नेता मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में शरण लिए हुए है।
इसी पनाहगाह को ध्वस्त करने के लिए सीआरपीएफ ने एक विशाल ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की है। डीजी ऑपरेशन जीपी सिंह ने बैठक के दौरान सुरक्षा बलों को दुर्गम क्षेत्रों में सामरिक बढ़त बनाने और माओवादियों के सप्लाई चेन को तोड़ने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मार्च 2026 का लक्ष्य और गृह मंत्रालय की रणनीति
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि मार्च 2026 तक भारत को माओवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं।
'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के जरिए सुरक्षा बल सारंडा के उन हिस्सों में भी अपनी पैठ बना रहे हैं, जो अब तक माओवादियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर माने जाते थे। डीजी के इस दौरे से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में सुरक्षा बल माओवादियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई शुरू करने जा रहे हैं।
बैठक में सीआरपीएफ के साथ-साथ जिला पुलिस और विशेष बलों के अधिकारी भी शामिल रहे, ताकि ऑपरेशन के दौरान बेहतर तालमेल बिठाया जा सके।