घर छोड़कर स्कूल में रात बिता रहीं महिलाएं, पुरुष दे रहे पहरा; नोवामुंडी में हाथियों का आतंक
नोवामुंडी के दुधबिला पंचायत में हाथियों के झुंड ने लगातार दो रातों तक एक घर को निशाना बनाया, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं और महिलाएं स्कूल के बरामदे में ...और पढ़ें

वन विभाग ने ₹2 लाख मुआवजे की अनुशंसा की, फसल क्षति का आकलन।
HighLights
हाथियों ने नोवामुंडी में दो रातों तक घर तोड़ा, धान खाया।
ग्रामीण दहशत में, महिलाएं स्कूल के बरामदे में रात बिता रही हैं।
संवाद सूत्र, नोवामुंडी। दुधबिला पंचायत के बाहदा गांव अंतर्गत डामुका साई टोला में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। लगातार दो रात तक हाथियों के झुंड ने एक ही घर को निशाना बनाया, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
महिलाएं घर छोड़कर बंद पड़े स्कूल के बरामदे में रात बिताने को मजबूर हैं, जबकि पुरुष पूरी रात लाठी-डंडे लेकर हाथियों को खदेड़ने के लिए पहरा दे रहे हैं। गुरुवार देर रात शिशु हाथी समेत करीब 12 हाथियों के झुंड ने गोरखा लागुरी के घर पर हमला कर मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया और घर में रखा अनाज खा लिया।
शुक्रवार रात हाथियों का वही झुंड दोबारा लौटा और मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर शेष बचा करीब पांच क्विंटल धान भी चट कर गया। गोरखा लागुरी ने बताया कि घटना के समय उनका पांच सदस्यीय परिवार घर में सो रहा था।
हाथियों की चिंघाड़ सुनते ही सभी लोग किसी तरह जान बचाकर बाहर भागे। रातभर में हाथियों ने तीन बार लौटकर घर को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पटाखे व मशालों की मदद से हाथियों को भगाने का प्रयास किया, लेकिन झुंड टस से मस नहीं हुआ।
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हाथियों ने आसपास के सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी फसलों को भी रौंद दिया, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों ने मुआवजे की मांग की है।
गोरखा लागुरी को मिलेगा दो लाख रुपये मुआवजा
नोवामुंडी वन प्रक्षेत्र के फोरेस्टर आलोक कुमार महतो ने बताया कि हाथियों द्वारा मकान क्षतिग्रस्त किए जाने के मामले में गोरखा लागुरी को दो लाख रुपये मुआवजा देने की अनुशंसा की जाएगी। घर में रखे करीब पांच क्विंटल धान के नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त फसलों के मुआवजे के लिए भी किसानों से आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। आवेदन मिलने के बाद स्थल जांच कर रिपोर्ट जिला कार्यालय भेजी जाएगी। साथ ही वन विभाग की टीम हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए प्रतिदिन शाम के समय प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर रही है।