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    जगन्नाथपुर CHC में डॉक्टर गायब, पतंग उड़ाने में छत से गिरे मासूम के लिए परिजनों ने किया हंगामा

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 08:33 PM (IST)

    जगन्नाथपुर सीएचसी में डॉक्टरों और एम्बुलेंस की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई। पतंग उड़ाते समय छत से गिरे मासूम और सड़क दुर्घटना में घायल सहिया ...और पढ़ें

    जगन्‍नाथपुर सीएचसी में डॉक्‍टर के नहीं आने पर एएनएम ने किया उपचार।

    जगन्‍नाथपुर सीएचसी में डॉक्‍टर के नहीं आने पर एएनएम ने किया उपचार।

    HighLights

    1. जगन्नाथपुर सीएचसी में डॉक्टर और एम्बुलेंस अनुपस्थित पाए गए।

    2. दो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।

    3. परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर हंगामा किया।

    जागरण संसू, जगन्नाथपुर । पश्चिमी सिंहभूम जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जगन्नाथपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। सोमवार को अस्पताल में चिकित्सकों की अनुपस्थिति और एम्बुलेंस की किल्लत के कारण दो गंभीर रूप से घायल मरीजों को घंटों तड़पना पड़ा। 
     
    इस लचर व्यवस्था से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने ओपीडी (OPD) कक्ष में करीब तीन घंटे तक जमकर हंगामा किया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आक्रोश जताया।
     

    केस 1: पतंग उड़ाते समय छत से गिरा मासूम, अस्पताल में सन्नाटा 

    पहली घटना शिव मंदिर टोला की है, जहां श्याम करोवा का 10 वर्षीय पुत्र सम्राट करोवा अपने घर की छत (अबुआ आवास) पर पतंग उड़ा रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गया, जिससे उसके चेहरे और जबड़े पर गंभीर चोटें आईं।
     
    खून से लथपथ बच्चे को लेकर परिजन सुबह 9:30 बजे अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। नर्सों ने प्राथमिक मरहम-पट्टी तो की, लेकिन विशेषज्ञ उपचार के अभाव में मासूम दर्द से कराहता रहा।
     

    केस 2: सड़क दुर्घटना में घायल सहिया को भी नहीं मिला डॉक्टर 

    दूसरी ओर, कोचड़ा गांव की सहिया सच्चड़ा प्रधान अपनी स्कूटी से हाटगम्हरिया जा रही थीं, तभी केंद्रपोसी के पास एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। पुलिस उन्हें गंभीर हालत में जगन्नाथपुर सीएचसी लेकर आई। 
     
    सहिया का एक पैर टूट चुका था, लेकिन यहां भी डॉक्टर के न होने से उन्हें उचित समय पर इलाज नहीं मिल सका। बाद में उन्हें भी चाईबासा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
     

    प्रशासनिक जांच में खुली पोल 

    ग्रामीणों के हंगामे की सूचना मिलने पर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) महेंद्र छोटन उरांव के निर्देश पर अंचल अधिकारी (CO) मनोज कुमार मिश्रा जांच के लिए अस्पताल पहुंचे। इस दौरान पता चला कि ड्यूटी के समय एक भी चिकित्सक अस्पताल में तैनात नहीं था।
     
    काफी देर बाद फील्ड वर्क से आयुष चिकित्सक डॉ. इकबाल लौटे। फि‍र जाकर मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
     

    एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई 

    अस्पताल की संवेदनहीनता यहीं खत्म नहीं हुई। गंभीर रूप से घायल सम्राट करोवा को चाईबासा रेफर तो कर दिया गया, लेकिन अस्पताल में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी। 
     
    अंततः परिजनों को भारी परेशानी के बीच निजी वाहन का इंतजाम करना पड़ा और वे बच्चे को लेकर नोवामुंडी स्थित टीएमएच (TMH) अस्पताल गए। फिलहाल चिकित्सकों के अनुसार बच्चे की स्थिति स्थिर है।

    ग्रामीणों का कहना है कि जगन्नाथपुर सीएचसी में डॉक्टरों की मनमानी और संसाधनों का अभाव अब आम बात हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जिले के वरीय अधिकारी इस पर संज्ञान लेकर व्यवस्था में सुधार नहीं करते हैं, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

    मामला संज्ञान में आते ही जांच कराई गई है। वर्तमान में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अवकाश पर हैं। प्रतिनियुक्त एक चिकित्साकर्मी पहले ही मूल स्वास्थ्य केंद्र में योगदान दे चुके हैं। फिलहाल यहां एक दंत चिकित्सक एवं एक आयुष चिकित्सक कार्यरत हैं। स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर प्रशासन गंभीर है और मामले की शिकायत सिविल सर्जन को भेजी जाएगी।

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    महेंद्र छोटन उरांव, अनुमंडल पदाधिकारी जगन्‍नाथपुर