जगन्नाथपुर में हाथियों का आतंक: 17 हाथियों के झुंड ने बागवानी उजाड़ी, ग्रामीण कर रहे रतजगा
जगन्नाथपुर के गितिकेंदु गांव में 17 हाथियों के झुंड ने घुसकर मनोज लागुरी के बागानों को उजाड़ दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत है और वे रातभर जागने को मज ...और पढ़ें

हाथियों को झुंड आ धमका।
HighLights
17 हाथियों के झुंड ने गितिकेंदु गांव में मचाया उत्पात।
मनोज लागुरी के आम-केले के बागानों को पूरी तरह किया तहस-नहस।
वन विभाग की टीम ग्रामीणों संग हाथियों को खदेड़ने में जुटी।
संसू, जगन्नाथपुर। नोवामुंडी और जगन्नाथपुर वन क्षेत्र के डुमरजोड़ा और बड़ापासेया जंगलों से भटककर 17 हाथियों का झुंड एक बार फिर गितिकेंदु गांव के पास स्थित महाबुरु में आ धमका है।
हाथियों के इस झुंड ने रविवार रात को गितिकेंदु गांव में जमकर उत्पात मचाया, जिससे पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है। जंगली हाथियों ने झामुमो नेता मनोज लागुरी और उनके भाई बिरसा लागुरी के आम और केले के बगीचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
वज्रपात का डर और रात में जागने की मजबूरी
घटना की जानकारी देते हुए झामुमो नेता मनोज लागुरी ने बताया कि गितिकेंदु सहित आसपास के गांवों के लोग हाथियों की मौजूदगी से अपनी जानमाल को लेकर बेहद चिंतित हैं।
मौसम खराब है और लगातार हो रहे वज्रपात (आसमान बिजली) के कारण ग्रामीण पहले से ही प्राकृतिक आपदा के खौफ में जी रहे हैं। ऐसे में हाथियों की निगरानी करने और उन्हें भगाने के लिए ग्रामीणों को मजबूरन आसमानी बिजली के खतरे के बीच रात के अंधेरे में घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है।
ग्रामीणों द्वारा शोर मचाने और मशालें जलाने पर हाथी और हिंसक हो रहे हैं। झुंड में शामिल हाथी गुस्से में चिंघाड़ते हुए ग्रामीणों को खदेड़ने का प्रयास भी कर रहे हैं।
वन विभाग की टीम मौके पर तैनात
सोमवार देर शाम वन विभाग के कर्मचारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। वनकर्मी ग्रामीणों के साथ मिलकर हाथियों को सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
मनोज लागुरी ने इस समस्या के मूल कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वन्यजीव हमारे पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि जंगलों में हो रही पेड़ों की अवैध कटाई और अवैध खनन के कारण इन जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। यही वजह है कि भोजन और पानी की तलाश में ये हाथी भटककर ग्रामीण और शहरी इलाकों का रुख कर रहे हैं।